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Saturday, March 4, 2017

आपकी सेक्शुअल परफॉर्मेंस जज करेगा यह स्मार्ट कॉन्डम

आ गया है दुनिया का पहला स्मार्ट कॉन्डम जो इंटरकोर्स के दौरान आपके सेक्शुअल परफॉर्मेंस का आकलन करेगा और इससे जुड़ा सारा डेटा रेकॉर्ड करेगा। इस स्मार्ट कॉन्डम का नाम आई.कॉन (i.con) है जिसे एक ब्रिटिश कंपनी ने बनाया है।
कंपनी का दावा है कि आई.कॉन (i.con) टेक्निकली एक कॉन्डम नहीं है बल्कि एक बेहद हल्का और वॉटर रेजिस्टेंट रिंग है जो सामान्य कॉन्डम के नीचे पेनिस के बेस पर लगाया जाता है। लेकिन सामान्य कॉन्डम की तरह एक बार इस्तेमाल कर इसे फेंका नहीं जाता बल्कि हर बार सेक्स के वक्त इसे यूज किया जा सकता है।
यह स्मार्ट कॉन्डम इन जानकारियों को इक्ट्ठा करेगा-
- सेक्शुअल इंटरकोर्स के दौरान कितनी कैलरी बर्न हुई।
- थ्रस्ट यानी जोर लगाने की स्पीड, संख्या और औसतन रफ्तार।
- सेशन की फ्रीक्वेंसी
- स्किन का औसत तापमान
- कमर की नाप
- सेक्स के दौरान जिन पोजिशन्स का इस्तेमाल हुआ

Monday, February 20, 2017

चटकने पर खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगा यह स्मार्टफोन

फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक भविष्य के स्मार्टफोन का प्रारूप तैयार किया है जो टूटने या चटकने पर खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है। चारों तरफ से खास शीशे से ढका हुआ यह फोन गिरने या अन्य वजह से अगर टूटता है तो इसके अंदर एक वाइब्रेशन पैदा होता है। यह वाइब्रेशन गरमी पैदा करता है जिससे शीशा पिघलता है और वह फोन खुद-ब-खुद जुड़ जाता है।
फिलहाल कंपनी ने  यह जानकारी नहीं दी है कि फोन के डिसप्ले के अलावा अगर इसके अंदर के पार्ट्स खराब होते हैं तो वह कैसे ठीक होंगे। कुछ खबरों के मुताबिक कंपनी ने किसी खास तकनीक का प्रयोग किया है जिसकी वजह से फोन के अंदर के हार्डवेयर पाट्र्स खराब ही नहीं होंगे। टेक जगत के मुताबिक इस फोन का बाहरी भाग भले ही खास शीशे का हो मगर अंदर की बॉडी ठोस एल्युमिनियम से तैयार की गई है।
टेक्सट को वॉयस मैसेज में बदल देगा
एलो नाम के इस फोन में कंपनी ने वॉयस कंट्रोल और फेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। यानी इस फोन को आवाज या चेहरे की पहचान कराकर अनलॉक किया जा सकता है। भविष्य के इस फोन पर टेक्स्ट के रूप में आए मैसेज को आवाज में बदलकर सुना भी जा सकता है और बोलकर उनका जवाब भी दिया जा सकता है। इसमें वे सभी फीचर शामिल होंगे जो एक साधारण स्मार्टफोन में होते हैं।
टच स्क्रीन और बटन दबाने की जरूरत नहीं
एलो स्मार्टफोन में बेहतरीन वॉयस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस फोन को न सिर्फ अनलॉक करने बल्कि कॉल करने , वॉल्यूम बढ़ाने, गाना सुनने या फिर कुछ लिखने के लिए टच स्क्रीन या कोई अन्य बटन दबाने की जरूरत नहीं होगी। फोन को बोलकर कोई भी कमांड दिया जा सकता है। यह बोलते ही सारे काम खुद-ब-खुद करने लगेगा।

Saturday, February 18, 2017

प्रीपेड वॉलेट का कोई भविष्य नहीं

एचडीएफसीबैंक के एमडी और सीईओ आदित्य पुरी ने कहा है कि पेटीएम जैसे प्रीपेड वॉलेट बिजनेस का कोई भविष्य नहीं है। इनका मार्जिन बहुत कम होता है। कैशबैक के जरिए ग्राहकों को जोड़ने वाली कंपनियां घाटे में हैं। पुरी शुक्रवार को यहां नैस्कॉम समिट में बोल रहे थे। पुरी का बयान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि एचडीएफसी बैंक की भी 'चिल्लर' नाम से वॉलेट सर्विस है।
उन्होंने कहा, 'वॉलेट मार्केट की लीडर कंपनी पेटीएम 1,651 करोड़ रुपए घाटे में है। आप ऐसा बिजनेस नहीं चला सकते जिसमें कहें कि 500 रुपए के भुगतान पर 250 रुपए कैशबैक पाएं। वॉलेट कंपनियां अलीबाबा का मॉडल भी नहीं अपना सकतीं क्योंकि भारतीय रेगुलेटर चीन से बेहतर हैं। मेरे खाते में 1,651 करोड़ का नुकसान नहीं है। कैशबैक को छोड़ दें तो क्या एचडीएफसी बैंक के वॉलेट से बेहतर कोई वॉलेट है?' गौरतलब है कि सिर्फ डिजिटल वॉलेट चलाने वाली कंपनियों और बैंकों के बीच इन दिनों काफी मतभेद चल रहे हैं। पिछले महीने आईसीआईसीआई बैंक ने फ्लिपकार्ट के 'फोनपे' पर पैसे का ट्रांसफर रोक दिया था। इससे पहले एसबीआई ने अपने ग्राहकों के लिए पेटीएम पर पैसे ट्रांसफर की सुविधा पर रोक लगाई थी। पुरी ने कहा, ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन के लिए बैंकों ने अपने वॉलेट लांच किए हैं।
सिर्फ वॉलेट चलाने वाली कंपनियों को इंटरमीडियरी के तौर पर बैंकों की जरूरत होती है। वहीं से वॉलेट में पैसे आते हैं। यूपीआई के आने से बैंक कम समय में ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।
पेमेंट बैंकों द्वारा जमा पर 7% तक ब्याज देने की घोषणा पर पुरी ने कहा कि इतना ज्यादा ब्याज लंबे समय तक नहीं दिया जा सकता। गौरतलब है कि एयरटेल पेमेंट बैंक ने 7.25% ब्याज देने की घोषणा की है।
पेटीम का पेमेंट बैंक भी जल्दी
एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी ने फंसे कर्ज के लिए अलग बैंक बनाने के विचार का समर्थन किया है। उनके अनुसार एनपीए की सर्वकालिक समस्या के समाधान में मदद करने वाले किसी भी कदम का स्वागत है। पुरी ने शुक्रवार काे नैसकाम के एक कार्यक्रम में संवाद में कहा, फंसे कर्ज के लिए अलग बैंक (नेशनल बेड बैंक) का विचार बुरा नहीं है। सरकार और नियामक विभिन्न चर्चा कर रहे हैं कि एनपीए की समस्या से कैसे निपटा जाए और यह जरूरी भी है ताकि बैंकिंग प्रणाली और अधिक करने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि इस बारे में बैंक्रप्सी कोड पर भी चर्चा हो रही है। इसके साथ ही हम बैंकर भी एनपीए मुद्दे के निपटान को लेकर काम कर रहे हैं। लगभग 20% बैंकिंग आस्तियां दबाव में या फंसी हुई हैं और सितंबर तिमाही में एनपीए 13.5% रहा।
इसमें भी 90% से अधिक फंसा हुआ कर्ज सरकारी बैंकों के पास है। सरकार ने वित्त वर्ष 2017 पूर्व वित्त वर्ष में इन बैंकों में बड़ी राशि डाली है और अगले दो वित्त वर्ष में इनकी मांग कम से कम 91000 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। फंसे कर्ज के लिए अलग से बैंक का विचार लंबे समय से चल रहा है लेकिन हाल ही में आर्थिक समीक्षा में एक बार फिर इस तरह के संस्थान की जरूरत पर जोर दिया गया है।





Thursday, February 16, 2017

6.60 लाख रुपये में करें उड़ने वाली कार की बुकिंग

रोड पर ट्रैफिक की बढती समस्या से निजात दिलाने के लिए फ्लाइंग कार अब कांसेप्ट से जल्द ही आपको रोड से दौड़ते हुए हवा में उड़ाती नजर आएगी। डच कार कंपनी पैल-वी ने उड़ने वाली कार चलाने के सपने को हकीकत में बदल दिया है। दुनिया की पहली कर्शियल उड़ने वाली कार की बिक्री आम लोगों के लिए शुरू कर दी है। ग्राहक दो उड़ने वाली कारें, लिबर्टी स्पोर्ट और लिबर्टी पायनियर की प्री-बुकिंग शुरू कर सकते हैं।
आपको बता दें की आप कार की बुकिंग मात्र 6.60 लाख रुपए देकर स्पोर्ट और पायनियर को 16.70 लाख रुपए देकर बुक कर सकते हैं। कंपनी ने लिबर्टी स्पोर्ट की कीमत 2 करोड़ 70 लाख रुपए और लिबर्टी पायनियर की कीमत 4 करोड़ 1 लाख रुपए रखी
है। कार की डिलेवरी यूरोप में 2018 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
स्पीड और माइलेज
इस कार को कॉपटर बनने में 10 मिनट लगता है। जमीन पर ये कार 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। हवा में 112 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकेंगी। एक लीटर इंधन में ये 11 किलोमीटर चलेंगी। एक्स्ट्रा पैसे देने पर खरीदारों को ट्रेनिंग सेशन और सारे ही उपकरणों का डिस्प्ले देखने को मिलेगा। इन कारों में फोल्ड किए जा सकने वाले रोटर ब्लेड लगे हैं जो जमीन पर फोल्ड रहेंगे और उड़ने के लिए हेलीकॉप्टर की तरह घूमेंगे। 

6.60 से 16.70 रुपए में करे बुकिंग
पैल-वी ने दो कार लिबर्टी स्पोर्ट और लिबर्टी पायनियर की बिक्री शुरू की है। लिबर्टी स्पोर्ट की कीमत 4 लाख डॉलर (2.70 करोड़ रुपए) और 6 लाख डॉलर (4.1 करोड़ रुपए) तय। स्पोर्ट को 6.60 लाख रुपए देकर बुक कर सकते हैं। पायनियर को रिजर्व करने के लिए 16.70 लाख रुपए खर्चने होंगे। बुकिंग के लिए दिए हुए पैसे नॉन रिफंडेबल है।

टीवी पर भी देख सकेंगे फेसबुक पर पोस्ट वीडियो

फेसबुक ने एक नया एप लांच करने जा रहा है, जिसकी मदद से सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो टीवी पर भी देखा जा सकेगा। यह नया एप एप्पल टीवी, अमेजन के फायर टीवी और सैमसंग स्मार्ट टीवी के लिए है। इससे फेसबुक के यूजरों को इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाले गए वीडियो को बड़ी स्क्रीन पर देखने की सुविधा मिलेगी।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भले छोटा हो लेकिन फेसबुक की महत्वाकांक्षा वीडियो सर्विस क्षेत्र में यूट्यूब से प्रतिस्पर्धा करने की है। फिलहाल इस एप से फेसबुक यूजर शेयर किए गए वीडियो को आसानी से टीवी पर भी देख सकेंगे।एक ब्लॉग पोस्ट में प्रोडक्ट मैनेजर डाना सिटलर और इंजीनियरिग मैनेजर एलेक्स ली ने कहा, "पिछले साल हमने आपको अपने टीवी पर फेसबुक से वीडियो देखने की सुविधा दी थी और आज इसकी क्षमता में विस्तार करने की घोषणा की है। इस एप के जरिये आप दोस्तों द्वारा साझा किए गए वीडियो या लाइव वीडियो को भी टीवी पर देख सकेंगे।

Sunday, February 12, 2017

जब 'तम्मा-तम्मा' गर्ल माधुरी ने सिखाया वरुण-आलिया को डांस

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट और वरुण धवन की फिल्म 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' का दूसरा गाना 'तम्मा-तम्मा' दो दिन बाद रिलीज होने वाला है। धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित के 'तम्मा-तम्मा' सॉन्ग को वरुण और आलिया रीक्रिएट करने वाले हैं। आलिया ने इस टीचिंग क्लास की वीडियो भी शेयर की है।
वीडियो में माधुरी, आलिया और वरुण को डांस सिखा रही हैं। हालांकि दोनों को पहले माधुरी के स्टेप्स कॉपी करने में दिक्कत आ रही थी, लेकिन जब माधुरी ने उन्हें सिखाया, तो दोनों अच्छे से स्टेप्स फॉलो करने लगे।आलिया ने इसके साथ माधुरी का एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें माधुरी बता रही है कि दो दिन बाद ये गाना रिलीज होने वाला है। बता दें कि इससे पहले फिल्म का टाइटल ट्रैक रिलीज हुआ था। जिसे अभी तक 1 करोड़ से भी ज्यादा व्यूज मिल गए हैं। फिल्म 10 मार्च को रिलीज होगी। 

Tuesday, February 7, 2017

'बद्रीनाथ की दुल्हनियां' का पहला गाना हुआ रिलीज

चंद दिन पहले ही आलिया भट्ट और वरुण धवन की 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' का मजेदार ट्रेलर रिलीज हुआ था और थोड़े ही समय में इसे लाखों लोग इसे देख चुके थे। अब इस फिल्म का टाइटल ट्रेक जारी हुआ है।वरुण और आलिया की जोड़ी पहले दो फिल्मों 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर' और'हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया' में दिख चुकी है। अब यह जोड़ी फ़िल्म 'बद्रीनाथ की दुल्हनियां' में भी नज़र आने वाली है।
ट्रेलर तो आपने देख ही लिया होगा...अब तैयार हो जाइए इसके पहले गाने के लिए।'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' का टायटल ट्रैक रिलीज हो गया है। इसमें वरुण की नॉटी नजरिया टिकी है अपनी दुल्हनिया आलिया पर। होली के माहौल में फिल्माया गया यह गाना आपको 1966 के गाने 'पिंजरे वाली मुनिया' की याद दिलाएगा! 60s के इस गाने को नेहा कक्कर, देव नागी और मोनाली ठाकुर ने अपनी आवाज़ से नए दौर का तड़का दिया है।'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' फ़िल्म को डायरेक्ट कर रहें हैं शशांक खेतान जो 10 मार्च को रिलीज़ हो रही है। वैसे ट्रेलर को अगर आपने ध्यान से सुना होगा तो इस फ़िल्म में कई पुराने गानों का रीमेक किया गया है। अब देखते हैं कब और कैसे सारे गानों को रिविल किया जाएगा तब तक यहां देखिये बद्रीनाथ का टायटल ट्रैक और तैयार हो जाइए इस होली गाने पर नाचने के लिए...


Saturday, January 21, 2017

यौन संबंधों से इंकार पति पर अत्याचार

बॉम्‍बे हाईकोर्ट की नागपुर एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि अगर पत्‍नी अपने पति को रेगुलर यौन संबंध बनाने से रोकती है तो यह पति पर अत्‍याचार है और उनके बीच तलाक का आधार हो सकता है। अदालत ने बात अकोला फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराते हुए कही जिसमें यौन संबंध नहीं बनाने देने पर पति द्वारा तलाक की मांग मंजूर कर ली गई थी।हाईकोर्ट के जस्टिस वसंती नाइक और जस्टिस विनय देशपांडे की बेंच ने ने इस फैसले को लेकर कहा कि पत्‍नी की तरफ से पति को यौन संबंध बनाने से इन्‍कार करना उस पर सच में अत्‍याचार करने जैसा है।
रिकॉर्ड में कई सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि पत्‍नी के यौन संबंधों से इन्‍कार के अलावा घर के काम ना करना रेगुलर यौन संबंध ना बनाने के चलते पति को मानसिक प्रताड़ना मिली है।महीनों रहती थी मायके, अमावस और पूनम के बहाने नहीं बनाती थी संबंधएक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार तलाक लेने वाले पति की शिकायत थी कि उसकी शादी 2001 में हुई थी और उसकी पत्‍नी लगातार अपने मायके जाती रहती थी। वहां जाकर वो महीने भर रहती थी और तभी लौटती थी जब उसका पति या सास लेने जाती थी।पति ने कहा कि उसकी पत्‍नी घर के काम ना करने के साथ ही उसके साथ यौन संबंध भी नहीं बनाने देती थी। पति जब भी संबंध बनाने जाता वो कभी अमावस तो कभी पूनम होने का बहाना कर इन्‍कार कर देगी। इसके चलते पति तनाव में रहता था और तंग आकर अदालत पहुंच गया।
महिला ने लगाया दहेज प्रताड़ना का आरोप
पति के आरोपों को नकारते हुए महिला ने अपने ससुराल वालों पर ही दहेज प्रताड़ना का आरोप लगा दिया। पति के बयान के आधार पर अकोला कोर्ट ने दोनों के बीच 2011 को तलाक को मंजूरी दे दी। इस फैसले को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला को उसके परिवार के बड़े लोगों ने अपने पति के साथ मुक्‍त होकर यौन संबंध बनाने की सलाह दी थी। अगर महिला पहले से ही पति से रोज फ्री होकर यौन संबंध बनाती तो उसे ऐसी सलाह नहीं देनी पड़ती। वहीं महिला यह साबित करने में नाकाम रही है कि उससे दहेज की मांग की गई। फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के सबूतों को सही तरीके से देखा और पाया कि पति पर अत्‍याचार हुआ है।

Friday, January 20, 2017

कर है बचाना तो सही जुगत भिड़ाना

नौकरीपेशा लोगों के लिए अक्सर साल का यह वक्त सबसे ज्यादा परेशान करने वाला होता है। नया साल शुरू होते ही दफ्तर के मानव संसाधन (एचआर) विभाग से टोकाटोकी शुरू हो जाती है और उन सभी निवेश योजनाओं के कागजात मांगे जाते हैं, जिनका जिक्र आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर बचाने के लिए वित्त वर्ष के आरंभ में किया गया था। ऐसे में अक्सर कर्मचारी निवेश की किसी उचित योजना के बिना ही आंकड़े दे देते हैं और जो भी कागज हाथ लगते हैं, उन्हें पेश कर दिया जाता है।
 यहां अक्सर दिक्कत होती है क्योंकि उन्होंने वर्ष के आरंभ में बचत और निवेश की जो योजना बताई थी, उसके सभी सबूत दफ्तर में मांगे जाते हैं। जब तक वे निवेश के सबूत पेश नहीं करते हैं तब तक उन्हें वेतन में कमी की मार झेलनी पड़ती है क्योंकि उनका मोटा कर कटता है। कई बार तो वेतन का मामूली हिस्सा ही उन्हें मयस्सर होता है और कुछ का पूरा वेतन ही कट जाता है। यह वाकई में बहुत दिक्कत भरा वक्त होता है क्योंकि आपको कर का गणित पूरा करने के लिए अपने नियोक्ता को रकम देनी भी पड़ सकती है यानी वेतन तो हाथ नहीं आया उलटा अपनी ही जेब से पैसा देना पड़ गया। अगर आप इन परेशानियों से बचे रहना चाहते हैं तो कर का सिरदर्द दूर रखना चाहते हैं तो इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
 
80सी का लाभ
 वेतनभोगी कर्मचारियों को धारा 80सी, 80डी, 80जी आदि के तहत कर छूट मिलती है। धारा 80सी भविष्य निधि और अन्य निवेश एवं बीमा पॉलिसी पर 1.50 लाख रुपये की छूट देती है। अन्य धाराएं आवास किराया भत्ता (एचआरए), अवकाश यात्रा भत्ता (एलटीए), वाहन भत्ता, चिकित्सा भत्ता और दूसरे भत्तों पर कर छूट का लाभ देती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि कर्मचारी अक्सर 80सी पर विचार करते हैं।  'बड़ी तादाद में वेतनभोगी करदाता धारा 80सी के तहत जब कर छूट का हिसाब लगा रहे होते हैं तो अक्सर वे कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ को उसमें गिनना भूल जाते हैं। यह भूल बहुत भारी बैठती है। इसके अलावा कई बार वे जल्दबाजी में तमाम निवेश योजनाएं खरीद लेते हैं, जबकि उन्हें पहले बीमा की जरूरतों और आवास ऋण पर छूट के बारे में भी सोचना चाहिए।' यदि आप राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (एनपीएस) में निवेशक हैं तो आप धारा सीसीडी के तहत 50,000 रुपये की छूट भी ले सकते हैं। 
स्वास्थ्य बीमा लाभ
 यह भी ऐसी श्रेणी है, जिसकी कमी आपको खल सकती है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति यानी मेडिकल रीइंबर्समेंट में मिलने वाली 15,000 रुपये तक की राशि करमुक्त होती है। इसके अलावा धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा लाभ भी आप ले सकते हैं। इसके तहत, आप स्वयं, पत्नी, बच्चे और माता-पिता के लिए प्रीमियम पर 25,000 रुपये की कर छूट का दावा कर सकते हैं। यदि माता-पिता 60 साल से अधिक उम्र के हैं तो इसके लिए 35,000 रुपये की अतिरिक्त कर छूट सीमा है। कुल मिलाकर, आप संबद्घ पॉलिसी खरीद कर 60,000 रुपये तक बचा सकते हैं।  
ऋण अदायगी
 इसमें दोहरे लाभ हैं- मूल भुगतान पर धारा 80सी के तहत दावा किया जा सकता है और धारा 24बी के तहत अतिरिक्त दो लाख रुपये का दावा किया जा सकता है। संपत्ति में सामूहिक रूप से मालिकाना (पति-पत्नी दोनों) हक रखने वाले दंपती के लिए ब्याज पर कर लाभ सालाना 5 लाख रुपये तक हो सकता है। यदि आपने शैक्षिक ऋण ले रखा है तो पूरा ब्याज भुगतान धारा 80ई के तहत कर छूट के लिए उपलब्ध है, लेकिन इसमें मूल रकम की अदायगी का लाभ हासिल नहीं है।
 ये ऐसे प्रमुख लाभ हैं जो आप आय-कर विभाग से हासिल कर सकते हैं। एचआर विभाग को उचित दस्तावेज सौंपकर आप काफी रकम बचा सकेंगे। यदि आप इन सभी कर छूटों का लाभ लेने में सक्षम हैं तो आपको 7 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। इसमें 2.5 लाख रुपये की मूल छूट सीमा शामिल है। यदि आप आवास किराया भत्ते, एलटीए आदि का सही दस्तावेज दे रहे हैं तो लाभ भी अधिक हासिल हो सकता है।
 
पांच साल तक के लिए
 यदि आपको पांच साल के अंदर पैसे की जरूरत हो तो राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) या पांच वर्षीय डाककर जमा योजनाएं अच्छा विकल्प हैं। एनएससी मौजूदा समय में सालाना 8 फीसदी का प्रतिफल देते हैं जबकि डाकघर जमा पर 7.8 फीसदी का ब्याज मिलता है। पांच साल की बैंक एफडी भी धारा 80सी के तहत कर छूट प्रदान करती है। चूंकि ये निर्धारित आय निवेश हैं, इसलिए इनमें सिर्फ अतिरिक्त पूंजी वाले व्यक्ति ही कर-बचत संबंधित निवेश के लिए विचार कर सकते हैं।  
10 साल या अधिक
 दीर्घावधि निवेश के लिए, पब्लिक प्रोवीडेंट फंड (पीपीएफ) मौजूदा समय में सालाना 8 फीसदी का प्रतिफल देता है जो एक अच्छा विकल्प है, लेकिन इसमें निवेश 15 साल के लिए लॉक हो जाता है। पीपीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ईईई है। लेकिन ब्याज दर हर तिमाही में बदलती है।

Tuesday, January 10, 2017

अब बैंकों में तैनात होंगे रोबोट!

एचडीएफसी बैंक अब अपनी शाखाओं में रोबोट तैनात करेगा। यह इंटेलिजेंट रोबोटिक असिस्टेंट  शाखाओं में ग्राहकों की मदद करेगा। एचडीएफसी बैंक में डिजिटल बैंकिंग के कंट्री हेड नितिन चुघ ने कहा कि ग्राह
कों की प्रतिक्रिया के आधार पर अन्य शाखाओं में भी रोबोट लगाए जाएंगे और उनके द्वारा किए जाने वाले काम का दायरा बढ़ाया जाएगा। एचडीएफसी बैंक ने अपनी तकनीकी क्षमता सुधारने के लिए पिछले साल कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) परियोजना शुरू की थी और शाखाओं में रोबोट लगाना उसी का एक हिस्सा है।  
अब बैंक कृत्रिम बौद्धिकता का इस्तेमाल अपने ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने, ग्राहक सेवा, कर्मचारियों को सहयोग, विपणन, स्वचालन आदि में करने की योजना बना रहा है। बैंक इन आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपने विकास के लिए करने की भी रणनीति बना रहा है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में कृत्रिम बौद्धिकता के इस्तेमाल के लिए बैंक उन वित्तीय तकनीक (फिनटेक) कंपनियों के साथ साझेदारी के बारे में विचार कर रहा है, जो मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में कारोबार करती हैं।
 दरअसल, एक अन्य ऋणदाता सिटी यूनियन बैंक ने भी अपनी चेन्नई शाखा में एक ह्यूमनोइड लगाया है। बैंक ने कहा था कि शुरुआत में यह रोबोट ग्राहकों द्वारा पूछे गए बैंकिंग से संबंधित सामान्य सवालों के जवाब देगा लेकिन बाद में इसे बैंकिंग प्रणाली से संबंधित लेनदेन से जोड़ा जाएगा। अन्य बैंक भी अपनी बैंकिंग तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए कृत्रिम बौद्धिकता या सॉफ्टवेयर रोबोटिक्स पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।
 उदाहरण के लिए आईसीआईसीआई बैंक भी ग्राहक आईडी बनाने, पते एवं मोबाइल नंबर अद्यतन करने, एटीएम से संबंधित सवालों के जवाब देने जैसे कार्यों के लिए कृत्रिम बौद्धिकता का इस्तेमाल कर रहा है। कृत्रिम बौद्धिकता के अलावा बैंक ब्लॉक चेन, वर्चुअल रियलिटी जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक, येस बैंक जैसे कुछ बैंकों ने पहले ही ब्लॉक चेन तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। हालांकि एचडीएफसी बैंक ने इस तकनीक का इस्तेमाल अभी शुरू नहीं किया है।
 चुघ ने कहा, 'हम दस्तावेज प्रबंधन, केवाईसी और लेनदेन प्रक्रिया सहित ब्लॉक चेन की सभी उपयोगिताओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। हालांकि अभी यह शुरुआती अवस्था मेंं है और भारत में हमें ऐसे परिपक्व मॉडल नहीं मिलें हैं, जिन्हें लागू किया जा सके।' आने वाले समय में एचडीएफसी समूह की अन्य कंपनियां भी अपने कारोबार में रोबोट के इस्तेमाल के बारे में विचार कर सकती हैं। बैंक के ज्यादातर ग्राहक पहले ही डिजिटल बैंकिंग (मार्च 2016 के अंत में 71 फीसदी) को अपना चुके हैं और इसलिए अब वह डिजिटल प्रक्रियाओं के दूसरे चरण पर ध्यान दे रहा है। 

Friday, December 30, 2016

एक जनवरी से ज्वैलरी हॉलमार्किंग जरुरी हो जाएगा।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने स्वर्ण आभूषणों के लिए हॉल मार्किंग संबंधी मानक को पुनरीक्षित करने तथा इसे एक जनवरी से लागू करने का निर्णय लिया है। ब्यूरो की जारी विज्ञप्ति के अनुसार हाल मार्किंग किए गए आभूषण अब 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट में उपलब्ध होंगे। लोगों की सुविधा के लिए आभूषणों की शुद्धता के अलावा कैरेट की मुहर लगाई जाएगी। जैसे 22 कैरेट के लिए 916 के अलावा 22के के मुहर लगाए जाएंगे जबकि 18 कैरेट के लिए 750 और 18के के तथा 14 कैरेट के लिए 585 और 14के के मुहर लगाए जाएंगे।
सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। बीआईएस को जारी नए नियम की कॉपी हमारे हाथ भी लगी है। इसके मुताबिक एक जनवरी से सिर्फ 22, 18 और 14 कैरेट सोने की ज्वैलरी की हॉलमार्किंग हो सकेगी। गौर करने वाली बात ये है कि अब तक कुल 10 कैटेगरी में हॉलमार्किंग की सुविधा थी, जिसे सरकार ने हटा दिया है।
नए नियम के तहत सोने के सिक्के और बिस्किट का भी स्टैंडर्ड तय होगा। सोने की हॉलमार्किंग कंज्यूमर के हक में है। लेकिन ज्वैलर्स इसका काफी विरोध कर रहे हैं। ज्वेलर्स की दलील है कि देश में हॉलमार्किंग की पार्याप्त सुविधा ही नहीं है।
सरकार जनता को खोटे सोने से छुटकारा दिलाना चाहती है, लेकिन सरकार का ये कदम ज्वेलर्स को नागवार गुजरा है। ज्वेलर्स दलील दे रहे हैं कि देश में हॉलमार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में भला एक जनवरी से पूरे देश में इसे कैसे लागू किया जाएगा। दरअसल देश में करीब पौने चार सौ हॉलमार्किंग सेंटर है।
जो फिलहाल पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। आॅल इंडिया जेम्स एंड वेलरी ट्रेड फेडरेशन का मानना है कि दिक्कतें तो होगी लेकिन इससे इंडस्ट्री को काफी फायदा भी होगा। आमतौर पर कीमतों में बेंचमार्किंग न होने की वजह से कम शुद्धता वाले सोने में ज्वैलर्स काफी गोलमाल करते हैं। कम शुद्धता वाले सोने को खरा सोना बताकर ऊंचे दाम पर बेच देते हैं और जब ग्राहक हॉलमार्किंग की मांग करते हैं तो उन्हें महंगी लागत का भय दिखाते हैं। जबकि हॉलमार्किंग की लागत सिर्फ तीस रुपए प्रति पीस होती है। ऐसे में सरकार के इस कदम से कंज्यूमर्स को जहां सोने की शुद्धता की गारंटी मिलेगीए वहीं ज्वैलर्स को गोलमाल करने के रास्ते बंद हो जायेंगे।

Thursday, December 29, 2016

डिजिटल पेमेंट में गड़बड़ी हुई तो कौन करेगा गौर?

जब से केंद्र सरकार ने विमुद्रीकरण यानी नोटबंदी का ऐलान किया है तभी से नकदरहित लेनदेन पर सभी को जोर नजर आ रहा है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)भी सुर्खियों में है। नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ कांत ने यूपीआई दुनिया की सबसे आसान भुगतान प्रणालियों में से एक करार दिया है। इसमें आपको बहुत कुछ झंझट भी नहीं करना पड़ता है। आपको जिसे भुगतान करना है या जिसके पास रकम भेजनी है, उसके आधार क्रमांक यानी आभासी पेमेंट एड्रेस की जरूरत पड़ती है। यह पता लगने के बाद आपको केवल अंगूठा टिकाना होगा और आप अपने बैंक खाते तक भी पहुंच जाएंगे तथा दूसरे पक्ष को रकम भी भेज पाएंगे। इसमें सबसे अच्छी और खास बात यह है कि बैंक की खाता संख्या और आईएफएससी कोड जैसी तमाम बातें याद रखने की आपको कोई जरूरत नहीं है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह प्रक्रिया कितनी आसान है।
 वाकई यह बहुत आसान है, लेकिन बैंक और ग्राहक कुछ बातों को लेकर चिंतित रहते ही हैं। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य ने एक टेलीविजन चैनल को पिछले दिनों दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अभी यह बात स्पष्टï नहीं है कि अगर लेनदेन पूरा नहीं हो पाता है तो उसकी शिकायत किस बैंक से की जाएगी और उसे सुलझाने का जिम्मा किसका होगा। हालांकि यूपीआई के जरिये लेनदेन में 8 नवंबर के बाद से जबरदस्त इजाफा हुआ है। जिस दिन प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया था, उस दिन यूपीआई से 3,721 लेनदेन हुए थे, लेकिन 7 दिसंबर को इसके जरिये 48,238 लेनदेन किए गए। इस तरह महज एक महीने के अंदर लेनदेन में 1,196 फीसदी का इजाफा हुआ। फिर भी कई लोगों को इस पर भरोसा नहीं है।
 कौन निपटाएगा शिकायत
 यूपीआई के जरिये लेनदेन में चार पक्ष शामिल हो सकते हैं: दो पक्ष तो ऐप तैयार करने वाले होंगे (एक रकम भेजने वाले के फोन में मौजूद ऐप बनाने वाला और दूसरा पाने वाले का ऐप बनाने वाला), तीसरा वह बैंक, जिससे रकम भेजी जानी है और चौथा वह बैंक, जिसमें रकम आनी है। यूपीआई में व्यक्ति किसी बैंक का ग्राहक बने बगैर ही उसके ऐप का इस्तेमाल कर सकता है और किसी दूसरे बैंक के खाते को उससे जोड़ सकता है। लेकिन यदि लेनदेन विफल रहता है तो वह रकम भेजने वाले के खाते में वापस नहीं आती है। ऐसे में उसे अपने बैंक के पास ही शिकायत करनी होगी।
 बैंकरों का कहना है कि अभी किसी भी पक्ष को यह नहीं पता होता कि समस्या किस जगह है और रकम खुद-ब-खुद वापस आने की कोई व्यवस्था भी अभी नहीं है। एक बैंकर कहते हैं, 'फिलहाल नैशनल पेमेंट्ïस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) अधिकारी इन दिक्कतों को सुलझान में मदद करते हैं, लेकिन अभी लेनदेन की संख्या भी बहुत कम है। जब रोजाना कई लाख लेनदेन होंगे तो शिकायतों का निपटारा करना एनपीसीआई के लिए भी मुश्किल होगा और बैंक कर्मचारियों के लिए भी।' उस सूरत में ग्राहकों को खुद ही बैंक से बार-बार संपर्क करना होगा।
 कैसे हो निपटारा
 जैसे ही रकम भेजने वाले के खाते से किसी लेनदेन की शुरुआत की जाती है तो उसकी सूचना एनपीसीआई के सर्वर पर पहुंच जाती है। वहां से वह सूचना रकम पाने वाले के बैंक तक जाती है। कभी कभार ऐसा भी होता है कि दूसरे बैंक से लेनदेन की पुष्टि होने से पहले ही उसके लिए निर्धारित समय पूरा हो जाता है यानी टाइम आउट हो जाता है, लेकिन रकम पाने वाले के खाते में पहुंच जाती है। उस सूरत में रकम भेजने वाले के पास तो लेनदेन विफल रहने का संदेश आता है यानी उसके बैंक खाते से रकम नहीं निकली होती है, लेकिन दूसरे बैंक को रकम मिल चुकी है। ऐसे में मामला सुलझाने के लिए दोनों बैंकों को मिलकर काम करना होगा और रकम भेजने वाले या पाने वाले के खाते से उक्त रकम निकालनी होगी। लेकिन मामला तब पेचीदा हो जाता है, जब रकम पाने वाला पैसा आते ही उसे किसी और खाते में भेज देता है या निकाल लेता है। इसीलिए बैंकों ने एनपीसीआई से अनुरोध किया है कि प्राप्तकर्ता बैंक से पहले यह पुष्टिï की जाए कि रकम वहां पहुंची है या नहीं और उसके बाद ही लेनदेन पूरा होने या नाकाम रहने का संदेश भेजा जाए।
 प्रक्रिया से परेशानी
 कुछ बैंकों को लेनदेन की शुरुआत करने वाली प्रक्रिया से परेशानी होती है। इस प्रक्रिया में डेबिट कार्ड संख्या के आखिरी 6 अंक और उसकी एक्सपायरी डेट की जरूरत होती है। बैंकों का कहना है कि यह विवरण बेहद आसानी से प्राप्त होता है क्योंकि लोग खरीदारी करते वक्त पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों पर अपने कार्ड सौंप देते हैं। बैंकों ने एनपीसीआई से कहा है कि साइन अप करते वक्त ग्राहकों से अपने कार्ड की निजी पहचान संख्या (पिन) भी डालने के लिए कहा जाए।

Saturday, December 24, 2016

ऐसे ढू्ंढें अपना गुम हुआ स्मार्टफोन

अगर कभी फोन गुम हो जाए तो बड़ी मुश्किल हो जाती है। कई बार यह हमसे गुम हो जाता है तो कई बार कहीं रखकर भूल जाते हैं। तुरंत कहीं कॉल करना हो या इंटरनेट पर कुछ सर्च करना हो, उस वक्त फोन न मिले तो बड़ी खीझ होती है। अच्छी बात यह है कि गूगल ने एक ऐसा फीचर बनाया है, जिससे आप बेहद आसानी से अपना फोन ढूंढ सकते हैं। आगे देखें और जानें, बिना झंझट के सिर्फ 1 मिनट में कैसे ढूंढें अपना फोन...
1. यह बहुत ही आसान है। सबसे पहले गूगल का होम पेज खोलिए। यहां पर उस गूगल अकाउंट आईडी से साइन इन कीजिए, जो आपने अपने ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन में रजिस्टर की है।
2. इसके बाद गूगल होमपेज की स

र्च बार पर टाइप करके सर्च कीजिए - 'Whare's my phone?' जैसे ही आप यह सर्च करेंगे, आपके सामने एक मैप खुल जाएगा।
3. इस मैप में कुछ ही देर में आपको अपने फोन की लोकेशन दिख जाएगी। गूगल आपके स्मार्टफोन की लोकेशन ट्रेस करेगा और बताएगा कि वह कहां है।
4. अगर आप किसी और जगह से होकर आए हों और याद न आ रहा हो कि फोन वहां छूट गया या कहीं और, ऐसे में यह फीचर बड़े काम का है। आपको फोन की लोकेशन दिख जाएगी कि वह कहां पर है। इसलिए आप सही जगह पर उसे तलाश कर सकते हैं। जब आपको लोकेशन पता चल जाए, तब वहां जाकर अगला कदम उठाएं...
5. अगर आप फोन को घर पर ही कहीं रखकर भूल गए हैं आसपास कहीं गिर गया है तो आप इसे फुल वॉल्यूम पर रिंग करवा सकते हैं। अगर आपने फोन सायलेंट मोड पर भी रखा होगा, तब भी यह फीचर काम करेगा। बस बैटरी खत्म नहीं होनी चाहिए। रिंग करने का ऑप्शन आपको मैप के नीचे दिखेगा।
6. यह पूरी प्रक्रिया गूगल के डिवाइस मैनेजर का एक हिस्सा है। आप सीधे गूगल डिवाइस मैनेजर पर जाकर भी ऐसा कर सकते हैं। वहां पर आपको फोन को लॉक करने और कॉन्टेंट उड़ाने का भी ऑप्शन मिलेगा।

7. आईफोन यूजर्स के लिए गूगल की "Where's my phone?" ट्रिक काम नहीं करेगी। वैसे आईफोन के लिए भी ऐसा एक फीचर है। आप iCloud की मदद से अपना आईफोन ढूंढ सकते हैं। आगे जानें, कैसे ढूंढें गुम हुआ आईफोन...
आईक्लाड ओपन करें (www.icloud.com) और अपनी उस ऐपल आईडी के जरिए लॉगइन करें, जिससे आप अपना आईफोन यूज कर रहे हैं।
Find iPhone पर क्लिक करने के बाद आपको मैप दिखेगा, जिसमें आपके आईफोन की लोकेशन दिखाई जा रही होगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर यह फीचर तभी काम करता है, जब डिवाइस में बैटरी हो और वह इंटरनेट से कनेक्टेड हो।

Wednesday, December 7, 2016

कार ने ही चोर को कर लिया कैद

अमेरिका के सिएटल में एक ऐसा मामला सामने आया है जिससे साबित होता है कि अगर आप अपने कार के सिक्योरिटी फीचर्स पर ध्यान देते हैं तो ये आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। अमेरिका में एक कार चोर को कार चोरी इसलिए भरी पड़ गई क्योंकि जिस कार को वह चुरा कर भागा था और बाद में बड़े आराम से उसमें सो रहा था, उसी कार ने उसे कैद कर लिया और हवालात पहुंचा दिया।
यह दिलचस्प मामला अमेरिका के सिएटल का है, यहां रहने वाला शख्स अपनी बीएमडब्ल्यू 5-सीरीज़ की चाभी कार में ही भूल गया। मौके की ताक में बैठे चोर की तो मानों बहार ही आ गई, उसने चाभी लगाई और कार लेकर फुर्र हो गया। थोड़ी देर में मालिक को कार के चोरी हो जाने का अहसास हुआ और उसने पुलिस को कार चोरी की सूचना दी। पुलिस ने बीएमडब्ल्यू से संपर्क साधा और कार की लोकेशन, ट्रैक करने को कहा… इधर वो चोर कार लेकर सिएटल से थोड़ा आगे स्थित रवेना इलाके में पहुंच गया और इंजन स्टार्ट कर सोने लगा। बीएमडब्ल्यू के कर्मचारियों ने कार चोरी की सूचना मिलने के बाद न केवल कार की लोकेशन पुलिस को दी बल्कि कार को रिमोट से लॉक भी कर दिया। कार में सो रहे चोर को इसकी भनक भी नहीं लगी।
जैसे ही पुलिस कार की लोकेशन पर पहुंची और कार का शीशा खटखटा कर चोर को जगाया, उसने दूसरे दरवाज़े से भागने की कोशिश की..लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और वो चोर कार में कैद हो चुका था। पुलिस से कंफर्मेशन मिलने के बाद कंपनी ने कार को अनलॉक कर दिया और पुलिस ने चोर को दबोच लिया। इस एडवांस टेक्नोलॉज़ी की बदौलत जहां मालिक को उसकी चोरी हुई कार वापस मिल गई वहीं पुलिस एक शातिर कार चोर को पकड़ने में सफल

Friday, September 2, 2016

मांझी कराता है नैया पार...........

कोटा। उड़ीसा के पिछड़े जिले कालाहांडी में पिछले दिनों (25 अगस्त को) एक आदिवासी व्यक्ति अमंग  देई को अपनी पत्नी के शव को अपने कंधे पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा। उसे अस्पताल से शव को घर तक ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल सका था। उसकी 42 वर्षीय पत्नी की भवानीपटना में जिला मुख्यालय अस्पताल में टीबी से मौत हो गई थी। उस घटना ने शहर की एक कवयित्री संगीता कौशिक द्विवेदी के हृदय को झकझोर दिया। उन्होंने अपनी कुछ पंक्तियों के माध्यम से उस मांझी की वेदना को इस प्रकार बयां किया.........
मांझी कराता है नैया पार
दाना तो होता है समझदार
एक नादाँ ऐसा था माँझी
जिसकी वेदना हम सब की थी सांझी
अंतिम थी यात्रा उसके किसी अपने की
मिली उसको ज़रा न मदद
किसी पराये या अपने की
अकेला काँधा था उस कहार का
बोझ मन पर पड़ा, पीड़ा की मार का
प्रहार था उस पर देश की व्यव्स्थाओं का
चंद खनकते सिक्कों और हरे कागज़ों के व्योपार का
ग़रीबी, लाचारी ने फिर उसे औंधे मुँह पटका
पैसों के अभाव में उसकी मृत-बीवी का दाह-संस्कार रहा अटका
उस दिन मांझी को गर तीन काँधे और मिल जाते
मानवता के चारों धाम
वहीं हो जाते
बारह कोस तक , मृत शरीर के तले एक मृत मन चला था
न जाने कौन किसको ढो रहा था, न जाने कौन किसको ढो रहा था.....

संगीता कौशिक द्विवेदी 

Sunday, August 21, 2016

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अखबार की सभी यूनिटों को माना है एक..

मजीठिया को लेकर चल रही हक की लड़ाई की 23 अगस्त 2016 की सुनवाई को लेकर सभी साथी बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस दिन माननीय अदालत 20(जे) को लेकर वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के अनुसार सुनवाई करेगी। पूरी आशा है कि जीत कर्मचारियों की होगी क्योंकि एक्ट बड़ा है न की मजीठिया की सिफारिशें। चलिए अब बात करते हैं मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों द्वारा कई राज्यों के लेबर विभाग के माध्यम से कंपनी का Classification गलत व मनमाने तरीके से अपने आप को lower कैटगरी में बताया गया है उदाहरण के लिए उत्तराखंड द्वारा दी गई रिपोर्ट में दैनिक जागरण अखबार ने अपने आप को 5 वीं कैटगरी में दिखाया है जबकि ये अखबार 1वीं कैटगरी में आता है। वहीं, अमर उजाला ने भी अपने आपको 5वीं कैटगरी का दिखाया है, जबकि उसकी कैटगरी 2वीं है। इसी तरह अन्य अखबारों ने भी अपने आप को दर्शाया होगा।

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने 7 फरवरी 2014 के फैसले की पेज संख्या 54 के कॉलम 58 में साफ लिखा है कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के सेक्शन 2(डी) के अनुसार ऑल- इंडिया न्यूजपेपर establishment की financial capacity and gross revenue के लिए अखबार की सभी यूनिटों को एक माना जाएगा। साथ ही माननीय कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि establishment की व्यक्तिगत (Individual) यूनिट आर्थिक रूप से चाहे अक्षम हो तब हम ये नहीं कह सकते की न्यूजपेपर establishments जीने योग्य नहीं है।

58) On the other hand, it is the stand of the Union of India that in the absence of availability of such parameters for the assessment of capacity to pay of the newspaper establishments, it is judicially accepted methodology to determine the same on the basis of gross revenue and relied on the observations in Indian Express Newspapers (Pvt.) Ltd. (supra):-

“16…In view of the amended definition of the “newspaper establishment” under Section 2(d) which came into operation retrospectively from the inception of the Act and the Explanation added to Section 10(4), and in view further of the fact that in clubbing the units of the establishment together, the Board cannot be said to have acted contrary to the law laid down by this Court in Express Newspapers case, the classification of the newspaper establishments on all-India basis for the purpose of fixation of wages is not bad in law. Hence it is not violative of the petitioners’ rights under Articles 19(1)(a) and 19(1)(g) of the Constitution. Financial capacity of an all-India newspaper establishment has to be considered on the basis of the gross revenue and the financial capacity of all the units taken together. Hence, it cannot be said that the petitioner-companies as all-India newspaper establishments are not viable whatever the financial incapacity of their individual units. After amendment of Section 2(d) retrospectively read with the addition of the Explanation to Section 10(4), the old provisions can no longer be pressed into service to contend against the grouping of the units of the all-India establishments, into one class.”

आगे अपने फैसले में माननीय कोर्ट ने लिखा है कि एक्ट के सेक्शन 2(डी) जिसे सेक्शन 10(4) के साथ पड़ा जाए, जिसके अनुसार देश भर में फैली अखबार की सभी यूनिटों को एक ही मानना जाएगा। पुराने प्रावधान सभी यूनिटों को एक होने से नहीं रोक सकते। अब आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि अखबार प्रबंधन किस तरह माननीय सुप्रीम कोर्ट के 07 फरवरी 2014 के फैसले की अवमानना करने पर आमादा हैं।

Friday, August 5, 2016

मजीठिया वेज बोर्ड : ऐसे करें आरटीआई के लिए आवेदन


मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे सभी साथी और मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिस के तहत वेतन,एरियर और प्रमोशन पाने के इच्छुक देश भर के सभी पत्रकार साथियों से निवेदन है कि इस अधिकार की लड़ाई के लिए आरटीआई का सहारा लें। आप एक बात एकदम स्पष्ट जान लीजिये यही वो ब्रम्हास्त्र है जो मैनेजमेंट के भ्रस्टाचार को आपके सामने लाएगा। उत्तर प्रदेश के एक साथी ने मेरे कहने पर कुछ सवाल आरटीआई से माँगा है।

आप भी इसी तरह आरटीआई का पत्र तैयार करें और जो सवाल इस साथी ने पूछा है वही सवाल आप अपने समाचार पत्र प्रतिष्ठान के बारे में श्रम आयुक्त कार्यालय से पूछे। मेरा दावा है इस आरटीआई का जवाब आने के बाद आप 70 प्रतिशत लड़ाई जीत जाएंगे। चूंकि समय कम है और आरटीआई का जवाब आने में एक माह का समय लगता है इसलिए जल्द से जल्द आरटीआई डालकर सभी सवाल पूछें और सबसे नीचे अपना पूरा नाम, पता और पिनकोड, मोबाइल नंबर और डेट लिखकर साइन करना न भूलें। आप 2007-08, 2008-09, 2009-10 का ही मजीठिया वेज बोर्ड का उल्लेख करते हुए श्रम आयुक्त कार्यालय से सूचना मांगें।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335

Wednesday, August 3, 2016

मजीठिया: अदालत में कानून बड़ा होता है

नई दिल्ली। ‘एक्ट बड़ा है ना कि वेजबोर्ड की सिफारिशें’ ये बात माननीय सुप्रीम कोर्ट के 19 जुलाई 2016 के आदेश से साबित हो ही गई। कई दिनों से 20जे को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि अखबार मालिक 20जे का फायदा ले लेंगे। लेकिन अखबार के मालिक शायद ये भूल गए की 20जे का जनक कौन है? कहने का मतलब है कि 19 जुलाई के आदेश में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20जे को लेकर जो बहस होगी वह Working Journalists Act -1955 में दिए गए संबंधित प्रावधानों के अनुसार ही होगी।
अदालत हमेशा कानून एवं एक्ट के अनुसार ही चलती है न की अखबार मालिकों की मनमर्जी से। मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के अनुसार बनी हैं। एक्ट की धारा 13 बताती है कि केंद्र सरकार द्वारा वेजबोर्ड को लेकर जारी आदेश के बाद कोई भी संस्थान कर्मचारी को सिफारिशों में दर्शाई गई मजदूरी से किसी भी दशा में कम वेतन नहीं दे सकता।
धारा 16 स्‍पष्‍ट करती है कि यदि आप किसी भी वेजबोर्ड में निर्धारित न्‍यूनतम वेतनमान से ज्‍यादा वेतन प्राप्‍त कर रहे हैं तो यह आपके उस ज्‍यादा वेतन को प्राप्‍त करने के अधिकार की रक्षा करता है।
यानि कोई भी करार आपको ज्‍यादा से ज्‍यादा फायदा देने के लिए हो सकता है ना कि आपको न्‍यूनतम वेतनमान से वंचित करने के लिए। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की 20जे का खौफ किस तरह बेवजह फैलाया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की तरफ से केस लड़ रहे वकीलों में से एक वरिष्‍ठ वकील कोलिन गोनसालविस की केस से संबंधित सभी मुद्दों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने की प्रार्थना स्‍वीकार कर ली, ताकि माननीय अदालत द्वारा एक सही व प्रभावशाली आदेश पारित किया जा सके।
आपके हितों की रक्षक धारा 13 और 16 इस प्रकार हैं- 
[धारा 13 श्रमजीवी पत्रकारों का आदेश में विनिर्दिष्‍ट दरों से अन्‍यून दरों पर मजदूरी का हकदार होना-- धारा 12 के अधीन केंद्रीय सरकार के आदेश के प्रवर्तन में आने पर, प्रत्‍येक श्रमजीवी पत्रकार इस बात का हकदार होगा कि उसे उसके नियोजक द्वारा उस दर पर मजदूरी दी जाए जो आदेश में विनिर्दिष्‍ट मजदूरी की दर से किसी भी दशा में कम न होगी।]।
धारा 16- इस अधिनियम से असंगत विधियों और करारों का प्रभाव-- (1) इस अधिनियम के उपबन्‍ध, किसी अन्‍य विधि में या इस अधिनियम के प्रारम्‍भ से पूर्व या पश्‍चात् किए गए किसी अधिनिर्णय, करार या सेवा संविदा के निबंधनों में अन्‍तर्विष्‍ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे :
परन्‍तु जहां समाचारपत्र कर्मचारी ऐसे किसी अधिनिर्णय, करार या सेवा संविदा के अधीन या अन्‍यथा, किसी विषय के संबंध में ऐसे फायदों का हकदार है जो उसके लिए उनसे अधिक अनुकूल है जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार है तो वह समाचारपत्र कर्मचारी उस विषय के संबंध में उन अधिक अनुकूल फायदों का इस बात के होते हुए भी हकदार बना रहेगा कि वह अन्‍य विषयों के संबंध में फायदे इस अधिनियम के अधीन प्राप्‍त करता है।(2) इस अधिनियम की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी समाचारपत्र कर्मचारी को किसी विषय के संबंध में उसके ऐसे अधिकार या विशेषाधिकार जो उसके लिए उनसे अधिक अनुकूल है जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार है, अनुदत्‍त कराने के लिए किसी नियोजक के साथ कोई करार करने से रोकती है।       

Sunday, July 24, 2016

Man Dole Mera Tan Dole – Harmonium Notes

Music:
रे सा ग सा    रे *नि सा *नि
रे सा ग सा    रे *नि सा
रे सा ग सा    रे *नि सा *नि
रे सा ग सा    रे *नि सा
रे ग    पप   धध  पप  धध
पप   धध   पप
रेग   मम   पप   मम  पप
मम   गमगरेसा
रे सा ग सा    रे *नि सा *नि
रे सा ग सा    रे *नि सा
रे सा ग सा    रे *नि सा *नि
रे सा ग सा    रे *नि सा
सा सा      रे म ग       रे सा
मन        डो~ले          मेरा
Or
सा सा      रे म मग    रे सा
सा सा      रे मग
तन        डो~ ले,
रे सा     रे ग    रे सा
मेरे       दिल    का
रे ग रे    सा रे ~ रे  सा
गया       करार      रे
*नि *ध    सा~ रे       रे ग रे सा
ये            कौन         बजाये
सा~ सा सा सा
बांसुरिया
रे *ध  सासा  रेरे मम गग
सासा  रेरे  मम  गग
सासा  रेरे  गग  रेरे
गग रेरेसा
प प प   ध ध सा*  सा* सा* नि   ध प
मधुर     मधुर       सपनों          में
ध नि   ध नि   ध प नि    ध प प
देखी     मैने     राह        नवेली
प प        ध ध सा*    सा*
छोड़        चली         मैं
नि ध प     ध नि
लाज का     पहरा
ध नि      ध प नि     ध प प
जाने        कहाँ         अकेली
ध प         म       ग~ मग
चली         मैं       जाने
रे सा ग        रे सा सा
कहाँ            अकेली
सा सा      रे म म ग
रस         घो ले~
रे सा     सा    रे म म ग   रे सा
धुन      यूँ       बोले       जैसे
रे ग रे सा   रे ग रे    सा रे ~ रे सा
ठंडी           चले      फुहार रे
*नि *ध   सा~ रे     रे ग रे सा
ये           कौन       बजाये
सा~ सा सा सा
बांसुरिया
प प प      ध ध सा*    सा* सा*
कदम        कदम         पर
नि ध      प ध ध नि
रंग         सुनहरा
ध     नि नि ध प    नि ध प प
ये       किसने         बिखराया
प प ध      ध सा*     सा* सा*
नागिन      का         मन
नि नि  ध    प  ध नि
बस       में    करने
ध नि     नि ध प नि     ध प प
कौन        सपेरा          आया
ध     प म      ग म
न     जाने      कौन
ग रे सा ग रे      सा सा
सपेरा              आया
सा सा      रे म म ग
पग           डोले,
रे सा  सा       रे म म ग
दिल    यूँ        बोले,
रे सा   रे ग रे सा    रे ग रे
तेरा      हो के        रहा
सा रे ~ रे सा
शिकार रे
*नि *ध   सा~ रे       रे ग रे सा
ये          कौन         बजाये
सा~ सा सा सा
बासुरीयां

Monday, July 18, 2016

मेरा दिल ए पुकारे आजा-------- गीत स्वरलिपि

सारे    गपप      पप धप    गप
मेरा   दिल ये    पुका रे     आजा
धप    मप म     गमग     रेग
मेरे    ग़म के     सहारे    आजा
गरे        सारेसा       सासा
भीगा      भीगा है     समा
गरेसारे          सासासा
ऐसे में है        तू कहाँ
सारे     गपप    पपधप     गप
मेरा    दिल ये   पुका रे    आजा
संगीत:
धनिसा*      रे* निसा*
सा* रे* ग*    रे* म*
ग* प* म*    सा* रे* ग*
रे* म*        रे* ग* सा*
रे* निसा*
पपग*        ग* रे* ग* ग*
तू नहीं       तो ये रुत
म* ग* रे*      निसा* रे*
ये हवा          क्या करूँ
पध    सा* सा* नि   सा* रे* सा*
दूर     तुझ से          मैं रह के
निसा*    पधनि        धनिधप
बता      क्या करूँ,     क्या करूँ
पध       निनिध         पम
एक       छोटी सी        झलक
मप      धधप       मग
मेरे      मिटने       तलकगम     पम      गम    गगरेग

ओ      चाँद     मेरे    दिखलाजा
गरेसारेसा      सासा
भीगा भीगा है   समा
गरेसारे     सासासा
ऐसे में है   तू कहाँ

सारे  गपप  पपधप     गप
मेरा  दिल   ये पुकारे   आ जा
पपग*        ग*      रे* ग*
आँधियाँ     वो      चलीं
म* ग* रे*      निसा* रे*
आशियां        मिट गया
निसा* रे*
मिट गया
पध       निनिध      पम
सूना      सूना है      जहाँ
मप       धधप        मग
अब      जाऊँ मैं      कहाँगम      पपम        गम
बस      इतना       मुझे
गगरेग
दिखला जा
गरेसारेसा          सासा
भीगा भीगा है     समा
गरेसारे         सासासा
ऐसे में है       तू कहाँ
सारे  गपप    पपधप      गप
मेरा  दिल    ये पुकारे    आ जा