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Wednesday, July 16, 2014

अब किस्तों में नहीं खरीद पाएंगे सोना

दिनेश माहेश्वरी
कोटा।
यदि आप ज्वैलरी खरीदने के लिए किस्त चुका रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए। ज्वैलरी कारोबार करने वाली कंपनियों द्वारा चलाई जा रही ये स्कीमें अवैध है। कानून के मुताबिक ऐसी स्कीम कंपनियां नहीं चला सकती है। स्कीम के खतरे को देखते हुए जांच एजेंसियों ने सरकार को चेतावनी भी दी है। नए कंपनी कानून के तहत ऐसी स्कीम को मान्यता नहीं है। जिसे देखते हुए टाइटन कंपनी (तनिष्क ब्रांड नाम) ने किस्त वाली स्कीम को बंद करने की घोषणा भी कर दी है।
कंपनी अपने 5 लाख से ज्यादा ग्राहकों को किस्त के एवज में ली गई राशि लौटाने जा रही है।कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एक अप्रैल 2014 से लागू नए कंपनी कानून के तहत ऐसी स्कीम चलाना अवैध है। इस संबंध में मंत्रालय ने टाटा समूह की कंपनी टाइटन द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण में 23 जून को साफ कर दिया है कि इस तरह की स्कीम नहीं चलाई जा सकती है। अधिकारी के अनुसार ज्वैलरी खरीदने के एवज में किस्त पर चलाई जा रही स्कीम के बारे में जांच एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है। ऐसे में अगर कोई कंपनी ऐसी स्कीम चलाती है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ज्वैलरी इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार अधिकतर कंपनियों ने ऐसी स्कीम को फिलहाल रोक दिया है। इंडस्ट्री के अनुसार कंपनियां नए कानून के तहत किस तरह की स्कीम चलाई जा सकती है, उसका फिलहाल अध्ययन कर रही हैं।टाटा समूह की टाइटन कंपनी लिमिटेड ने गोल्डन हार्वेस्ट और स्वर्ण निधि स्कीम को बंद कर दिया है। कंपनी ने इस संबंध में बाकायदा विज्ञापन भी जारी किया है।
टाइटन के रिटेल एंड मार्केटिंग (ज्वैलरी डिवीजन) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संदीप कुलहाली ने बताया कि नए कानून के तहत स्कीम को नहीं चलाया जा सकता है। जिसे देखते हुए कंपनी ने 18 जुलाई से 21 अगस्त तक किस्त चुकाने वाले ग्राहकों को उनकी राशि रिटर्न और दूसरी शर्तों के आधार पर चुकाने का फैसला किया है।
कंपनी देश भर में फैले 167 आउटलेट के जरिए ग्राहकों को यह सुविधा देगी। कुलहाली के अनुसार हमारी कोशिश है कि नए नियमों के तहत हम स्कीम को फिर से लांच करें।ज्वैलरी खरीदने के लिए कंपनियां ग्राहकों को किस्त का ऑफर देती है। जिसमें 11 किस्त चुकाने पर एक किस्त की छूट जैसा विकल्प ग्राहकों को कंपनियां देती है, जो कि नए कंपनी कानून के तहत अवैध है। नए कानून में कंपनियां 12 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न नहीं दे सकती है। साथ ही उनकी कुल जमाएं कंपनी के नेटवर्थ के मुकाबले 25 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है।