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Wednesday, May 28, 2014

गलत मद में भरे गए सर्विस टैक्‍स पर नहीं मिलेगी राहत

दिनेश माहेश्वरी
कोटा।  सर्विस टैक्‍स जमा करने में हुई भूल कंपनियों पर भारी पड़ सकती है। हाल ही में मुंबई के सर्विस टैक्‍स-1 कमिश्‍नरेट ने एक ट्रेड नोटिस जारी किया है। जिसमें सर्विस टैक्‍स को दूसरी मद में जमा करने की गलती को अक्षम्‍य माना है। ऐसे में यदि कोई कंपनी गलत अकाउंट नंबर पर सर्विस टैक्‍स जमा करती है तो उसे दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
 इस आदेश को स्‍पष्‍ट करते हुए कमिश्‍नर ने बताया है कि गलत अकाउंट में सर्विस टैक्‍स जमा करने के संबंध में कमिश्‍नरेट के पास बड़ी संख्‍या में प्रार्थनापत्र प्राप्‍त हो रहे हैं। जिसमें दो प्रकार की गलतियां प्रमुखता से सामने आई हैं। इसमें पहली गलती सर्विस टैक्‍स गलत अकाउंट कोड में अदा करने से संबंधित है।
 ऐसी गलती गलत अकाउंटिंग कोड की डेटा एंट्री के कारण होता है। इसमें या तो एक ही सेवा के अकाउंट कोड या फिर एजुकेशन सेस के अकाउंटिंग कोड में जमा हो जाती है। इस प्रकार एक ही सर्विस टैक्‍स कोड की दशा में एसेसी को डिप्‍टी कमिश्‍नर(टेक्निकल) को सर्विस टैक्‍स अदायगी के चालान के साथ लिखित में सूचना देनी होगी।वहीं, प्राय: सामने आने वाली दूसरी प्रकार की गलती किसी और असेसी के सर्विस टैक्‍स कोड में अपना सर्विस टैक्‍स अदा करने से जुड़ी होती है। यह गलती मुख्‍यतया तब होती है जब एसेसी के पास विभिन्‍न कमिश्‍नरेट या फिर एक ही कमिश्‍नरेट की विभिन्‍न शाखाओं में एक ही पैन पर कई सारे सर्विस टैक्‍स कोड होते हैं। इसमें वे मामले भी शामि होते हैं जिसमें एसेसी द्वारा तय स्‍थान से बिजनेस रोक देने की दशा में रजिस्‍ट्रेशन के निरस्‍त हो जाते हैं। वहीं गलती से इन्‍हीं गलत सर्विस टैक्‍स कोड में सर्विस टैक्‍स जमा कर दिया जाता है।
इसके अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंसल्‍टेंट द्वारा भी नियोक्‍ता के गलत सर्विस टैक्‍स कोड में टैक्‍स अदा करने के अनेक मामले कमिश्‍नरेट में आते हैं। इन प्रार्थनापत्रों में कई नियोक्‍ता सर्विस टैक्‍स की राशि को एक कोड से दूसरे सर्विस टैक्‍स कोड में स्‍थानां‍तरित करने की मांग करते हैं।
इन मामलों की जांच के बाद यह बात साफ कर देना बहुत जरूरी है कि मौजूदा समय में गलत सर्विस टैक्‍स कोड में जमा की गई राशि को सही टैक्‍स कोड में ट्रांसफर करने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। यहां तक कि कानूनी संस्‍था जिसके एक ही पैन नंबर पर विभिन्‍न टैक्‍स कोड हैं, उसके लिए भी एक सर्विस टैक्‍स कोड से दूसरे सर्विस कोड में राशि का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
हालांकि, गलती के सुधार के लिए कुछ कानूनी उपचार अवश्‍य दिए गए हैं। सर्विस टैक्‍स के नियम 6(4ए) गलत अदा किया सर्विस टैक्‍स को अगले महीने या फिर तिमाही में समायोजित किया जा सकता है। वहीं सेंट्रल एक्‍साइज टैक्‍स एक्‍स के सेक्‍शन 11बी के तहत एसेसी रिफंड के लिए आवेदन दे सकता है। इन उपायों के बावजूद एसेसी को अपने सही सर्विस टैक्‍स कोड में टैक्‍स अदा करना होगा। देरी के चलते आप पर ब्‍याज की मार भी पड़ सकती है।

Thursday, April 17, 2014

कोचिंगों ने दिया इस बार 16.73 करोड़ ज्यादा टैक्स

दिनेश माहेश्वरी
कोटा।
  संभाग के सेवाप्रदाताओं ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2013-14 में 210.18 करोड़ रुपए का सर्विस टैक्स दिया है। जिसमें से 92.11 करोड़ रुपए कमर्शियल कोचिंग संस्थानों का योगदान है। पिछले वित्त वर्ष 2012-13 के मुकाबले में इस बार कोचिंग संस्थानों ने 16.73 करोड़ रुपए अधिक टैक्स दिया है।
एक्साइज, कस्टम एवं सर्विस टैक्स विभाग के डिप्टी कमिश्नर एके खन्ना ने बताया कि संभाग में सर्वाधिक टैक्स कोचिंग संस्थानों से प्राप्त होता है। कोचिंग से पिछले वित्त वर्ष 2012-13 में 75.39 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त हुआ था। जबकि इस बार 92.11 करोड़ रुपए सर्विस टैक्स मिला है। दूसरे नंबर पर सिक्यूरिटी एजेंसी है। इसके बाद जनरल इंश्योरेंस, मेंटीनेंस एवं रिपेयर्स, क्लियरिंग एवं फारवर्डिंग एजेंसी, कंसल्टिंग इंजीनियरिंग एवं कोरियर एजेंसीज आदि का नंबर आता है। जिन सेवाप्रदाताओं का सालाना टर्नओवर 10 लाख रुपए है, वे ही करदाता सर्विस टैक्स के दायरे में आते हैं।
एक्साइज ड्यूटी में पिछड़ा विभाग
डिप्टी कमिश्नर खन्ना ने बताया कि समाप्त हुए वित्त वर्ष 2013-14 में इंडस्ट्रियल ग्रोथ कम रही। जिससे विभाग को 156.14 करोड़ रुपए ही एक्साइज ड्यूटी के रूप में राजस्व प्राप्त हुआ है।  वित्त वर्ष 2012-13 में 159.13 करोड़ रुपए एक्साइज ड्यूटी प्राप्त हुई थी।
इस बार पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.71 करोड़ रुपए कम राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि एक्साइज ड्यूटी में कमी का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक बारिश रही है। जिससे सीमेंट फैक्ट्रियों और आयरन फैक्ट्रियों में उत्पादन कम होने से एक्साइज ड्यूटी कम प्राप्त हुई। क्योंकि बारिश के कारण लंबे समय तक कंस्ट्रक्शन कार्य शुरू नहीं हुए। उन्होंने बताया कि एक्साइज ड्यूटी में राजस्व का 70 प्रतिशत सीमेंट, स्टील एवं फर्टिलाइजर्स सेक्टर से आता है। बाकी 30 प्रतिशत में अन्य उत्पाद शामिल हैं।
सेमटेल की जमीन बेचकर वसूली जाएगी एक्साइज ड्यूटी
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि सेमटेल कलर फैक्ट्री पर 1.10 करोड़ रुपए एक्साइज ड्यूटी बकाया चल रही है। ब्याज एवं पेनल्टी जोड़कर 60 लाख रुपए और जोड़कर 1.70 करोड़ रुपए की वसूली के लिए फैक्ट्री का सेमी फिनिश्ड गुड्स अटैच कर रखा है। जिसकी एक बार नीलामी कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन नहीं हो पाई। इसलिए दुबारा नीलामी होगी। विभाग के पास जमीन की बिक्री का भी विकल्प है। जरूरत पडऩे पर सेमटेल की जमीन बेचकर एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी।

Tuesday, April 1, 2014

7 साल बाद याद आई सर्विस टैक्स की वसूली


दिनेश माहेश्वरी कोटा. कृषि उपज मंडी समिति को सात साल बाद सर्विस टैक्स वसूली की याद आई। भामाशाह अनाज मंडी और थोक फल सब्जी मंडी दोनों के मिलाकर करीब 500 से अधिक व्यापारियों को मंडी समिति ने 72 लाख रुपए वसूली के नोटिस जारी किए हैं।

पिछले दिनों मंडी समिति केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सर्विस टैक्स विभाग के कमिश्नर के पास अपील में सर्विस टैक्स का केस हार गई। विभाग ने इससे पहले वर्ष 2007 से 70 लाख रुपए भामाशाह मंडी पर और 1.83 लाख रुपए थोक फल सब्जी मंडी के ऊपर सर्विस टैक्स की डिमांड निकाल दी। इस मामले में विभाग ने वर्ष 2011 में मंडी समिति को टैक्स की डिमांड का नोटिस दिया था। जब मंडी समिति का अपील खारिज हो गई तो दोनों मंडियों का मिलाकर करीब 72 लाख रुपए टैक्स जमा कराना पड़ा। इसकी वसूली के लिए मंडी समिति ने व्यापारियों को नोटिस थमा दिए।

मंडी समिति के लीगल एडवाइजर एवं सीए एमडी सोनी ने बताया कि मंडी समितियां व्यापारियों से दुकानों का किराया और बेची गई संपत्ति पर लीज वसूलती है। इस पर संबंधित विभाग सर्विस टैक्स वसूल रहा है। मंडी समितियां का यह मामला अब केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर विभाग के नई दिल्ली स्थित ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।
कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के महामंत्री अविनाश राठी का कहना है कि मंडी समिति को उन्होंने इस मामले में पत्र लिखा है कि जब तक ट्रिब्यूनल का फैसला नहीं आ जाता तब तक वह व्यापारियों से सर्विस टैक्स नहीं वसूले। क्योंकि एक बार वसूला गया टैक्स मंडी समिति लौटाएगी नहीं। इस मामले में उन्होंने कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी से भी अपील की है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान की किसी भी मंडी में व्यापारियों से इस तरह सर्विस टैक्स नहीं लिया जा रहा है, तो फिर कोटा मंडी में ही वसूली की जल्दी क्यों ? थोक फ्रूट एंड वेजीटेबल मर्चेंट्स यूनियन के महासचिव संतोष मेहता ने भी चुकाई गई लीज पर सर्विस टैक्स की वसूली को गलत बताया है। व्यापारी एक साथ इतना टैक्स कहां से देंगे।
सात सात बाद वसूली क्यों
मंडी समितियों द्वारा दुकानों का किराया वसूलने और संपत्ति पर लीज वसूलने पर केन्द्रीय उत्पाद सेवाकर नियमों के तहत सर्विस टैक्स लगता है। केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग ने वर्ष 2007 से डिमांड निकाली है तो उसकी वसूली भी अब की जा रही है।
कितना बनता है सर्विस टैक्स: कोई दुकानदार दुकान का किराया 2 हजार रुपए महीना दे रहा है। इस हिसाब से एक साल का 24 हजार रुपए हुआ। सात साल में 1 लाख 68 हजार रुपए हुआ। इस पर 12.36 की दर से सर्विस टैक्स 20 हजार 764 रुपए हुआ। इस तरह हर दुकान की लीज एवं किराया अलग-अलग होने से टैक्स भी अलग होगा।
केस जीते तो टैक्स रिफंड देंगे: केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर ने वर्ष 2007 से सर्विस टैक्स की डिमांड निकाली है। इसकी राशि मंडी समितियां जमा करा चुकी है। इसलिए व्यापारियों को वसूली के नोटिस दिए हैं। यदि ट्रिब्यूनल में मंडी समिति केस जीत गई तो जैसे ही विभाग उन्हें रिफंड करेगा, वह भी व्यापारियों को रिफंड कर देंगे।
-एमएल जाटव, सचिव कृषि उपज मंडी समिति

Tuesday, May 14, 2013

SERVICE TAX RECORD OF COACHING INSTITUTES OF KOTA