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Thursday, December 25, 2014

भारत रत्न की कतार में गांधी


Friday, October 31, 2014

दिल मंदिर नहीं

लड़का (लड़की से)- जानेमन, इस दिल में आ जा ना!


लड़की (लड़का से)- सैडल निकालू क्या?


लड़का - पगली, यह मंदिर नहीं..ऐसे ही आ जा।


Sunday, October 12, 2014

चित्रगुप्त की समस्या

चित्रगुप्त ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की, प्रभु, करवाचौथ के व्रत से 7 जन्म तक एक ही पति मिलने वाली योजना बंद कर दीजिए।
ब्रह्माजी: क्यों?
चित्रगुप्त: प्रभु, मैनेज करना कठिन होता जा रहा है। औरत 7 जन्मों के लिए वही पति मांगती हैं, लेकिन पुरुष हर बार दूसरी पत्नी मांगता है। बहुत दिक्कत हो जाती है समझाने में।
ब्रह्माजी: लेकिन, यह स्कीम आदिकाल से चली आ रही है। इसे बंद नहीं किया जा सकता।
तभी नारद मुनि आ गए। उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी औरत 7 जन्म के लिए वही पति मांगे, उसे दे दो, लेकिन एक शर्त के साथ।
चित्रगुप्त: क्या?
नारद: शर्त यह रखो कि यदि पति वही चाहिए तो सास भी वही मिलेगी।
नतीजा- डिमांड बंद
पत्नियां शॉक्स, नारद रॉक्स!!!

Saturday, August 2, 2014

डॉलर की औकात


Wednesday, June 25, 2014

पीछे पड़ गई महंगाई


Sunday, June 22, 2014

कंप्यूटर की स्टूडेंट को छेड़ा


एक लड़के ने कंप्यूटर सायेंस की एक स्टूडेंट को छेड़ा।
 

लड़की गुस्से से भड़क कर उस लड़के पर ऐेसे चिल्लाई-
 

'ओए पैदाइशी एरर!
 

.वायरस के बच्चे!
 

.एक्सेल की करप्ट फाइल कहीं के...
 

.एक क्लिक मारूंगी, तो ज़मीन से डिलीट होकर...
 

सीधे कब्र में जाकर इंस्टॉल हो जाएगा!'

Thursday, June 19, 2014

डॉगीज की खुराफातें


Saturday, June 7, 2014

modi chup


Friday, June 6, 2014

Thursday, June 5, 2014

सवाल एक वीजा का


Sunday, June 1, 2014

हिसाब बराबर

एक बार एक मरता हुआ पति अपनी पत्नी से अपराध स्वीकारोक्ति करते हुए बोला। पति: दो साल पहले अलमारी से तुम्हारा गोल्ड सेट मैंने ही चोरी किया था। पत्नी (रोते हुए): कोई बात नहीं जी। पति: एक साल पहले तेरे भाई ने तुझे जो 1 लाख रूपए दिए थे वो भी मैंने ही गायब किये थे। पत्नी: कोई बात नहीं मैंने आपको माफ़ किया। पति: तेरी कमेटी के पैसे भी मैंने ही चोरी किये थे। पत्नी: कोई बात नहीं जी, आपको ज़हर भी मैंने ही दिया है इसलिए हिसाब बराबर।

तुम लड़की होकर दारू पीती हो?

लड़का : तुम लड़की होकर दारू पीती हो?
.लड़की का मजेदार जवाब
. क्या दो-चार पैग पीने के लिए gender चेंज करवाऊँ ?

Thursday, May 29, 2014

चोर- पुलिस


Sunday, May 25, 2014

पति - पत्नी

क्या चाहिए???

जज-तुम तलाक क्यों लेना चाहते हो?

पति-जी क्योंकि मैं अपनी बीबी से संतुष्ट नही हूं।

पत्‍‌नी-जज साहब सारा मोहल्ला खुश है, बस पता नहीं इसे क्या चाहिए।

 

परमेश्वर आप !!

पति-मेरा अंदाजा यह कह रहा है कि इस डिब्बे मे कोई खाने की चीज है।

पत्‍‌नी- अरे वाह मेरे पति परमेश्वर आप ने बिलकुल सही अंदाजा लगाया है इसमें मेरे नए सैंडल है।


जहर 

पति-पत्नी में लड़ाई हो रही थी। पति ने सोचा इस रोज-रोज के झगड़े से तो बेहतर है आत्महत्या की जाए।

वह बाजार से जहर लेकर आया और खा लिया, लेकिन मरा नहीं।

पत्‍‌नी (गुस्से में) - हजार बार समझाया है कंपनी की चीज लिया करो। समझ तो तुम्हारे अंदर है नहीं। अब देखों पैसे भी गए और काम भी नहीं हुआ।


Saturday, May 24, 2014

माँ अब क्या होगा


सत्ता का हाथी

छह अंधे बहुत दिनों से बेकार बैठे हुए थे। एक दिन उन्हें पता चला कि लोकतंत्र के जंगल में सत्ता का हाथी भटक रहा है। पहले वे एक हाथी को छूकर ज्ञानी हो चुके थे। उन्होंने सोचा, चलो इस बार सत्ता के इस हाथी का परीक्षण करते हैं। सभी उसके पास पहुंचे। पहले अंधे ने हाथी के पेट को हाथ लगाया तो वह बोला, ‘अरे यह तो दीवार है। यानी सत्ता दीवार होती है।’ बाकी अंधे बोले, ‘एक्सप्लेन इट।’ पहला अंधा बोला, ‘दीवार और सत्ता का निकट संबंध है। पहले वोटों के लिए जाति, धर्म, संप्रदाय की दीवारें खड़ी कर दो और फिर कुर्सी के लिए विचारधारा की दीवारों को गिरा दो। देखना, दिल्ली में एक-दो दिन में यही सब होने वाला है।’ 
अब दूसरा अंधा हाथी के मुंह की तरफ बड़ा। उसने सूंड को हाथ लगाया तो बोल उठा, ‘यह दीवार नहीं, सर्प है, घातक जहरीला सांप।’ उसने टीवी पर किसी के मुंह से सुन रखा था कि सत्ता जहर के समान होती है। तो उसने अपना फैसला सुना दिया कि सत्ता या तो सांपनाथ होती होगी या नागनाथ। वैसे भी पिछले डेढ़ महीनों के दौरान लोकतंत्र के जंगल में इतना विष वमन हो चुका था कि उसे यह फैसला करने में देर नहीं लगी। तीसरा अंधा हाथी की पूंछ के पास पहुंचा। उसे छूकर बोला, ‘सत्ता रस्सी होती है, रस्सी। इसके सहारे खुद ऊपर चढ़ते जाओ। फिर अपने सगे-संबंधियांे को भी चढ़ा लो। सुना है कि कोई जीजाश्री सत्ता की ऐसी ही रस्सी के सहारे काफी ऊपर तक पहुंच गए हैं।’ अब चौथे की बारी थी। उसने हाथी के पैर को छुआ तो ऐसा उत्साह से भर गया मानो सत्ता का रहस्य उसी ने ढूंढ़ लिया हो। चिल्लाकर बोला, ‘सत्ता और कुछ नहीं, पेड़ का तना है। आंधी चल रही हो तो इससे चिपक जाओ। उड़ोगे नहीं और फिर लता की तरह उस पर रेंगते रहो। देखना, अब जल्द ही ऐसी ही कई लताएं फलती-फूलती नजर एंगी।’पांचवें अंधे ने हाथी के कानों को छुआ तो बोला, ‘तुम सब गलत हो। सत्ता तो सूपड़ा है। सूपड़े का तो नेचर ही होता है कि जो काम के नहीं हैं, हल्के हैं, उन्हें झटक दो। भारी वहीं बने रहते हैं। पिछले 60 साल से सत्ता का यह हाथी ऐसे ही काम करते आया है।
’छठे ने सोचा, बहुत बकवास हो गई। मैं देखता हूं। वह हाथी के दांतों के पास पहुंचा और उन्हें छूकर बोलो, ‘अरे मूर्खो, सत्ता तो तलवार है, दोधारी तलवार। सही इस्तेमाल करोगे तो यह आपकी जीत का मार्ग प्रशस्त करेगी, लेकिन जरा-सी लापरवाही आपको ही काट देगी। सुना है कोई नया आदमी अब तलवार घुमाने आने वाला है।’तो छह अंधे, छह बातें। यानी कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन। इतने में पास से एक समझदार किस्म का बंदा गुजरा। शायद वह कोई विश्लेषक था और पिछले डेढ़ महीने से टीवी पर आ-आकर और भी समझदार बन गया था। अब अंधों ने उसे ही फैसला करने को कहा। उसने कहा, ‘तुम सब सही हो। सत्ता का हाथी ऐसा ही होता है। अच्छी बात यह है कि तुम लोगों ने अंधे होकर भी सत्ता के इस हाथी को पहचान लिया, जबकि अनेक आंख वाले देखकर भी अंधे बने रहते हैं। इसीलिए सत्ता का यह हाथी अपनी चाल चलता रहता है।’

अब माएं अपने बच्चों को ऐसे डांटेंगी...

मोदी बनना है न?


.फिर राहुल जैसी हरकत क्यों की?
 


.अब मनमोहन की तरह चुप 
क्यों खड़ा है?
 

.बोल नहीं तो केजरीवाल की तरह थप्पड़ खाएगा...

Sunday, May 18, 2014

MUNDAN FOR ALL


Saturday, May 17, 2014

MODI SUB PAR BHAARI


FAREWELL PM