Tuesday, December 29, 2015

ऐप्‍स बढ़ाते हैं स्‍मार्टफोन बैटरी की खपत

अगर आपके स्‍मार्टफोन है तो निश्चित तौर पर उसमें कई ऐप्‍स भी होंगे। ऐप्‍स की वजह से हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के कई काम आसान हो जाते हैं।
सामान्‍यत: स्‍मार्टफोन यूजर्स के पास सोशल नेटवर्किंग ऐप्‍स, मैसेंजर्स तथा गेम्स होते हैं। यूजर्स की हमेशा शिकायत रहती है कि उनके फोन की बैटरी जल्‍दी खत्‍म हो जाती है। कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्‍यों होता है। दरअसल आपके स्‍मार्टफोन में मौजूद ऐप्‍स सबसे ज्‍यादा बैटरी खपत करते हैं।
ऐप्‍स स्मार्टफोन की बैटरी की खपत तो करते ही हैं साथ ही स्‍टोरेज स्‍पेस भी काफी उपयोग कर लेते हैं। कुछ ऐप्‍स तो ऐसे हैं, जो फोन की प्राइमरी मेमोरी में ही स्‍टोर होते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी खपत कम हो और मेमोरी स्‍पेस भी कम उपयोग हो तो अनुपयोगी ऐप्‍स को अनइंस्‍टॉल कर दीजिए।
आज हम आपको कुछ ऐसे ऐप्‍स के बारे में बता रहे हैं जो स्‍मार्टफोन की बैटरी काफी अधिक खर्च करते हैं।
वीचैट : वीचैट एक इंस्‍टेंट मैसेंजर ऐप है, जो फोन की काफी बैटरी खर्च कर देता है। इस ऐप से टेक्‍स्‍ट मैसेज के साथ ही वॉयस मैसेज भी किया जा सकता है।
एंड्रॉयड फर्मवेअर अपडेटर : यह एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्‍टम का एक ऐप है, जो बैकग्राउंड में एक्टिव रहता है तथा इंटरनेट तथा बैटरी की खपत करता रहता है।
बीमिंग सर्विस फॉर सैमसंग : सैमसंग स्‍मार्टफोन्‍स के लिए बनाया गया विशेष ऐप
सैमसंग सिक्योरिटी पॉलिसी अपडेटर : यह ऐप भी केवल सैमसंग के स्‍मार्टफोन्‍स में ही इंस्‍टॉल रहता है।
सैमसंग चैटऑन : यह सैमसंग का चैटिंग ऐप है, जो दूसरे सैमसंग फोन यूजर्स के साथ चैट की सुविधा देता है।
गूगल प्ले सर्विसेज : गूगल प्‍ले स्‍टोर का यह ऐप बैटरी तथा डेटा पैक की काफी खपत करता है।
फेसबुक : सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक का मोबाइल ऐप
बीबीएम : ब्‍लैकबेरी मैसेंजर
व्हाट्सएप : इंस्‍टेंट मैसेंजर जो फोन की प्राइमरी स्‍टोरेज में सेव होता है और काफी बैटरी की खपत करता है।
वेदर एंड क्लॉक विजट एंड्रॉयड

30 जून तक बदल सकेंगे 2005 से पहले के नोट

उपभोक्ताओं से साल 2005 के पुराने नोट बदलने में आरबीआई पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है। बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि भले ही आरबीआई ने पुराने नोट बदलने के लिए तय समय सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 30 जून 2016 करने के संकेत दिए है। इन संकेतों के साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब लोगों को पुराने नोट बदलने ही होंगे। पुराने नोट बदलने के लिए जल्द ही आरबीआई द्वारा कुछ बैंकों को चिन्हित कर लिया जाएगा। इसके लिए अलग से अधिकारी भी नियुक्त होंगे।
जो केवल पुराने नोट के बदले जाने पर भी नजर रखेंगे। हालांकि अभी तक इस संबंध में अभी जानकारी नहीं है कि वे कौन से बैंक है जहां पुराने नोट बदले जाएंगे। साल 2005 से पहले के नोट बदलने की आखिरी तारीख अब तक 31 दिसंबर ही है। इसके अनुसार उपभोक्ताओं को अपने 2005 से पहले के नोट बदलने होंगे।इससे पहले पिछले साल अप्रैल में ही पुराने नोट बदली जाने थे, लेकिन आरबीआई ने तीन बार तारीख बढ़ा दी तथा इसे 31 दिसंबर 2015 कर दिया। बैंकिग अधिकारियों का कहना है कि इस बार आरबीआई लोगों के घरों में जमा पुराने नोट बाहर निकालने में सक्रिय नजर आ रहा है। बताया जाता है कि पुराने नोट बदलने की तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है लेकिन अभी तक बैंकों के पास इस संबंध में कोई सूचना नहीं है। 
\कालेधन पर लगेगा लगाम
आरबीआई द्वारा पुराने नोट बदलने पर जोर देने का मुख्य कारण कालेधन पर लगाम लगाना है। बैंकिंग अधिकारियों का कहना है कि इससे काफी हद तक कालेधन पर लगाम कसेगा और लोग अपना पैसा दूसरे सेक्टरों में खपाने की कोशिश करेंगे। इससे आसानी से वे पकड़ में आएंगे। सूत्रों का कहना है कि इससे बहुत अधिक राशि सोने व रियल इस्टेट सेक्टर में भी खपेगा। 
ऐसे पहचाने पुराने नोट
साल 2005 से पहले के नोट के पीछे की ओर वर्ष का जिक्र नहीं है। जबकि इसके बाद के नोट के पीछे वर्ष का जिक्र है। जिससे आप बड़ी आसानी से पुराने नोट पहचान सकते है। इनमें मुख्य रूप से 500 व 1000 के नोट बदलवाने है।

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Friday, December 25, 2015

वॉट्सऐप पर अब वीडियो कॉलिंग की सुविधा

लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस वॉट्सऐप पर वॉयस कॉल के बाद अब वीडियो कॉल की भी सुविधा जल्द मिलने वाली है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वॉट्सऐप जल्द ही अपने यूजर्स को वीडिया कॉलिंग की सुविधा मुहैया करने वाला है। जर्मन वेबसाइट Macerkopf के अनुसार, यूजर्स को वीडियो कॉल के लिए दोनों कैमरों को चुनने का विकल्प मिलेगा।
वॉट्सऐप के एक्टिव यूजर्स की संख्या 90 करोड़ पार कर चुकी है। यह एप्लिकेशन अब अपनी मूल कंपनी फेसबुक जितना ही बड़ा रूप में है। फेसबुक मैसेंजर पर पहले से ही वीडियो कॉल की सुविधा मौजूद है, इसलिए वॉट्सऐप पर भी नई सुविधाओं को जोड़ने की जरूरत है।
जर्मन वेबसाइट ने वॉट्सऐप के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं जो कथित तौर पर वीडियो कॉल के हैं। इन स्क्रीनशॉट के आधार पर कहा जा सकता है कि वॉट्सऐप के वीडियो कॉल फीचर का इंटरफेस बहुत हद वॉयस कॉल सपोर्ट के इंटरफेस जैसा ही है।स्क्रीनशॉट में यह भी दिख रहा है कि यूजर को म्यूट करने का विकल्प मिलेगा और वीडियो कॉल के दौरान कैमरा भी स्विच किया जा सकेगा यानि फ्रंट और रियर दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सऐप के 2.12.16.2 आईओएस वर्जन को आंतरिक तौर पर टेस्ट किया जा रहा है। इस वर्जन में ही कथित तौर पर वीडियो कॉल सपोर्ट मौजूद है।
हालांकि वीडियो कॉल सपोर्ट को लेकर वॉट्सऐप की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे अगले साल की शुरुआत में रोलआउट किया जाएगा।
वॉट्सऐप वीडियो कॉल का मोबाइल इंटरनेट पर कैसा प्रदर्शन होगा यह देखना  दिलचस्प होगा। मुफ्त वॉट्सऐप वॉयस कॉल ने शुरुआत में यूजर्स का काफी ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन जल्द ही लोगों ने इसे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है, खासकर भारत में, जहां 3 जी नेटवर्क के बिना बातचीत करना लगभग असंभव है।

Sunday, December 20, 2015

पत्रकारों को भी पेंशन दे सरकार : हाईकोर्ट

हिमाचल हाईकोर्ट ने मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को पेंशन दिए जाने का प्रावधान बनाने के आदेश पारित किए हैं। प्रदेश सरकार को यह आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा सरकार की ओर से पत्रकारों को पेंशन दिए जाने बाबत बनाए गए नियमों की तर्ज पर प्रदेश में भी नियम बनाए जाएं। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के पत्रकारों को यह लाभ देने के लिए 3 माह का समय दिया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिन पत्रकारों ने अपनी जिंदगी के अहम दिन इस व्यवसाय में लगा दिए, उन्हें पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए अभी तक कोई भी पेंशन और स्वास्थ्य योजना नहीं बनाई है। पत्रकारों को इस तरह की योजना का लाभ दिया जाना जरूरी है। कोर्ट के अनुसार जिन पत्रकारों ने इस व्यवसाय में कम से कम 20 साल पूरे कर लिए हैं, उन्हें पेंशन जैसा लाभ दिए जाने का प्रावधान बनाया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की एक पीठ ने कहा कि पत्रकारों को अदालतों की कार्यवाही की रिपोर्ट पेश करने के मामले में अतिरिक्त सावधानियां रखनी चाहिए। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर की एक पीठ ने अपने आदेश को गलत ढंग से पेश करने के लिए एक अंग्रेजी दैनिक के पत्रकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही को रद्द कर दिया है। पीठ ने यह कहते हुए कि 'कलम की ताकत, तलवार की ताकत से अधिक होती है', आगे कहा कि रिपोर्टिंग त्रुटि रहित, वास्तविक और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।

Monday, December 14, 2015

मजीठिया को लेकर मीडिया यूनियनों की चुप्पी

 सुप्रीम कोर्ट में 7 फरवरी और फिर 10 अप्रैल 2014 के बाद पत्रकारिता जगत में कोई हलचल नहीं मची। मजीठिया वेतन बोर्ड के खिलाफ मुकदमा जिताने का दावा करने वाली देश की बड़ी-बड़ी यूनियनों ने हाथ खड़े कर दिए। ये वही संस्थााएं थीं जो सुप्रीम कोर्ट में मालिकों को नाकों चने चबवाने का दावा कर रही थीं लेकिन समझ में नहीं आया कि इतना सब करने वाली ये यूनियनें जब मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने की बात हुई तो उन्हें सांप क्यों सूंघ गया। न पीटीआई, न यूएनआई ( खैर इनकी अब हालत पहले जैसी नहीं रही) की यूनियनें, न डीयूजे और न ही आई एफडब्यूएनआईजे ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के लिए मालिकों को कटघरे में खड़ा किया। आखिर उनकी चुप्पी का राज क्या था। जीत का दावा करने वालों को पता होना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट में जीतने के बाद असल काम तो इसे लागू कराना है जहां उनकी जरूरत थी।
10 अप्रैल और और मई के पहले हफ्ते तक भी इन यूनियनों को कोई होश नहीं था। लेकिन जब दैनिक जागरण, भास्कर, प्रभात खबर, डीएनए, राजस्थान पत्रिका, हिन्दुस्तान, अमर उजाला, पंजाब केसरी के प्रबंधनों के खिलाफ आवाज उठने लगी। पूरे देश में एक माहौल बना। सोशल मीडिया पर बताया गया कि सभी साथियों को इस बार क्यों मालिकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए तो लगभग पूर देश के पीडि़त साथी, इस बात से सहमत थे कि उनके चुप बैठने से काम नहीं चलेगा। उन्हें कुछ करना पड़ेगा और उसकी शुरुआत देश के सबसे अधिक लाभ कमाने वाले पर घटिया प्रबंधन वाले अखबार दैनिक जागरण के साथियों ने की। सबको आश्चर्य हुआ कि इतना बड़ा फैसला पहली बार देश में दैनिक जागरण के साथियों ने लिया। हम में से किसी को यह उम्मीद नहीं थी। लेकिन हकीकत यही है।
माहौल बना और प्रबंधन को नोटिस दिया गया। इसके बाद इसका पूरे जोर-शोर से प्रचार किया गया और नतीजा बेहतर निकला जब तक दै‍निक जागरण के साथी मामला दर्ज करवाते, एक और चमत्कार हो चुका था। दैनिक भास्‍क्‍र के साथी अपने मालिक रमेशचंद्र अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट में घसीटने का बीड़ा उठा चुके थे। जून और जुलाई आते-आते मालिकों के खिलाफ माहौल गर्म हो चुका था और सितंबर आते-आते इंडियन एक्सप्रेस के साथियों के मामले में सुनवाई शुरू हो गई। इस समय तक सुप्रीम कोर्ट में छह मामले दर्ज कराए जा चुके थे और साथियों को मना करने के बाद भी देश के लगभग हर शहर में अन्याय के खिलाफ लड़ने का मन बना चुके थे। हालांकि मामला सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही सुना जाएगा और सभी साथियों से फिर निवेदन है कि वे अपनी ताकत न गंवाएं और लड़ाई सु्प्रीम कोर्ट में लड़ने के लिए ताकत संजोकर रखें। लेकिन उत्साह और उबाल इतना कि शिमला, अहमदाबाद, पटना, मुंबई, पुणे, कानपुर, रांची, चंडीगढ़, लुधियाना, हिसार, पानीपत, जम्मू, जयपुर ,लखनऊ और इंदौर जैसे शहरों के साथी हिम्म़त के साथ आगे आए। कई लोग हाईकोर्ट गए तो कई लेबर कोर्ट। मालिकों को जवाब देना पड़ा। लेकिन इतने दिनों तक किसी यूनियन की नींद नहीं खुली।


हमें क्यों चाहिए मजीठिया : दूर करें भ्रांतियां...

प्रश्न. मेरा स्‍थानांतरण ग्रुप की दूसरी कंपनी में कर दिया गया है। मैं जिस कंपनी में था वह ए ग्रुप की कंपनी थी। मेरा विभाग और पद भी बदल दिया गया है, ऐसे में वेजबोर्ड लागू होने पर मेरे वेतन का आधार क्‍या होगा।
उत्तर. आपके या इसी तरह के किसी अन्‍य केस में कंपनी आपको ए ग्रेड के हिसाब से मिलने वाले लाभ से वंचित नहीं कर सकती है। आपका तबादला जिस तिथि में हुआ उस तिथि में मजीठिया के अनुसार आपका जो वेतनमान होना चाहिए उससे एक भी नया पैसा आपको संस्‍थान कम नहीं दे सकती है। आपका एरियर भी ए ग्रेड के वेतनमान के अनुसार ही कंपनी को देना होगा। दूसरी कंपनी में रहते भी हुए आप ए ग्रेड की कंपनी के वेतनमान के अनुसार ही वेतन पाने के अधिकारी हैं। ग्रुप ए के वेतनमान से कंपनी आपको वंचित नहीं कर सकती।
प्र. जिस संस्‍थान में मैं कार्य कर रहा हूं वेजबोर्ड में उसका ग्रेड सी है। ऐसी अफवाह है कि संस्‍थान पूरी तरह से वेजबोर्ड के लाभ नहीं देने के मकसद से कंपनी को दो तीन भागों में बांट कर अपने मुनाफे का बंटवारा करना चाहता है। जिससे वे सी ग्रेड के वेतनमान देने से बच सकें।
उ. कंपनी को कई भागों में बांटने के बावजूद आपका संस्‍थान आपको सी ग्रेड के लाभ से वंचित नहीं कर सकता।
प्र. मैं पिछले पांच साल से बी ग्रेड की कंपनी में अनुबंध कर्मी के रुप में कार्य कर रहा हूं। क्‍या मैं भी वेजबोर्ड का लाभ पाने का हकदार हूं।
उ. जी हां। आप वेजबोर्ड के अनुसार वेतनमान पाने के हकदार हैं।

Friday, December 11, 2015

कोचिंग छोड़ने पर फीस वापस,होगी

दिनेश माहेश्वरी 
कोटा। राजस्थान में कोटा और अन्य शहरों के कोचिंग संस्थानो में पढ़ रहे बच्चे यदि बीच में पढ़ाई छोड़ना चाहें तो कोचिंग संस्थान को उनकी फीस वापस करनी होगी। इसके साथ ही इन कोचिंग संस्थाओं को नियमों के दायरे में लाया जाएगा और इसके लिए राज्य स्तर पर नियामक व्यवस्था लागू की जाएगी। कोटा के कोचिंग संस्थाओं में पढ़ रहे बच्चों की लगातार आत्महत्याओं के बाद आखिर गुरूवार को जयपुर में राजस्थान में मुख्य सचिव सी.एस.राजन के स्तर पर बैठक हुई।
बैठक में सम्बन्धित विभागों के अधिकारी, कोटा जिला प्रशासन के अधिकारी और कुछ कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधि भी शमिल थे। कोटा में इस वर्ष 26 कोचिंग छात्र-छात्राएं आत्महत्याएं कर चुके हैं और इन संस्थानों में पढ़ाने के तरीके और बच्चो में बढ़ते तनाव को ले कर सख्त नियम बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। बैठक में मुख्य सचिव ने कोचिंग बीच में छोड़ने के इच्छुक छात्रों की बकाया फीस लौटाने सरल एक्जिट सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव का मानना था कि कोचिंग संस्थानों की भारी फीस का दबाव बच्चों पर रहता है। ऐसे में यदि वे नहीं पढ़ पाते तो तनाव में आ जाते हैं। उन्हें माता- पिता द्वारा किए गए खर्च की चिंता सताने लगती है। उन्होंने कोचिंग संस्थाओं से कहा कि कोई छात्र यदि बीच में जाना चाहता है और उसकी फीस लौटा दी जाए तो बच्चों का तनाव काफी हद तक कम हो सकता है। इसके साथ ही बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए नियामक सिस्टम विकसित करने पर भी सहमति बनी है। इसका ड्राफ्ट जल्द तैयार कर लिया जाएगा।
इसके जरिए सरकार कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर पूरी नजर रखेगी। अभी तक ये संस्थान सरकार के नियमों से बाहर है। बैठक में संस्थानों को बच्चों के स्ट्रेस मैनेजमेन्ट के लिए एक हैल्पलाइन और ट्रेनिंग मॉड्यूल बनाने के निर्देश भी दिए गए है। यह हैल्पलाइन मुख्य तौर पर दो काम करेगी जिसमें बच्चों को तनाव से दूर रखने के साथ ही स्कूल और कोचिंग साथ-साथ करने की समस्या से निपटने पर भी बात की जाएगी। कोचिंग में तो सिर्फ छह घंटे रहते हैं कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव के सामने यह तर्क दिया कि बच्चे कोचिंग में तो महज छह घंटे ही रहते हैं, और बाकी के अठारह घंटे वे बाहर रहते हैं, ऐसे में सिर्फ उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है। लेकिन मुख्य सचिव सीएस राजन ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया। कोचिंग संस्थानों ने कोचिंग पर कोई संकट आने की स्थिति में कोटा की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने का तर्क भी दिया। लेकिन इस तर्क को भी बैठक में खारिज कर दिया गया। अफसरों ने कहा कि एक शहर की इकॉनोमी की खातिर आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में नहीं डाला जा सकता।

Thursday, December 10, 2015

एंड्रॉयड फोन पर बोलकर मैसेज भेजें

जब आप गूगल नाउ को 'OK गूगल। शो मी माय मेसेजेज़' कहेंगे तो वो आपके अंतिम पांच मैसेज पढ़कर सुना देगा। अगर आप चाहेंगे तो इन्हें सुने बिना आप आगे बढ़ सकते हैं।
जब आप किसी मैसेज का जवाब देना चाहते हैं तो बस गूगल नाउ को 'रिप्लाई' बोलें और फिर अपना जवाब बोल दीजिए।भेजने के पहले आप अपना मैसेज पढ़ भी सकते हैं। उसके बाद गूगल नाउ को 'सेंड' बोलिए और मैसेज आपके दोस्त के इनबॉक्स के लिए रवाना हो जाएगा। 

अब रिज्यूमे रिकॉर्ड करके भेजिए

फिल्मों या टेलीविजन सीरियल्स में रोल पाने के लिए उम्मीदवारों को कैमरे के सामने ऑडिशन देते तो देखा गया है लेकिन आजकल कॉर्पोरेट जगत में भी उम्मीदवारों से वीडियो रिज्यूमे मंगवाने का चलन बढ़ रहा है। 
मुंबई की एचआर कंपनी 'मौर‌फिस कंसल्टेन्सी' के मालिक कैलाश साहनी कहते हैं, "वीडियो रिज्यूमे पर जो जोर दिया जा रहा है उसके कई कारण हैं।" वो कहते हैं, "पहली तो ये कि उम्मीदवार को प्रथम चरण के इंटरव्यू के लिए खुद बुलाने की जरूरत नहीं होती है, इससे समय की बचत होती है।" 
साथ ही कंपनी के अहम अधिकारियों को शुरूआत दौर में सभी उम्मीदवारों से व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिलना पड़ता है। मुंबई की ही कंपनी 'इंटरव्यू एअर' के संचालक रोहित तनेजा बताते हैं, "हमारे साथ जुड़े 3000 में से 2500 से भी ज्यादा उम्मीदवारों ने अपना वीडियो रिज्यूमे तैयार कर लिया है।" 
रोहित कहते हैं कि कई कंपनियां वीडियो 'सीवी' के लिए उम्मीद्वारों को सवाल भेजती है और समय सीमा भी तय कर देती है ताकि जो वीडियो जाए वो बिना मतलब के लंबा चौड़ा न हो। 
वीडियो 'सीवी' के फायदे बताते हुए कैलाश कहते हैं, "उम्मीदवारों को पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए मनचाहा समय मिल जाता है। अगर किसी प्रकार की चूक हो भी जाए तो वे उसे दोबारा रिकॉर्ड कर सकते हैं।" रोहित बताते है, "उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए आने जाने में जो खर्च होता है उसकी बचत हो जाती है।" 
एक अच्छा और असरदार वीडियो रिज्यूमे कैसा होना चाहिए? कैलाश कहते हैं, "आप जिस तरह एक व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए अपने आप को प्रदर्शित करते हैं, ठीक उसी तरह वीडियो इंटरव्यू के लिए भी खुद को तैयार करें।" उनका मानना हैं, "उम्मीदवारों को अपने सबसे बड़े अनुभवों को सबसे पहले बताना चाहिए, इसके अलावा अपने वीडियो की लंबाई 40 से 60 सेकेंड के बीच रखें।" एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के मानव संसाधन विभाग के अधिकारी बीबीसी से कहते हैं, "वीडियो रिज्यूमे शुरूआती प्रभाव तैयार करने में मददगार हो सकता इसलिए जरुरी है की आप वीडियो में उत्सुक दिखें।" लेकिन मुंबई में काम कर रही 23 वर्षीय एंजल मुदालिअर कहती हैं, आज भी एक असरदार रिज्यूमे कैसे बनाएं इसपर ठीक तरह से कोई मार्गदर्शन नहीं। वो कहती हैं, "मुझे इंटरव्यू के लिए बुलावा वीडियो रिज्यूमे भेजने के बाद ही आया था लेकिन ये आपको सिर्फ अगले दौर तक पहुंचने में मदद कर सकता है। नौकरी आपको प्रतिभा और कौशल से ही मिलेगी।" 
वीडियो रिज्यूमे का फायदा सिर्फ नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीद्वारों को ही नहीं बल्कि नौकरी का अवसर प्रदान कर रही कंपनी को भी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि ये ट्रेंड छोटे शहरों में नहीं पहुंचा है लेकिन इंफार्मेशन ऐज में शायद उसमें बहुत वक्त नहीं लगेगा!

Wednesday, December 9, 2015

मजीठिया मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को

 मीडियाकर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। माननीय उच्चतम न्यायालय में चल रहे मजीठिया मामले में 15 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी। मीडियाकर्मियों का केस लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री परमानन्द पाण्डेय ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीने से इस मामले में लगातार तारीख पर तारीख लग रही थीं। इसे देखते हुए उन्होंने इस सम्बन्ध में आवश्यक प्रयास किये, जिसके बाद मामले में सुनवाई की तिथि 15 दिसंबर तय हुई है। इस मामले में अखबार मालिकों पर माननीय उच्चतम न्यायालय की अवमानना का आरोप है। गौरतलब है कि इस मामले में लगातार बढ़ रही तारीखों से मीडियाकर्मियों में थोडा निराशा का माहौल था। लेकिन अब इस राहत भरी खबर के आने के बाद जहाँ मीडियाकर्मियों के चेहरे पर ख़ुशी है, वहीँ अखबार मालिकों की सांसें थम गयी हैं। अखबार मालिक लंबे समय से कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग पर उनका जबरदस्त उत्पीड़न कर रहे थे। दैनिक जागरण के मालिकान इसमें सबसे आगे हैं। लेकिन अब यह तय है कि अखबार मालिकों पर कानून का शिकंजा कस चुका है और खुद को भारत के संविधान से ऊपर मानने वाले मालिकानों को कर्मचारियों को उनका हक़ अवश्य देना पड़ेगा।

Tuesday, December 8, 2015

प्रिंटर का कागज कभी खत्‍म नहीं होगा

यदि आप प्रिंटर का उपयोग करते हैं, तो आप कागज खत्‍म होने की समस्‍या से भी दो-चार जरूर हुए होंगे। लेकिन अब एक ऐसा प्रिंटर आया है, जिसमें कागज कभी खत्‍म ही नहीं होगा।
जी हां, इस प्रिंटिंग मशीन का निर्माण एप्‍सन ने किया है और इसे पेपरलैब ऑफिस पेपर-मेकिंग सिस्‍टम पर बनाया गया है। यानी यह मशीन, प्रिंटिंग के साथ ही साथ कागज भी बनाएगी।
दो एटीएम मशीन के आकार की यह प्रिंटिंग मशीन एक मिनट में ए4 आकार के 14 कागज बना सकती है। साथ ही इसकी छपाई क्षमता 20 पेज प्रति मिनट है।
कैसे बनेगा कागज
एप्‍सन की यह प्रिंटिंग मशीन, कॉटन फाइबर से कागज बनाएगी, जिसके लिए इसमें कागज भी रिसाइकिल किए जाएंगे।यह मशीन कागज बनाने के लिए पानी तथा आर्द्रता का उपयोग करेगी, जिससे ईको-फ्रेंडली तरीके से कागज निर्मित होगा। इस वजह से यह मशीन कार्बन उत्‍सर्जन भी कम करेगी। उल्‍लेखनीय है कि एप्‍सन 1960 के दशक से इलेक्‍ट्रॉनिक प्रिंटर्स का निर्माण कर रही है। हालांकि कंपनी की यह नई पेपरलैब मशीन अभी तक बाजार में पेश नहीं की गई है।

एक मिस कॉल से रिचार्ज होगा मोबाइल

जल्द ही एचडीएफसी बैंक एक ऐसी सेवा शुरू करने जा रहे है, जिसके तहत इसके ग्राहक अपना फोन सिर्फ एक मिस कॉल से ही रिचार्ज कर सकेंगे। इसकी घोषणा बैंक के डिजिटल बैंकिंग हेड नितिन चुघ ने की। इसके तहत सबसे पहले ग्राहक को अपना नंबर एक एसएमएस के जरिए एक्टिवेट करना होगा। इसी एसएमएस में यह भी निर्धारित करना होगा कि वह मिस कॉल पर कितने रुपए का रिचार्ज करना चाहता है।एक्टिवेशन के बाद जब भी कोई व्यक्ति बैंक की तरफ से दिए गए नंबर पर बैंक के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए मिस कॉल करेगा, तो उसका फोन पहले से तय राशि से रिचार्ज हो जाएगा।
नंबर रिचार्ज होते ही ग्राहक के बैंक अकाउंट से उतनी राशि कट जाएगी, जिनते का रिचार्ज उनके मोबाइल पर होगा।इतना ही नहीं, मैसेज के जरिए अन्य नंबर भी रजिस्टर किए जा सकते हैं, जिन पर होने वाले रिचार्ज का पैसा आपके ही अकाउंट से कटेगा। इसका फायदा आपके दोस्तों और परिजनों को मिल सकता है।

Monday, December 7, 2015

धोखेबाज बिल्डर से ऐसे निपटें

आजकल हर जगह फ्लैट सिस्टम बढ़ता ही जा रहा है। कई जगह बिल्डर रो हाउस भी बनाकर दे रहे हैं। शुरूआत में बिल्डर कई तरह के वादे कर लेता है जो बाद में पूरे नहीं कर पाता है। कई बार बिल्डर समय पर प्रोजेक्ट पूरा कर पजेशन भी नहीं देता। साथ ही ब्रोशर में दी गई सुविधाओं की सूची को भी पूरा नहीं करता है। आज हम आपको ऐसे बिल्डरों निपटने के लिए सलाह दे रहे हैं।
रियल एस्टेट इंडस्ट्री बड़ी तेजी से बढ़ रही है। रेसीडेंसियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। बाजार में कई तरह के बिल्डर और डेवलपर्स उतर रहे हैं। ये ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के दाने फेंकते हैं। हालांकि इसकी कोई ग्यारटंी नहीं होती कि इस तरह के वादे समय पर पूरे होंगे। ग्राहकों को समय पर पजेशन नहीं मिलना इन बिल्डरों के खिलाफ सबसे आम शिकायत होती है।
बिल्डर के खिलाफ आती हैं इस तरह की शिकायतें
सेवा में दोष की कई तरह की शिकायतें बिल्डर के खिलाफ आती हैं।
वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं देना
छत टपकना
ड्रेनेज सिस्टम की गड़बड़ी
अधूरा फायर सेफ्टी सिस्टम
हल्की इलेक्ट्रिकल वायरिंग
पानी की सुविधाओं में कमी
ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं देना
घर खरीद रहें हैं तो इनका रखें ध्यान
किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले ग्राहक को उसका ठीक तरीके से मुआयना कर लेना चाहिए।
प्रॉपर्टी के ऑरिजनल पेपर मांग कर देखना चाहिए
पिछले कुछ वर्षों के उस प्रॉपर्टी के टाइटल की भी जांच कर लेनी चाहिए
क्या बिल्डर ने कलेक्टर जमीन के लिए गैर कृषि की मंजूरी ले ली है
जमीन के असली मालिक और बिल्डर के बीच हुए डेवलपमेंट एग्रीमेंट को भी जांचे
अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत ऑर्डर की कॉपी जांचे। बिल्डिंग प्लान पर नगर पालिका, नगर निगम या पंचायत की मंजूरी संबंधी कॉपी को भी देखें
बिल्डिंग की पूर्णता संबंधी सर्टिफिकेट की मांग भी करें
बिल्डिंग की ऊंचाई संबंधी नियमों को भी जाने
शिकायत होने पर क्या करें
अगर आपको किसी बिल्डर से शिकायत है तो सबसे पहले आप अपनी शिकायत को एक लीगल नोटिस के तौर पर बिल्डर को दें
बिल्डर से जवाब आने तक इंतजार करें
जवाब नहीं आने या संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वकील की सलाह पर एक अर्र्जी तैयार करें
इस अर्जी को कंज्यूमर फोरम या कोर्ट में शिकायत के तौर दर्ज कराएं
कहां करे शिकायत
किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले ग्राहक को उसका ठीक तरीके से मुआयना कर लेना चाहिए।
सिविल कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक ग्राहक को कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत बिल्डर की वादाखिलाफी के खिलाफ सिविल कोर्ट जाने का अधिकार है। अगर कोई बिल्डर कंस्ट्रक्शन में घटिया माल इस्तेमाल करता है या घर की हालत के बारे मे गलत जानकारी देता है तो ग्राहक को कोर्ट जाने का अधिकार है।
कंज्यूमर फोरम
जब कोई ग्राहकों को सुविधा देने के लिए किसी जमीन पर प्रॉपर्टी खड़ी करता है तो ये एक तरह की सर्विस है। जब समय पर पजेशन नहीं दिया जाता है तो ये बिल्डर की तरफ से सेवा में दोष है। अगर कोई भी ग्राहक बिल्डर की सर्विस में कोई खामी पाता है या उसे समय पर पजेशन नहीं मिलता है तो वो कंज्यूमर कोर्ट का रूख कर सकता है। 20 लाख तक के क्लैम के लिए जिला उपभोक्ता फोरम , 20 लाख से 1 करोड़ तक के क्लैम के लिए राज्य उपभोक्ता फोरम और 1 करोड़ से ऊपर के क्लैम के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में शिकायत की जा सकती है। विवाद के 2 साल के भीतर शिकायत दर्ज की जानी चाहिए। राष्ट्रीय कमीशन ने एक फैसले में कहा है कि अगर प्रोजेक्ट में देरी होती है तो ग्राहक को अधिकार है कि वो प्रोजेक्ट से बाहर होकर अपना पैसा ब्याज सहित रिफंड ले सकता है। फैसले के तहत बिल्डर ब्याज देने से भी मना नहीं कर सकता है।
कंपीटिशन कमीशन
अगर कोई बिल्डर बाजार में अपनी लीडरशीप का फायदा ग्राहक के खिलाफ उठाते हैं तो ग्राहक उस बिल्डर के खिलाफ कंपीटिशन कमीशन में जा सकता है। कमीशन में ऐसे ही बिल्डर के खिलाफ शिकायत की जा सकती है जो बाजार में सबसे बड़ा लीडर हो। कमीशन ने डीलएलफ पर इस तरह के एक मामले में 630 करोड़ की पेनल्टी लगाई है। डीएलएफ ने बिना मंजूरी लिए प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया था। कंपनी ने प्रोजेक्ट के दौरान ही फ्लोर की संख्या बढ़ा दी।
क्रिमिनल केस
अगर बिल्डर ग्राहकों से झूठे वादे करता है और फिर पूरे नहीं करता तो ग्राहक के पास क्रिमिनल कोर्ट में केस दर्ज कराने का अधिकार है। ग्राहक बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवा सकता है। नोटिस जारी करने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऐसी शिकायतों में ग्राहक को हमेशा सबूतों का ध्यान रखना चाहिए।
बिल्डर की खामियां और उनसे निपटने के उपाय
कंस्ट्रक्शन में घटिया माल का इस्तेमाल करना
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक अगर किसी बिल्डर ने बिल्डिंग बनाते समय घटिया माल का इस्तेमाल किया है या घर के बारे में गलत जानकारी दी है तो उसके सेवा देने में दोष है। इसके लिए ग्राहक क्लैम कर सकता है। अगर किसी ग्राहक घटिया घर या फ्लैट मिला है तो वो कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कर सकता है। ऐसे केस में फोरम घर के दोष को निकालकर ग्राहक को मुआवजा दिलाता है।
बिना मंजूरी के कंस्ट्रक्शन करना
अगर किसी प्लॉट पर बिना मंजूरी के और बिना नक्शा पास कराए कोई बिल्डर कंस्ट्रक्शन करता है तो ये भी बिल्डर की गलती मानी जाएगी। इसके लिए ग्राहक कंज्यूमर फोरम या सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। ग्राहक अपना पूरा पैसा रिफंड मांग सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़खाल लेक के 5 किलोमीटर के एरिया में कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी थी। एक शिकायतकर्ता का प्लॉट इसी क्षेत्र में आ रहा था। ऐसे में बिल्डर को शिकायतकर्ता को पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना पड़ा।
अवैध तरीके से खरीदी गई जमीन पर कंस्ट्रक्शन
ऐसी स्थिति में भी ग्राहक कंज्यूमर फोरम या सिविल कोर्ट में जा सकता है। ऐसे केस में ग्राहक रिफंड की मांग कर सकता है या बिल्डर से दूसरी जगह देने की मांग भी कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक बिना जमीन खरीदे उस जमीन पर कंस्ट्रक्शन का विज्ञापन भी नहीं दिया जा सकता।
जमीन का उपयोग बदलना, लेआउट और स्ट्रक्चर में बिना मंजूरी के बदलाव
अगर बिल्डर एग्रीमेंट के अलावा किसी तरह का कंस्ट्रक्शन करता है तो उसे ग्राहक की मंजूरी लेना जरूरी है। साथ ही लेआउट प्लान या ढांचे में किसी तरह के बदलाव करने पर ग्राहक बिल्डर को लीगल नोटिस भेज सकता है। बिल्डर के जवाब नहीं देने पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
छिपे हुए चार्ज
अगर बिल्डर ग्राहक पर कई तरह के छिपे हुए चार्ज लगता है तो उसके खिलाफ सिविल केस दर्ज किया जा सकता है। ग्राहक कंपीटिशन कमीशन में भी इसकी शिकायत कर सकता है। ग्राहक को सबूत के साथ दिखाना होगा कि बिल्डर ने अपनी पोजीशन को बेजा इस्तेमाल किया है।
बढ़े हुए अतिरिक्त डेवलपमेंट चार्ज
किसी बिल्डर के अतिरिक्त या बढ़े हुए डेवलपमेंट चार्ज मांगने पर भी आपको अधिकार है कि आप सिविल कोर्ट में उसके खिलाफ जा सकते हैं।
बुकिंग या प्रोजेक्ट को रद्द करने पर
बुकिंग अमाउंट मिलने के बाद अगर बिल्डर बुकिंग कैंसिल करता है तो ग्राहक उसे लीगल नोटिस भेज सकता है। अगर बिल्डर कोई जवाब नहीं देता है तो ग्राहक कंज्यूमर फोरम में रिफंड के लिए अर्जी दे सकता है।
पजेशन में देरी करने पर
अगर कोई बिल्डर प्रोजेक्ट में देरी करता है और समय पर पजेशन नहीं देता है तो ग्राहक ब्याज सहित अपना पूरा पैसा मांग सकता है। साथ कंज्यूमर फोरम और सिविल कोर्ट में केस लगा सकता है।
ज्यादा देरी और बिल्डर के मार्केट में अपने प्रभुत्व का गलत उपयोग करने पर कंपीटिशन कमीशन में शिकायत की जा सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में तय समय के भीतर पजेशन न देने पर बिल्डर की तरफ से की गई खामी माना है।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं देने पर
ऐसे केस जिसमें बिल्डर को अथॉरिटी से कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है ग्राहक म्युनसिपल ऑफिस में आरटीआई लगाकर इसकी कॉपी मांग सकता है। अगर बिल्डर को ये सर्टिफिकेट मिल गया है और वो ग्राहक को नहीं देना चाहता है तो ग्राहक कंज्यूमर कोर्ट जा सकता है।
तो अगर आप घर या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं तो अपने अधिकारों को पूरी तरह से जाने। बिल्डर के धमकाने में न आएं। सही समय पर उचित फैसला लेकर आप अपना हक पा सकते हैं।

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Saturday, December 5, 2015

कोचिंग के लिए गाइड लाइन बनाने में जुटा केंद्र

देशभर में कोचिंग हब के रूप में विकसित राजस्थान के कोटा में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर केंद्र व राज्य सरकार की नींद टूट गई है। एक वर्ष में यहां 19 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। इस मामले में जहां राज्यपाल कल्याण सिंह ने संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है वहीं अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी देशभर के कोचिंग संस्थानों के नियमन की तैयारी शुरू कर दी है।
छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने और फीस के मुताबिक कोचिंग संस्थानों में संसाधन और पढ़ाई का स्तर सुनिश्चित करने के लिए आइआइटी रुड़की के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ गवर्नेंस) के अध्यक्ष प्रो. अशोक मिश्रा की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।
इस छह सदस्यीय समिति ने मंत्रालय से राष्ट्रीय स्तर पर नियामक संस्था के गठन की सिफारिश की है। कोटा के कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे छात्राओं की आत्महत्या के मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रो. मिश्रा की अध्यक्षता में छह शिक्षाविदों की विशेषज्ञ समिति गठित कर इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के मौजूदा स्वरूप के साथ ही कोचिंग संस्थानों की जरूरत और उनमें पढ़ाई के पैटर्न की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
समिति ने अपनी प्राथमिक सिफारिशें मंत्रालय को सौंप दी हैं। समिति ने प्रवेश परीक्षाओं का पैटर्न बदलने के साथ ही कोचिंग संस्थानों की निगरानी के लिए ऑल इंडिया कॉउंसिल फॉर कोचिंग फॉर एंट्रेंस एग्जाम (एआइसीसीईई) के गठन की सिफारिश की है।
छात्रा ने की आत्महत्या कोटा में शुक्रवार को एक कोचिंग की छात्रा ने आत्महत्या कर ली। छात्रा का नाम सताक्षी गुप्ता है जो  यहां मेडिकल प्रवेश की तैयारी के लिए आई हुई थी। इससे पहले गुरुवार को पंजाब के लुधियाना निवासी वरुण ने आत्महत्या की थी। 

12 साल से कम उम्र के बच्चे का भी रेल में पूरा किराया

आर्थिक तंगी के हालात से गुजर रहे रेलवे ने अपनी जेब भरने केलिए बच्चों से भी पूरा किराया वसूलने का फैसला लिया है। अभी तक रेलगाड़ियों में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को आधे किराये में ही पूरी सीट मिलती रही है। लेकिन रेल मंत्रालय ने अब फैसला किया है कि बच्चों के यदि सीट चाहिए तो उसके लिए भी बड़े व्यक्ति के समान पूरा किराया देना होगा।
लेकिन, यदि सीट नहीं चाहिए तो आधा किराया देकर सफर किया जा सकता है। इस बारे में फैसला हो चुका है और इसे 10 अप्रैल 2016 से लागू किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जब से मंत्रालय का जिम्मा संभाला है, तभी से कम खर्च और अधिक से अधिक कमाई के रास्ते तलाशने के लिए कुछ अधिकारियों को लगा दिया है।उन्हीं अधिकारियों की सलाह पर अब बच्चों से पूरा किराया वसूलने का फैसला किया गया है। भारत में रेल लाने वाली अंग्रेज राज से लेकर अभी तक रेलवे में पांच साल तक के बच्चे फ्री यात्रा और 12 साल के बच्चे आधे किराये में पूरी सीट पाते रहे हैं। नये फैसले के बारे में मंत्रालय से अधिसूचना जारी हो चुकी है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पांच साल के बच्चे पहले की तरह नि:शुल्क यात्रा करते रहेंगे। पांच साल से ऊपर और 12 साल से नीचे केबच्चों को अब आधे किराये में पूरी सीट या बर्थ नहीं मिलेगी।
 बच्चे यदि अपने परिवार के साथ एडजस्ट करके जा सकते हैं तो उनसे आधा किराया लिया जाएगा और यदि उन्हें पूरी सीट चाहिए तो पूरा किराया वसूला जाएगा। रेल मंत्रालय इससे पहले भी आमदनी बढ़ाने के लिए कई अलोकप्रिय फैसले ले चुका है।

ट्रेन में वेटिंग टिकट वाले अब माने जाएंगे बेटिकट

यदि आपका ट्रेन टिकट कंफर्म नहीं हुआ है और आप वेटिंग टिकट लेकर रिजर्व डिब्बे में यात्रा कर रहे हैं तो ठहर जाइए। रेलवे ने इस तरह के टिकटों को यात्रा के लिए वैध दस्तावे
ज की सूची से हटा दिया है।अब यदि ऐसे टिकटों के साथ कोई यात्री ट्रेन के रिजर्व कोच में यात्रा करता है उसे बेटिकट मानते हुए उस पर इसी हिसाब से जुर्माना होगा।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ आधिकारिक सूत्र ने बताया कि किसी भी ट्रेन के वेटिंग टिकट को यात्रा करने के लिए वैध दस्तावेज की सूची से हटा दिया गया है।हालांकि, रेलवे ने वेटिंग टिकट कटाने वालों को एक सहूलियत दी है कि यात्री यदि चाहे तो अनरिजवर्ड कोच मतलब जनरल डिब्बे में वे इस टिकट पर यात्रा कर सकते हैं। इसमें यह नहीं देखा जाएगा कि टिकट स्लीपर क्लास का है या एसी वन, एसी टू या फर्स्ट एसी का। उल्लेखनीय है अभी तक सिर्फ राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में वेटिंग टिकट पर यात्रा की अनुमति नहीं थी। लेकिन अन्य मेल-एक्सप्रेस और पैसेंजर गाड़ियों में वेटिंग टिकट वाले उसी तरह यात्रा करते थे जैसे कि कंफर्म टिकट वाले। लेकिन इस तरह की शिकायत मिलीं कि वेटिंग टिकट वाले कुछ यात्री रेलगाड़ी में यात्रा भी कर लेते थे और इस पर रिफंड भी ले लेते थे। ऐसे में रेलवे को दोहरा नुकसान होता था। अब तो रेलगाड़ी के रवाना होने से आधा घंटा पहले ही इसे अवैध करार दिया गया है। इसलिए इस पर न तो रिफंड मिलेगा और न ही यात्रा हो सकेगी।
अधिकारी का कहना है कि पिछले महीने वेटिंग लिस्ट वाले टिकटों के बारे में नियम में संशोधन हुआ था, उसी दौरान यह भी तय हुआ था। तभी से वेटिंग टिकट यात्रा के लिए वैध दस्तावेज नहीं है, लेकिन इस बारे में रेलवे के फील्ड अधिकारियों के बीच भ्रम होने की वजह से इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका। अब इस बारे में स्पष्टीकरण जारी किया जा रहा है ताकि कहीं भ्रम की स्थिति नहीं रहे।

पत्रकारों के लिए दिल्‍ली विधानसभा में विधेयक पास

आम आदमी पार्टी ने दिल्‍ली में भाजपा का सफाया क्‍यों कर दिया, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पत्रकार रवीश कुमार के बार-बार आग्रह करने के बावजूद बिहार विधान सभा चुनाव 
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की जय हो, पत्रकारों के लिए दिल्‍ली विधानसभा में विधेयक पास आम आदमी पार्टी ने दिल्‍ली में भाजपा का सफाया क्‍यों कर दिया, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पत्रकार रवीश कुमार के बार-बार आग्रह करने के बावजूद बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान पत्रकारों के लिए मजीठिया वेतनमान पर भाजपा नेताओं की बोलती बंद रही। खैर, उसका अंजाम भाजपा को मिल चुका है। आम आदमी पार्टी की बात करें, तो दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पत्रकारों से मुलाकात कर मजीठिया वेतनमान लागू कराने का संकल्‍प किया था। आज उसी संकल्‍प का परिणाम है कि दिल्‍ली सरकार ने पत्रकारों के वेतनमान से संबंधित विधेयक पास कर दिया। सीएम अरविंद केजरीवाल ने मुझसे कहा था, श्रीकांत जी ऐसा कोई कानून नहीं है जिससे बड़े-बड़े अखबार मालिकों पर दबाव बनाया जा सके और उन्‍हें मजीठिया लागू करने के लिए बाध्‍य किया जा सके। धन्‍य हैं दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जिन्‍होंने दिल्‍ली विधान सभा में पत्रकारों के लिए विधेयक पास करा दिया। दिल्‍ली सरकार के इस फैसले पर देश के उन तमाम नेताओं को शर्म आनी चाहिए, जो या तो इस समय देश के प्रधानमंत्री हैं या भविष्‍य में प्रधानमंत्री बनने के लिए मुंह बना रहे हैं। अब तो यह लगने लगा है कि देश का अगला प्रधानमंत्री दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को छोड़कर दूसरा कोई नहीं बन सकता, क्‍योंकि उन्‍हें अपने तन से अधिक लोगों के वेतन की परवाह रहती है। केजरीवाल जी, मैं देश की एक अरब जनता की ओर से आपके हौसले को प्रणाम करता हूं। आपके हौसले के सामने दैनिक जागरण जैसे भ्रष्‍ट, मुनाफाखोर और अत्‍याचारी संस्‍थान पानी भरेंगे। केजरीवाल जी के हौसले का ज्‍वलंत दस्‍तावेज वह खबर है, जिसकी कटिंग नीचे दी जा रही है। मैं उस अखबार के मालिक के भी हौसले को प्रणाम करना चाहता हूं, जिसने खबर को विस्‍तार से प्रकाशित किया है। बड़े-बड़े अखबारों की हिम्‍मत इस खबर को छापने में पस्‍त हो गई।

Wednesday, December 2, 2015

पीएफ निकालने के लिए नियोक्ता से सत्यापन जरूरी नहीं

ईपीएफओ ने कर्मचारियों को भविष्य निधि से रकम निकालने के मामले में बड़ी राहत दे दी है। पीएफ दावों के ऑनलाइन निपटारे की दिशा में आगे बढ़ते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने नई व्यवस्था की है। पैसा निकालने के लिए कर्मचारी सीधे ईपीएफओ को अर्जी दे सकेंगे। अब तक कर्मचारियों को मौजूदा या पूर्ववर्ती नियोक्ता को इसके लिए आवेदन करना पड़ता था।
इसके फॉर्म पर नियोक्ता का सत्यापन अनिवार्य था। ईपीएफ ने यह व्यवस्था बदल दी है। यूएएन धारकों को सुविधा बगैर नियोक्ता के सत्यापन के पैसा निकालने की सुविधा उन सभी सदस्यों को मिलेगी, जिन्हें यूनिवर्सल (या पोर्टेबल पीएफ) अकाउंट नंबर (यूएएन) मिल चुका है और जिन्होंने बैंक खाते व आधार नंबर जैसी केवाईसी का ब्योरा ईपीएफ को दे दिया है।
ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त केके जालान ने बताया कि सीधे संगठन को भुगतान के लिए अर्जी दायर करने की इजाजत ऑनलाइन आवेदन की दिशा में बड़ा कदम है। उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में सदस्यों को ऑनलाइन पीएफ निकालने की सुविधा मिल सकेगी।
फॉर्म 19, फॉर्म 1 ओसी भरने होंगे
जालान ने बताया कि जिन ईपीएफ सदस्यों के यूएएन नंबर एक्टिवेट हो गए हैं, वे जल्द भुगतान के लिए फॉर्म 19, फॉर्म 1 ओसी और फॉर्म 31 भरकर सीधे भविष्य निधि आयुक्त को बगैर नियोक्ता के सत्यापन के आवेदन सौंप सकेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
2.13 करोड़ यूएएन एक्टिवेट
ईपीएफओ की वेबसाइट के अनुसार 2.13 करोड़ सदस्यों ने अपने यूएएन नंबर एक्टिवेट कर लिए हैं। संगठन ने अब तक 5.65 करोड़ यूएन नंबर आवंटित कर दिए हैं।

Monday, November 30, 2015

स्‍मार्टफोन चार्ज करने की झंझट खत्‍म करेगा नया टचस्‍क्रीन

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने नई तरह के टचस्‍क्रीन मटेरियल को खोजा है जो सूर्य की सीधी रोशनी में उच्‍च दृश्‍यता वाली है और इसे चलने के लिए काफी कम पावर की आवश्‍यकता है।
नये मटेरियल की क्षमता देखने के लिए कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स में कुछ बड़े प्‍लेयर्स के साथ टीम अभी भी बात-चीत कर रही है कि यह नया मटीरियल अगले कुछ सालों में वर्तमान के एलसीडी टचस्‍क्रीन की जगह ले सकता है या नहीं। बॉडी टेक्‍नोलॉजीज द्वारा विकसित, नयी टेक्‍नोलॉजी कंज्‍यूमर्स को उनके स्‍मार्टफोन के प्रतिदिन के चार्जिंग की समस्‍या से निजात दिला सकती है।
एक रिसर्चर पिमैन होसैनी ने कहा, ‘हम नए बाजार का निर्माण कर सकते हैं। आपको प्रत्‍येक रात को स्‍मार्टवॉच को चार्ज करना पड़ता है लेकिन अब आपके पास ऐसा स्‍मार्टवॉच या स्‍मार्ट ग्‍लास होगा जिसे अधिक पावर की जरूरत न हो, आप इसे हफ्ते में एक बार चार्ज करेंगे।‘शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका अल्‍ट्रा-थिन डिस्‍प्‍ले मटेरियल सीधी सूर्य की रोशनी में भी काफी अच्‍छे रेज्‍योलूशन के साथ बेहतर रंग दिखाता है।


Saturday, November 28, 2015

नाइट मुफ्त कॉलिंग के नाम पर बीएसएनएल का ग्राहकों के साथ धोखा

बीएसएनएल बेसिक फोन उपभोक्ताओं के साथ धोखा कर रहा है।  रातभर निशुल्क कॉलिंग  के नाम पर भी बिल में जीरो बताकर कॉल का चार्ज लगा रहा था, अब खुले आम इसका चार्ज मांग रहा है। 
यह प्लान अब 220 रुपये महंगा हो गया है। ग्राहकों को अब 1980 रुपये की वार्षिक दर पर इस प्लान का लाभ मिलेगा। निगम अफसरों ने इसे लागू कर दिया है। भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड ने बेसिक फोन उपभोक्ताओं को रात में निशुल्क कॉलिंग की सुविधा का लाभ देने का निर्णय लिया था। उपभोक्ताओं को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पहले 1760 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से जमा करने पड़ते थे। बीएसएनएल का यह प्लान लागू होते ही उपभोक्ताओं ने नए बेसिक फोन कनेक्शन करा लिए थे। पर अब इस प्लान की नई दरें निर्धारित कर दी गई हैं। उपभोक्ताओं को अब प्रति वर्ष 220 रुपये अधिक खर्च करने पड़ेंगे। 1980 रुपये वार्षिक दर जमा कर उपभोक्ता रात में निशुल्क कॉलिंग का लाभ उठा सकेंगे। पहले इस प्लान के अंतर्गत ग्राहक रात में 9 बजे से सुबह 7 बजे तक ऑल इंडिया में किसी भी फोन पर निशुल्क कॉलिंग कर सकते थे।




Friday, November 20, 2015

पत्रकारों के वेतन में 65 फीसदी वृद्धि की सिफारिश

 पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए गठित मजीठिया वेज बोर्ड ने अखबारी और एजेंसी कर्मियों के लिए 65 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि की सिफारिश की है तथा साथ में मूल वेतन का 40 प्रतिशत तक आवास भत्ता और 20 प्रतिशत तक परिवहन भत्ता देने का सुझाव दिया है।
न्यायमूर्ति जी आर मजीठिया के नेतृत्व वाले वेतन बोर्ड ने शुक्रवार को यह भी सिफारिश की कि नए वेतनमान जनवरी 2008 से लागू किए जाएं। बोर्ड ने पहले ही मूल वेतन का 30 प्रतिशत अंतरिम राहत राशि के रूप में देने का ऐलान कर दिया था। मजीठिया ने केंद्रीय श्रम सचिव पी के चतुर्वेदी को रिपोर्ट सौंपी। चतुर्वेदी ने आश्वासन दिया कि सरकार इस रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद इसे जल्द से जल्द लागू कराने का प्रयास करेगी। बोर्ड ने 35 प्रतिशत वैरिएबल पे देने की सिफारिश की है। समाचार पत्र उद्योग के इतिहास में किसी वेतन बोर्ड ने इस तरह की सिफारिश पहली बार की है।
मजीठिया वेतन बोर्ड ने पत्रकारों और अन्य अखबारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाकर 65 साल करने, महंगाई भत्ते के मूल वेतन में शत प्रतिशत न्यूट्रलाइजेशन और विवादों के निपटारे के लिए स्थायी न्यायाधिकरण बनाने की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति मजीठिया ने संवाददाताओं से कहा कि इस बार की रिपोर्ट में सबसे निचले ग्रेड के लिए भी अच्छे वेतन की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि नए फार्मूले के अनुसार पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों का मूल वेतन उसके वर्तमान मूल वेतन और डीए में, 30 प्रतिशत अंतरिम राहत राशि और 35 प्रतिशत वैरिएबल पे को जोडकर तय किया गया है। महंगाई भत्ता मूल वेतन में शत प्रतिशत 'न्यूट्रलाइजेशन' के साथ जुड़ेगा। ऐसा अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों के मामले में होता आया है।
वेतन बोर्ड ने 60 करोड़ रुपये या इससे अधिक के सकल राजस्व वाली समाचार एजेंसियों को शीर्ष श्रेणी वाले समाचार पत्रों के साथ रखा है। इस प्रकार समाचार एजेंसी पीटीआई शीर्ष श्रेणी में जबकि यूएनआई दूसरी श्रेणी में रखी गई है। मजीठिया बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार आवास भत्ता एक्स श्रेणी के शहरों के लिए मूल वेतन का 40 प्रतिशत होगा, जो दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूर, हैदराबाद, चंडीगढ़, अहमदाबाद, कानपुर, लखनऊ और नागपुर पर लागू होगा। वाई श्रेणी के शहरों के लिए यह मूल वेतन का 30 प्रतिशत होगा। वाई श्रेणी के शहरों में आगरा, अजमेर, अलीगढ़, इलाहाबाद, अमृतसर, बरेली, बीकानेर, भोपाल, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जमशेदपुर, कोच्चि, कोटा, मदुरै, मेरठ, पटना, पुणे, रायपुर, राजकोट, रांची, श्रीनगर, सूरत, तिरूवनंतपुरम, बड़ोदरा, वाराणसी, विशाखापट्टनम, मंगलौर, पुडुचेरी, धनबाद, देहरादून, जम्मू, जामनगर आदि शामिल हैं। शेष अन्य शहरों को जेड श्रेणी में रखा गया है, जहां के कर्मचारियों को एचआरए मूल वेतन का 20 प्रतिशत मिलेगा।
वेतन बोर्ड ने वार्षिक वेतन बढ़ोतरी की दर पहली से चौथी श्रेणी के लिए छह प्रतिशत, पांचवीं और छठीं के लिए पांच प्रतिशत, सात से नौ के लिए चार, दस से 11 के लिए तीन प्रतिशत तय की है। मजीठिया बोर्ड ने जनवरी 2008 में अंतरिम राहत घोषित की थी और इसी तारीख से कर्मियों को एरियर मिल सकेगा। इसके अलावा बोर्ड ने एक्स श्रेणी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत परिवहन भत्ता, वाई श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत और जेड श्रेणी के लिए पांच प्रतिशत परिवहन भत्ता देने की सिफारिश की है।
बोर्ड ने रात्रि भत्तों में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे पहली और दूसरी श्रेणी के लिए सौ रुपये, तीसरी और चौथी के लिए 75 रुपये तथा पांचवीं से 11श्रेणी के लिए 50 रुपये तय कर दिया है। इसके अलावा 1000 रुपये मासिक 'कठिनाई भत्ता' निर्धारित किया है। एलटीए दो साल में एक बार मिलेगा और मूल वेतन के बराबर होगा। बोर्ड ने मेडिकल भत्ते में बढ़ोतरी करते हुए इसे पहली और दूसरी श्रेणी के लिए 1000 रुपये मासिक, तीसरी और चौथी श्रेणी के लिए 500 रुपये मासिक किया है। जिन लोगों पर ईएसआई लागू है, वे ये भत्ता हासिल नहीं कर सकेंगे। बोर्ड ने एरियर का भुगतान तीन समान किस्तों में करने की सिफारिश की है।
इस बीच कांफेडरेशन आफ न्यूजपेपर एंड न्यूजएजेंसी इम्प्लाइज आर्गेनाइजेशन्स के महासचिव एम एस यादव ने कहा कि वेतन बोर्ड अध्यक्ष ने श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य कर्मचारी कानून में प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखते हुए बोर्ड सदस्यों को कई महत्वपूर्ण मसलों पर वोटिंग नहीं करने दिया लेकिन 'इस बात की खुशी है कि कई महत्वपूर्ण मांगों पर बोर्ड ने सकारात्मक फैसला लिया है और दीर्घकाल में इससे कर्मचारियों को फायदा होगा। रिटायरमेंट आयु बढ़ाना, वैरिएबल पे और परिवहन भत्ता इनमें से एक है।' कान्फेडरेशन में शामिल इंडियन जर्नलिस्टस यूनियन के अध्यक्ष सुरेश अखौरी, नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स-आई के वरिष्ठ नेता डॉ. नंद किशोर त्रिखा, आल इंडिया न्यूजपेपर इम्प्लाइज फेडरेशन के महासचिव मदन तलवार, फेडरेशन आफ पीटीआई इम्प्लाइज यूनियन्स के अध्यक्ष जान सी गोन्जाल्विस, यूएनआई वर्कर्स यूनियन के नेता एम एल जोशी ने वेतन बोर्ड को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी।
31 दिसंबर 2010 को समाचार एजेंसी भाषा द्वारा जारी किया गया समाचार-

मजीठिया : मीडियाकर्मी एरियर के साथ अंतरिम राहत भी करें क्‍लेम

हममें से कई साथियों ने मजीठिया वेतनमान के अनुसार अपने एरियर के क्‍लेम उप श्रम आयुक्‍त या संबंधित अदालतों में लगा दिए हैं या लगाने जा रहे हैं। साथियों एरियर का क्‍लेम बनाते हुए आप 30 प्रतिशत के अंतरिम राहत को जोड़ना ना भूलें। अंतरिम राहत 1 जनवरी 2008 से 10 नवंबर 2011 तक के कार्यकाल पर लागू होंगी। अंतरिम राहत की राशि पर आप 24 प्रतिशत तक का साधारण या सालाना चक्रवृद्वि ब्‍याज मांग सकते हैं। इसके अलावा चक्रवृद्वि ब्‍याज दर की गणना प्रतिदिन या महीने के अनुसार भी की जा सकती है।

कौन हैं हकदार

1.   जिन संस्‍थानों में मजीठिया लागू नहीं किया गया और अंतरिम राहत भी नहीं दी गई।
2.   जिन संस्‍थानों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मजीठिया वेतनमान तो लागू कर दिया, परंतु वेजबोर्ड लागू करने से पहले अंतरिम राहत नहीं दी थी।

पत्रकारों को आनलाइन रियायती रेलवे टिकट उललब्ध हों

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने  राज्यपाल श्र रामनाईक से मुलाकात कर मान्यता प्राप्त संवाददाताओं को मिल रही रियायती रेल टिकट की सुविधा इंटरनेट से भी उपलब्ध कराने के लिए रेलमंत्री से पहल करने की मांग की। राज्यपाल के माध्यम से रेलमंत्री से मांग की गई है कि पत्रकारों को  रेल किराए में पचास प्रतिशत की उपलब्ध छूट को गरीबरथ व दूरंतों ट्रेनों में भी अनुमन्य कराया जाए। मान्यता समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्र व सचिव नीरज श्रीवास्तव के नेतृत्व मे समिति के शिष्टमंडल ने पत्रकारीय कार्यों के लिए अचानक की जाऩे वाली रेलयात्राओं में आ रही कठिनाइयों की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए यह मांग की कि चलती ट्रेन में भी पत्रकारों को एक सहयोगी के साथ रियायती टिकट जारी हो सकें। राज्यपाल से वार्ता के दौरान मीडिया में आए परिवर्तनों का उल्लेख हुआ और इसके मद्देनजर श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम, 1955 की परिधि में इलेक्ट्रानिक चैनलों, वेब पोर्टलों, मोबाइल न्यूज नेटवर्क जैसे नव समाचार माध्यमों में कार्यरत पत्रकारों व मीडियाकर्मियों को भी सम्मिलित कर उन्हें सेवा सुरक्षा और कार्य दशाएं निर्धारित करने के लिए भारत सरकार से यथोचित संशोधन करने की मांग भी की गई।

Tuesday, November 17, 2015

इन्श्योरेंस क्लेम में फ्रॉड पड़ेगा भारी

इन्श्योरेंस क्लेम लेने में फ्रॉड करना भारी पड़ सकता है। कंपनियां अब बैंकों की तरह सिस्टम डेवलप करने के करीब पहुंच गई हैं। इसके तहत अगर किसी बीमाधारकया उसके नॉमिनी ने क्लेम लेने में फ्रॉड किया, तो उन्हें इन्श्योरेंस कंपनियां ब्लैकलिस्ट कर सकती है। इसके अलावा जिन कस्टमर का रिकार्ड अच्छा होगा, उनको कंपनियां सस्ते इन्श्योरेंस का फायदा देंगी। इसके लिए जल्द ही बैंकों के क्रेडिट इनफार्मेशन ब्यूरो की तरह इन्श्योरेंस सेक्टर का सिस्टम काम करना शुरू करेगा। क्या है तैयारी इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार जिस तरह बैंक किसी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसका क्रेडिट रिकार्ड देखते है , उसी तरह का सिस्टम अब इन्श्योरेंस सेक्टर में डेवलप किया जा रहा है। जहां पर किसी व्यक्ति का इन्श्योरेंस करने से पहले उसकी पूरी हिस्ट्री देखी जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा, कि आवेदक का प्रीमियम देने का रिकार्ड कैसा रहा है। इसके अलावा उसका क्लेम रिकार्ड कैसा है। इसके आधार पर उसकी रेटिंग होगी। जिस व्यक्ति का रिकार्ड अच्छा होगा, उसे न केवल इन्श्योरेंस आसानी से मिलेगा, बल्कि कंपनियां उससे प्रीमियम भी कम लेंगी। जिस व्यक्ति का रिकार्ड अच्छा होगा, उसे न केवल इन्श्योरेंस आसानी से मिलेगा, बल्कि कंपनियां उससे प्रीमियम भी कम लेंगी। वहीं जिसका रिकार्ड अच्छा नहीं है  उसे कंपनियां ब्लैक लिस्ट भी कर सकती हैं। जैसे की अभी लोन देते वक्त बैंक करते हैं। 

Monday, November 9, 2015

सरकारी सिक्कों से बाजार के सिक्के सस्ते

धनतेरस के शुभ मौके पर सोने व चांदी के सिक्के कोटा सर्राफा बाजार में सरकार एजेंसियों के मुकाबले कम दाम पर बेचे जा रहे हैं। सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक सोने व चांदी के भाव अभी गत तीन-चार महीनों के न्यूनतम स्तर पर हैं जो खरीदारी के लिए काफी अनुकूल है। शनिवार को सोने का भाव 25900 रुपये प्रति 10 ग्राम तो चांदी 35500 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। 
कोटा  के सर्राफा बाजार कूचां महाजनी में सोने के 5 ग्राम के सिक्के 13700 रुपये में बेचे जा रहे हैं तो 10 ग्राम के सोने के सिक्के के दाम 26700 रुपये बताए गए। ये सिक्के हॉलमार्क 999 है। 
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से जारी किए गए 5 ग्राम व 10 ग्राम के अशोक चक्र वाले सोने के सिक्के की बिक्री सरकारी एजेंसी क्रमश: 14,530 रुपये व 28,755 रुपये में की जा रही है। इस सिक्के में एकतरफ महात्मा गांधी की तस्वीर है तो दूसरी तरफ अशोक चक्र है। सुरक्षा के लिहाज से इन सिक्कों में एक अलग प्रकार की लाइनिंग दी गई है ताकि कोई नकल नहीं हो सके। एमएमटीसी के 5 ग्राम के सिक्के 14,165 रुपये में बेचे जा रहे हैं।एमएमटीसी के 10 ग्राम के सिक्के 28,220 रुपये में उपलब्ध है। एमएमटीसी ने अधिक से अधिक लोगों को धनतेरस के मौके पर सोने के सिक्के बेचने के लिए 0।5 ग्राम व 1,2 ग्राम के सिक्कों को भी बाजार में उतारा है। 0.5 ग्राम के सिक्के के दाम 1445 रुपये, 1 ग्राम के 2865 रुपये तो 2 ग्राम के सिक्कों के दाम 5700 रुपये रखे गए हैं। 100 ग्राम के सोने के सिक्के का भाव 275630 रुपये है। एमएमटीसी चांदी के 10 ग्राम के सिक्के 540 रुपये, 20 ग्राम के सिक्के 1050 रुपये तो 50 ग्राम के सिक्के 2520 रुपये में बेच रही है। 
सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक अब तक सर्राफा की बिक्री सुस्त रही है, लेकिन उन्हें धनतेरस से दीपावली के दौरान बिक्री में बढ़ोतरी का अनुमान है। हालांकि सरकारी एजेंसी एमएमटीसी ने पिछले दस दिनों में देशभर में लगी अपनी प्रदर्शनी में लगभग 30 करोड़ रुपये की बिक्री की है और पिछले साल के मुकाबले एजेंसी को बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

Saturday, November 7, 2015

कन्फर्म टिकट रद्द करना अब महंगा पड़ेगा

रेलवे ने टिकट रद्द कराने पर काटे जाने वाले रिफंड शुल्क में अनापशनाप बढ़ोतरी कर दी है। अब आरक्षित श्रेणी के कंफर्म टिकट रद्द कराने पर दोगुना शुल्क कटेगा। यदि ट्रेन छूटने में चार घंटे से कम समय बचा है तो कंफर्म टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। नए नियम 12 नवंबर से लागू होंगे।
द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित, आरएसी व वेटलिस्ट टिकटों को रद्द कराने पर अब 15 रुपये के स्थान पर 30 रुपये, जबकि द्वितीय (रिजर्व) व अन्य श्रेणियों के टिकटों पर 30 रुपये के स्थान पर 60 रुपये रिफंड शुल्क के तौर पर काटे जाएंगे। कंफर्म आरक्षित टिकटों के मामले में ट्रेन प्रस्थान समय से 48 घंटे पहले टिकट रद्द कराने पर फर्स्ट एसी में 120 रुपये की जगह 240 रुपये, सेकंड एसी में 100 रुपये की जगह 200 तथा थर्ड एसी में 90 रुपये की जगह 180 रुपये रिफंड चार्ज वसूला जाएगा।इसी प्रकार गैर वातानुकूलित सेकंड क्लास स्लीपर का कंफर्म टिकट रद्द कराने पर 60 रुपये की जगह 120 रुपये, जबकि सामान्य सेकंड क्लास का टिकट रद्द कराने पर 30 की जगह 60 रुपये रिफंड शुल्क कटेगा। ट्रेन छूटने के 48 घंटे पहले से लेकर 12 घंटे पहले तक कंफर्म टिकट रद्द कराने पर किराये का 25 फीसद अथवा उपरोक्त नियमानुसार न्यूनतम राशि (जो अधिक हो) रिफंड के रूप में काटी जाएगी। अभी यह नियम 48 घंटे पहले से छह घंटे पहले तक रद्द कराने पर लागू है।
इसी प्रकार ट्रेन छूटने के 12 घंटे पहले से लेकर चार घंटे पहले तक कंफर्म टिकट रद्द कराने पर उपरोक्त नियमानुसार न्यूनतम अथवा किराये की 50 फीसद राशि (जो अधिक हो) काटी जाएगी। इसके बाद कोई रिफंड नहीं मिलेगा। अभी यह नियम छह घंटे पहले से दो घंटे पहले तक के रद्द्दीकरण पर लागू है। यानि ट्रेन छूटने के दो घंटे बचे हैं और आप कंफर्म टिकट रद्द कराते हैं तो अभी कुछ रिफंड मिलता है। अब वह नहीं मिलेगा। रिफंड के लिए अब ट्रेन छूटने के चार घंटे पहले ही टिकट रद्द कराना होगा।
इसी प्रकार आंशिक रूप से कंफर्म टिकटों के मामले में ट्रेन छूटने के एक घंटे बाद तक ही रिफंड लिया जा सकेगा। अभी दो घंटे बाद तक यह सुविधा है। आरएसी और वेटलिस्ट टिकटों में भी ट्रेन छूटने के एक घंटे बाद तक ही रिफंड (क्लरिकल चार्ज काटने के बाद) मिलेगा। उसके बाद नहीं। अभी तीन घंटे बाद तक रिफंड मिलता है। रेल मंत्रालय के अनुसार जिन स्टेशनों पर कार्य के घंटों के बाद रिजर्व (पीआरएस) या अनरिजर्व (यूटीएस) या करेंट काउंटर खुले नहीं होंगे, वहां चुनिंदा यूटीएस काउंटर पर अनरिजर्व और रिजर्व दोनों तरह के टिकटों का रिफंड लिया जा सकेगा।

Friday, November 6, 2015

सीएफसीएल लगाएगी कोटा में एक और यूरिया प्लांट

दिनेश माहेश्वरी 
कोटा।  गढ़ेपान में चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लि . (सीएफसीएल) एक और यूरिया प्लांट  लगाएगी। इस साइट पर कंपनी के 2 प्लांट पहले से चल रहे हैं। नए प्लांट पर कंपनी 5940 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसकी उत्पादन क्षमता 1.34 मिलियन मीट्रिक टन सालाना होगी। दो दिन पहले दिल्ली में हुई कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी दे दी गई है। 
नए और पुराने प्लांट मिलाकर हर साल 3.34 मिलियन मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन करेंगे, जो देश में एक साइट पर कहीं भी नहीं है। ऐसे में कोटा जिला देश का सबसे बड़ा यूरिया उत्पादक हो जाएगा। उच्च तकनीक पर बनने वाले नए प्लांट के लिए कंपनी 4950 करोड़ रुपए उधार लेगी, जबकि शेष राशि आंतरिक सोर्सेज से जुटाएगी। कंपनी ने 3 नवंबर को ही हुई बैठक के तत्काल बाद बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर इसका आफिशियल कॉर्पोरेट अनाउंसमेंट भी कर दिया है। आगामी एक साल में इसका काम शुरू होने के आसार है। 
सीएफसीएल सबसे बड़ी यूरिया उत्पादक कंपनी
सीएफसीएल प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी यूरिया उत्पादक कंपनी है। सरकारी क्षेत्र की कंपनियां प्रोडक्शन के मामले में जरूर सीएफसीएल से आगे हैं। लेकिन सरकारी सेक्टर में भी किसी कंपनी की एक साइट पर इतनी उत्पादन क्षमता नहीं है। देश को हर साल करीब 30 मिलियन मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है। अब देश की जरूरत का 11.13 प्रतिशत यूरिया गढ़ेपान में बन जाएगा। गढ़ेपान में वर्तमान में सीएफसीएल के दो प्लांट हैं। पहला प्लांट (गढ़ेपान-1) वर्ष 1994 और दूसरा प्लांट (गढ़ेपान-2) वर्ष 1999 में शुरू किया गया था। दोनों प्लांट 1-1 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता वाले हैं। वर्तमान में कंपनी देश के करीब 11 राज्यों में यूरिया सप्लाई करती है। 
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर 
नएप्लांट के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कंपनी सूत्रों ने बताया कि एक प्लांट से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कई लोगों को रोजगार मिलता है। सीधे तौर पर प्लांट में तो करीब 100 लोगों को ही काम मिलता है, लेकिन अन्य लेबर वर्क्स में सैकड़ों लोगों की जरूरत और होती है। कोटा में अरसे बाद कोई कंपनी बड़ा निवेश करने को सहमत हुई है। बीते करीब एक दशक का यह बड़ा निवेश माना जा रहा है। 

Thursday, November 5, 2015

दाल महंगी तो कोटा की कचौरी हो गई छोटी

दिनेश माहेश्वरी | कोटा
दालें महंगी होने का असर अब कोटा की कचौरी पर भी दिखने लगा है। व्यापारियों ने दाम तो नहीं बढ़ाए, हां वजन जरूर कम कर दिया। अब ज्यादातर दुकानों पर साइज छोटी करके कचौरी 60 की जगह 50 ग्राम की बनाई जा रही है, जो 5 से 10 रुपए प्रति नग तक बिक रही है। 
कचौरी का वजन विक्रेताओं ने इस तरह कम किया कि रोज कचौरी खाने वालों को भी एकदम से उसका पता नहीं लग पाता। लेकिन, गौर से देखें तो कचौरी साइज में छोटी नजर आएगी। कुछ नामी विक्रेताओं से जब कचौरी की साइज छोटी होने के बारे में भास्कर ने पूछा तो पहले तो उन्होंने मना कर दिया। परन्तु आखिर उनकी जुबान से निकल ही गया कि हां दाल की मात्रा कम कर दी है। दूसरे ने कहा कि 60 ग्राम की जगह 50 से 55 ग्राम की हो गई है।रतलामी कचौरी वाले रूपचंद जैन और रतन कचौरी वाले मनोज जैन का तर्क है कि कचौरी में काम आने वाली उड़द मोगर दाल 80 रुपए किलो की जगह 160 से 170 रुपए किलो पड़ रही है। चना दाल 40 की जगह 60 से 65 रुपए किलो हो गई है। ऐसे में कचौरी विक्रेताओं का मार्जिन भी घट रहा है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए ही कचौरी के दाम नहीं बढ़ाकर वजन कम किया है। एक दशक पहले तक कचौरी 80 से 85 ग्राम तक की होती थी, किंतु जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई, कचौरी का साइज घटने के साथ दाम भी बढ़ गए। वर्तमान में शहर के नामी कचौरी विक्रेता 7 से लेकर 10 रुपए प्रति नग की दर पर कचौरी बेच रहे हैं। जबकि छोटे दुकानदार 5 से 6 रुपए में उनसे बड़ी कचौरी बेच रहे हैं। बड़े दुकानदारों का दावा है कि वे मूंगफली के तेल में बनाते हैं, जबकि छोटे दुकानदार सोया रिफाइंड में। इसलिए उनके यहां दाम ज्यादा हैं। 
एक कचौरी पर कितनी लागत 
कुछछोटे कचौरी विक्रेताओं का कहना है कि एक कचौरी की लागत 3.50 से 4 रुपए आती है। दुकानदार उसे 5 से लेकर 10 रुपए तक में बेचते हैं। मूंगफली तेल का तेल फिलहाल 1500 से 1600 रुपए का टिन है। 
नयापुरा की एक दुकान पर बिकती कचौरी। 
रोजाना 5 लाख कचौरी की खपत 
शहरमें छोटे-बड़े सभी दुकानदार मिलकर कम से कम पांच लाख कचौरी रोजाना बेचते हैं। समोसे की बिक्री अलग है। अगर केवल कचौरी की बिक्री का आंकड़ा निकालें तो कम से कम 35 से 40 लाख रुपए रोजाना का बिजनेस है। 
विधानसभा,संसद और विदेशों तक मांग : कचौरीविक्रेताओं के अनुसार कोटा कचौरी का नाम संसद तक फेमस है। यहां के जनप्रतिनिधि कोटा की बनी कचौरियां लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हैं। यहां तक कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी तक यहां की कचौरी का स्वाद चख चुके हैं। यहां के व्यक्ति विदेश में जाकर जॉॅब करते हैं, लेकिन जब आते हैं तो 200 से 300 कचौरी एक साथ पैक कराकर अपने साथ ले जाते हैं। 

Tuesday, November 3, 2015

पासवर्ड भूल गए तो इस तरह ओपेन करें फोन

अगर आप कभी गलती से अपने एंड्रॉयड डिवाइस का पिन, पासवर्ड या पैटर्न लॉक भूल जाएं तो आपको लग सकता है कि ये काफी परेशानी की बात है। लेकिन कई ऐसे तरीके हैं जिनको अपनाने पर आपका फ़ोन काम कर सकता है। सिक्योरिटी के लिहाज़ से ये सुनने में आपको खतरनाक लग सकता है पर ऐसा करना संभव है। इसके कुछ तरीकों के बारे में जानिए...नए एंड्रॉयड टैबलेट और स्मार्टफोन से जुड़ी 'एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर' नाम की एक सर्विस होती है। अगर आप अपने गूगल अकाउंट से लॉग्ड-इन हैं, तो किसी भी डिवाइस से इस सर्विस का फायदा उठा सकते हैं। बस अपने गूगल अकाउंट से लॉग इन कीजिए और शुरू हो जाइए।एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर' पर लॉग इन करने के बाद आपकी स्क्रीन पर जो 'लॉक' बटन है उसे क्लिक करने पर आपको नया पासवर्ड देना पड़ेगा। ये पुराने पासवर्ड को मिटा कर नया पासवर्ड आपके अकाउंट के नाम कर देगा। उसके बाद एक बार फिर लॉक बटन पर क्लिक कर दीजिए।अगर आपके पास सैमसंग फ़ोन है तो 'फाइंड माई मोबाइल की मदद ले सकते हैं। अपने सैमसंग अकाउंट से लॉग इन कीजिए और स्क्रीन के बाईं तरफ 'लॉक माई स्क्रीन' पर क्लिक कीजिए।
उसके बाद अपना नया पिन डाल दीजिए और स्क्रीन के निचले हिस्से में 'लॉक' पर क्लिक कर दीजिए। उसके चंद मिनट के अंदर आपके पुराने पासवर्ड या पिन की जगह नया पिन काम करने लगेगा। लेकिन अगर आपने सैमसंग अकाउंट सेट अप नहीं किया है तो ये तरीका कामयाब नहीं होगा। 
एक और विकल्प हो सकता है 'फॉरगॉट पैटर्न' इस्तेमाल करना। ये एंड्रॉयड 4.4 या उससे पहले के स्मार्टफोन पर काम करेगा।
पांच बार कोशिश करने के बाद आपके स्क्रीन पर लिखा एक मैसेज आएगा जो कहेगा 'ट्राई अगेन इन 30 सेकंड्स'। उसी समय नीचे आपको लिखा दिखेगा 'फॉरगॉट पैटर्न?' वहां पर अपने गूगल अकाउंट के बारे में जानकारी देकर लॉग-इन कीजिए। उसके बाद गूगल आपके ईमेल पर आपका अन-लॉक पैटर्न भेज सकता है या आप उसी समय नया पैटर्न बना सकते हैं।अगर आप चाहें तो अपनी पासवर्ड फाइल को डिलीट कर सकते हैं और उसके बाद स्मार्टफोन को एक्सेस करना मिनटों का काम होगा। अगर आपके फोन पर पहले से USB डिबगिंग एनेबल किया हुआ है, तो ही ये काम करेगा। अपने कंप्यूटर को स्मार्टफोन से डेटा केबल के जरिए कनेक्ट कीजिए।

Saturday, October 31, 2015

पहचानिए यह कार्ड, असली है या नकली पत्रकार

पत्रकारिता का ऐसा ग्लैमर कि लोग फर्जी आईडी बनाकर फेसबुक पर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं।  इस कार्ड की असलियत देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह असली है या नकली।  

Friday, October 30, 2015

आंखों के इशारे समझेगा अब कम्‍प्‍यूटर

अंगुलियों के इशारे पर काम करने वाला कम्‍प्‍यूटर आने वाले दिनों में आंखों का इशारा और चेहरे के भाव भी समझने लगेगा। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिसके जरिये कम्‍प्‍यूटर बिना कुछ बोले या छुए सिर्फ हाव-भाव और चेहरे के इशारे पर काम करने में सक्षम हो सकेंगे।
आमतौर पर क्लिक, टाइपिंग और कुछ सॉफ्टवेयर के जरिये बोलकर कम्‍प्‍यूटर पर काम किया जाता है। शोधकर्ता कम्‍प्‍यूटर से संवाद के तरीकों को इससे आगे ले जाने के प्रयास में हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा, "दो व्यक्ति आपस में मुस्कुराकर, भौंहें चढ़ाकर, इशारा करते हुए और कई तरह की भाषाओं में संवाद करते हैं। हमारे प्रोजेक्ट का उद्देश्य मनुष्य और कम्‍प्‍यूटर के बीच संवाद में भी इसी तरह का क्रांतिकारी परिवर्तन लाना है।"कोलोरेडो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रूस ड्रेपर ने कहा, "कम्‍प्‍यूटर से संवाद का तरीका बहुत सीमित है। शुरुआती दौर में जब कम्‍प्‍यूटर सिर्फ एक मशीन की तरह थे, तब यह एकतरफा संवाद उचित था।आज की तारीख में कम्‍प्‍यूटर एक सहयोगी की भूमिका में आ चुका है और इस कारण मनुष्य और कम्‍प्‍यूटर के बीच भी दोतरफा संवाद स्थापित होना चाहिए।शोधकर्ता इसके लिए हाव-भाव और इशारों के अर्थ को लेकर लाइब्रेरी तैयार कर रहे हैं। इस लाइब्रेरी के जरिये ही कम्‍प्‍यूटर इशारों का अर्थ समझकर काम को अंजाम देने में सक्षम हो सकेगा।

बोनस पर सभी पत्रकारों का हक

अब तक सिर्फ दीपावली पर मिठाई का डिब्बा या कभी वो भी नहीं को लेकर संतुष्ठ होने वाले देश भर के पत्रकारों के लिये एक अच्छी खबर आयी है। बोनस पर भी पत्रकारों का हक है । मुंबई के कामगार आयुक्त कार्यालय के राज्य जनमाहिती अधिकारी ने मुंबई के पत्रकार शशिकांत सिंह द्वारा ११ सितंबर २०१५ को आरटीआई के जरिये मांगी गयी एक सूचना पर जो जानकारी उपलब्ध करायी है उसमें यह पुरी संभावना बनती है कि पत्रकारों का भी बोनस पर हक है। पत्रकार शशिकांत सिंह ने कामगार आयुक्त कार्यालय से पूछा था कि पत्रकारों के लिये बोनस का क्या प्रावधान है इसपर १२ अक्टूबर २०१५ को डिस्पैच किये गये मुबई के कामगार आयुक्त के राज्य जनमाहिती अधिकारी ने सूचना उपलब्ध करायी है कि केन्द्र सरकार के बोनस प्रदान अधिनियम १९६५ में बोनस बावत सभी सूचना उपलब्ध है। कृपया बोनस प्रदान अधिनियम १९६५ के नियमों का अवलोकन करें। 
केन्द्र सरकार के इस बोनस प्रदान अधिनियम का अध्ययन करने पर जो जानकारी आयी है वह एक अच्छी खबर है । आप भी इस केन्द्र सरकार के इस लिंक का अवलोकन कर सकते हैं जिसकी जानकारी राज्य जनमाहिती अधिकारी ने दी है। 
http://labour.nic.in/contenthi/division/information-on-payment-of-bonushi.php

Tuesday, October 27, 2015

मजीठिया वेज बोर्ड : जानिए नया डीए

साथियों, मजीठिया के अनुसार जुलाई 2015 से दिसंबर 2015 तक का नया डीए 87/167 है। इससे पहले जनवरी 2015 से जून 2015 तक का डीए 80/167 था। सभी ग्रेड के समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में डीए की गणना एक सी होती है। डीए के इस 7 अंक के अंतर से आपके वेतन पर क्‍या फर्क पड़ता है यह हम आपको निम्‍न उदाहरण से बता रहे हैं...
जून 2015
Basic - 20,000 रुपये
DA - 12,934
PF - 4,792
Gross Salary Rs. 61,826
जुलाई 2015
Basic - 20,000 रुपये
DA - 14,066
PF - 4,928
Gross Salary Rs. 63,094
अंतर पड़ा
DA में 1132
PF में 136 रुपये (इसमें कंपनी का PF मिलाकर यह राशि 272 रुपये हो जाएगी।)
Gross Salary में Rs. 1,268
उपरोक्‍त उदाहरण ग्रेड ए और बी के समाचार-पत्रों का है. इसमें VA, HRA, TRA, MED और Night Allowance नहीं दर्शाया है। साथियों, आप इन छोटी-छोटी बातों का भी ध्‍यान रखें, ज्‍यादातर साथी इन मामलों में अति लापरवाह होते हैं और इनको संभाल कर नहीं रखते।
1. सैलरी स्लिप और बैंक स्‍टेटमेंट को संभाल कर रखें।
2. यदि आपको सैलरी स्लिप नहीं मिलती है और वेतन के रुप में चैक मिलता है तो उसकी फोटो कापी करवा कर उसे संभाल कर रखें।
3. वेतन से संबंधित अन्‍य कोई भी दस्‍तावेज।
4. Appointment Letter या ऐसे दस्‍तावेज जो आपको कंपनी का कर्मचारी साबित करते हैं।
5. समय-समय पर होने वाली वेतन बढ़ोतरी या पदो‍न्‍नति से संबंधित दस्‍तावेज।
6. सैलरी स्लिप पर दिखने वाले वेतन के अलावा मिलने वाले लाभ से संबंधित अन्‍य दस्‍तावेज।
7. इनके अलावा भी यदि कोई अन्‍य दस्‍तावेज, जैसे ओवर टाइम, EL encashment आदि से संबंधित।
साथियों हम आपको इसके बारे में इसलिए सावधान कर रहे हैं, क्‍योंकि जब भी आपके यहां मजीठिया लागू होगा, तब यह आपके बेहद काम आएंगे। वो इसलिए की ज्‍यादतर समाचार-पत्र और पत्रिकाएं चोर रास्‍ते से कहां आपके लाभों पर सेंध लगा देंगी यह आपको पता भी नहीं चलेगा। यदि आपके पास अपने पूरे दस्‍तावेज होंगे तो यह उस वक्‍त बेहद काम आएंगे। साथियों, हम आपसे एक बार फि‍र से अनुरोध करते हैं कि कंपनियों के दबाव में आकर किसी भी दस्‍तावेज पर हस्‍ताक्षर नहीं करिए, विशेषतौर पर ब्‍लैंक दस्‍तावेजों पर। कोई भी कंपनी आपको कितना भी तंग कर लें, परंतु मजीठिया वेजबोर्ड के लाभों से वंचित नहीं कर सकती।
मजीठिया के अनुसार नया वेतनमान और एरियर राशि निकालते वक्‍त बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है, इसमें जरा सी चूक आपको कई हजार या लाख रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है। जहां तक हम समझते हैं कुछ मामलों में छोड़ कर इसको निकलवाने की अभी सभी साथियों को जरूरत नहीं है। जिन साथियों को इसकी आवश्‍यकता है वह इसके लिए पीटीआई, टि्ब्‍यून, नवभारत आदि की यूनियनों से मदद ले सकते हैं। यहां पर मजीठिया वेजबोर्ड लागू है। यहां से आपको निस्‍वार्थ भाव से मदद मिल सकती है।

Sunday, October 25, 2015

मजीठिया चाहते सब हैं परन्तु बोलने में भी डरते हैं

आज मीडिया जगत में चहुंओर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लेकर
वाद-प्रतिवाद का माहौल बना हुआ है? सिर्फ अपनी बेड़ियों को ही अपनी नियति मान
चुके समाचार पत्रों के अधिकतर कर्मचारी कभी दबे स्वरों में तो कभी खुले रूप
में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के दिए गए
आदेश ज्यों के त्यों लागू होने को असंभव मानते हैं।
ऐसे लोग यह तर्क देते हैं कि कोई भी सरकार हो, मीडिया मालिकों के खिलाफ जा ही
नहीं सकती। अच्छे दिनों का वादा करके प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में भी हिम्मत नहीं है कि वे सुप्रीम कोर्ट का यह
आदेश लागू करवा सकें क्योंकि जिस दिन उनकी सरकारी मशीनरी यह फैसला लागू करवाने
की कोशिश शुरू कर देगी, उसी दिन से मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जायेगी।
सम्पूर्ण मीडिया मोदी के पीछे पड़ जाएगा और उनकी दुर्गति करके अपनी कठपुतली
सरकार केंद्र में स्थापित करने की मुहिम में जुट जाएगा। यही कारण है कि मोदी
जी इस बारे में कार्रवाई करने की बात तो दूर इस बारे में बोलने की भी भूल नहीं
कर रहे हैं।
तो फिर अगला कदम क्या होगा?
सिर्फ शब्दों व कल्पनाओं के घोड़े दौड़ाने वाले दब्बू व गपोड़ी कहते हैं कि अरे
यार, अख़बारों के मालिक उन लोगों को तो मजीठिया का सम्पूर्ण पैसा दे देंगे जो
मालिकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में न्यायालय की अवमानना का केस कर चुके हैं।
बाकी कर्मचारियों की कायरता तो मालिक लोग पहचान चुके हैं। इसलिए मालिक लोग केस
न करने वाले उन कायरों को छोटा-मोटा हड्डी का टुकड़ा डाल कर उन लोगों से मनचाहा
हलफनामा लिखवाकर अपने करोड़ों रुपए बचा लेंगे।
बहरहाल, धारा 20 जे की आड़ लेने वाले शिखंडी अखबार मालिक भीतरी रूप से डरे हुए
हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भी मालिकों के इस छल के लिए उन्हें जेल अवश्य
भेजेगा। जीत सिर्फ और सिर्फ सत्य की होगी।
अब केस न करने वाले अख़बारी कर्मचारियों की मनःस्थिति का दार्शनिक विवेचन भी कर
लिया जाए- सुप्रीम कोर्ट में अख़बार मालिकों के खिलाफ केस न करने वाले दब्बू कर्मचारी
लोहे की दीवारों में नहीं, लोहे से भी ज्यादा संघातक चित्त की दीवारों में,
विचार की दीवारों में बंद हैं।
हे दब्बुओं, तुम ऊपर से कितने ही स्वतंत्र मालूम पड़ो, लेकिन 20 जे के कागज पर
साइन करवाकर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि तुम्हारे पंख काट दिए गए हैं। उड़ तुम
सकते नहीं। आकाश तुम्हारा तुमसे छीन लिया गया है और ऐसे सुंदर शब्दों की आड़
में छीना गया है कि तुम्हें याद भी नहीं आता। तुम्हारी जंजीरों को तुम्हारा
वैचारिक कारागृह बना दिया गया है। उसके बोझ से तुम दबे जा रहे हो, तुम्हें
बताया गया है कि मालिकों का ज्ञान ही ज्ञान है। वही शास्त्र है, सिद्धांत है।
हे दब्बुओं, यह सारा विराट आकाश तुम्हारा है मगर जीते हो तुम बड़े संकीर्ण आंगन
में। स्वाभिमान में जिसे जीना हो उसे सब जंजीरें तोड़ देनी पड़ती हैं; फिर वे
जंजीरें चाहे सोने की ही क्यों न हों।
ध्यान रखना, लोहे की जंजीरें तोड़ना आसान है, सोने की जंजीरें तोड़ना कठिन है,
क्योंकि सोने की जंजीरें प्रीतिकर मालूम होती हैं, बहुमूल्य मालूम होती हैं।
बचा लेना चाहते हो सोने की जंजीरों को। और जंजीरों के पीछे सुरक्षा छिपी है।
आत्महंता जो पक्षी तुम्हें पींजड़े में बंद मालूम होता है, तुम अगर पींजड़े का
द्वार भी खोल दो तो शायद न उड़े। क्योंकि एक तो न मालूम तुम कितने समय से
पींजड़े के भीतर बंद रहे हो, उड़ने की क्षमता खो चुके हो। क्षमता भी न खोई हो तो
विराट आकाश भयभीत करेगा। क्षुद्र में रहने का संस्कार विराट में जाने से
रोकेगा। तुम्हारे पंख फड़फड़ाएंगे भी तो आत्मा कमजोर मालूम होगी, आत्मा कायर
मालूम होगी।
फिर, अभी जिस पींजड़े में रह रहे हो उस पींजड़े को सुरक्षित भी मानते हो। भोजन
समय पर मिल जाता है, खोजना नहीं पड़ता। कभी ऐसा नहीं होता कि भूखा रह जाना पड़े।
खुला आकाश, माना कि सुंदर है, वृक्ष हरे और फूल रंगीन हैं और उड़ने का आनंद, सब
ठीक, लेकिन भोजन समय पर मिलेगा या नहीं मिलेगा? किसी दिन मिले, किसी दिन न
मिले! असुरक्षा है। फिर कोई दूसरा काम भी तो तुमने नहीं सीखा।
हे दब्बुओं, यह सोच कर पींजड़े में बंद हो कि कोई हमला तो नहीं कर सकता। पींजड़े
में बंद बाहर की दुनिया भीतर तो प्रवेश नहीं कर सकती। पींजड़े के बाहर शत्रु भी
होंगे, बाज भी होंगे, हमला भी हो सकता है, जीवन संकट में हो सकता है। पींजड़े
में सुरक्षा है, सुविधा है। आकाश असुरक्षित है, असुविधापूर्ण है। तुम द्वार भी
खोल दो पींजड़े का तो जरूरी नहीं कि तुम उड़ पाओ।
अखबार मालिक कहते हैं कि मैंने तुम्हारे द्वार खोल रखे हैं लेकिन मैं जानता
हूँ कि तुम नहीं उड़ोगे।
सच तो यह है कि जो तुम्हारी अंतरात्मा को झकझोरता है, तुम्हारे द्वार खोलता है
उससे तुम नाराज हो जाते हो, क्योंकि तुम्हारे लिए द्वार खुलने का अर्थ होता
है: बाहर से शत्रु के आने के लिए भी द्वार खुल गया। तुमने अपनी एक छोटी-सी
दुनिया बना ली है। तुम उस छोटी-सी दुनिया में मस्त मालूम होते हो। कौन विराट
की झंझट ले!
कपड़े के औजारों,
तुम परमात्मा हो, रत्तीभर कम नहीं। लेकिन जरा अपनी स्वतंत्रता को स्वीकार करो।
और मजा यह है कि पक्षियों पर तो पींजड़े दूसरे लोगों ने बनाए हैं, तुम्हारा
पींजड़ा तुमने खुद ही बनाया है। पक्षी को तो शायद किसी और ने बंद कर रखा है;
तुमने खुद ही अपने को बंद कर लिया है। क्योंकि तुम्हारा पींजड़ा ऐसा है, तुम
जिस क्षण तोड़ना चाहो टूट सकता है।
तुम्हारी अंतर्चेतना जगे तो समझो कि तुम्हारी चेतना परिपूर्ण व स्वाभाविक हो
गई, सारे बंधन गिर गए, सारी जंजीरें गिर गईं। जंजीरें सूक्ष्म हैं, दिखाई पड़ने
वाली नहीं हैं। लेकिन हैं जरूर।
यूं तो दुनिया का हर आदमी बंधा है। और जब भी कोई व्यक्ति यहां बंधन के बाहर हो
जाता है तो बुद्ध हो जाता है, महावीर हो जाता है, मुहम्मद हो जाता है, जीसस हो
जाता है।
स्मरण करो, अपनी क्षमता को स्मरण करो। तुम भी यही होने को हो। इससे कम मत
होना। होना हो तो ईसा होना, ईसाई मत होना, ईसाई होना बहुत कम होना है। जब ईसा
हो सकते हो तो क्यों ईसाई होने से तृप्त हो जाओ? और जब महावीर हो सकते हो तो
जैन होने से राजी होना बड़े सस्ते में अपनी जिंदगी बेच देना है।
मैं तुम्हें चाहता हूं बुद्ध बनो, उससे कम नहीं। उससे कम अपमानजनक है। उससे कम
परमात्मा का सम्मान नहीं है। क्योंकि तुम्हारे भीतर परमात्मा बैठा है और तुम
छोटी-छोटी चीजों में होकर छोटे-छोटे होकर उलझ गए हो। और अगर कोई तुम्हें
तुम्हारी उलझन से बाहर निकालना चाहे तो तुम नाराज होते हो, तुम क्रोधित हो
जाते हो। तुमने बड़ा मूल्य दे दिया है क्षुद्र बातों को। मूल्य तो सिर्फ एक बात
का है अपनी शुद्ध आत्मा का, बाकी सब निर्मूल्य है।



सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेतनमान की सुनवाई 17 नवंबर को

मजीठिया वेतनमान की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। गौरतलब है कि प्रेस जगत को इस सुनवाई का लंबे समय से इंतजार था। लेकिन बिहार चुनाव की वजह से अंदेशा लगाया जा रहा था कि अगली सुनवाई नवंबर में हो सकती है। कंटेम्पट पीटीशन सिविल 411, 2014 अभिषेक राजा व अन्य विरुद्ध संजय गुप्ता की सुनवाई तिथि 17 नवंबर 2014 को तय की गई है।

SUPREME COURT OF INDIA
Top of Form
Case Status
Status : PENDING

Status of : Contempt Petition (Civil) 411 OF 2014

AVISHEK RAJA & ORS. .Vs. SANJAY GUPTA

Pet. Adv. : MR. PARMANAND PANDEY Res. Adv. : MR. BIRENDRA KUMAR MISHRA

Subject Category : LABOUR MATTERS - OTHERS

Listed 2 times earlier Likely to be Listed on : 17/11/2015

Last updated on Oct 17 2015

Monday, October 19, 2015

अंतिम संस्कार की ऑनलाइन बुकिंग

अगर कोई आप से कहे कि मरने से पहले ही अपने अंतिम संस्कार की सेवाओं को ऑनलाइन बुक करा सकते हैं तो आप भी पहली बार में यही कहेंगे कि क्या बेवकूफी भरी बात है। पर ये बात सच है अब आप अपने मरने से पहले ही अपनी अंतिम संस्कार की सभी सेवाओं को ऑनलाइन बुक करा सकते हैं।
रिटायर्ड हो चुके इंजीनियर सुनील कुमार शुक्ला और उनकी पत्नी सुनीता शुक्ला ने पहले से ही अपनी अंतिम संस्‍कार की सेवाओं को ऑनलाइन बुक कर लिया है। अहमदाबाद के एक जोड़े ने ऐसे ही अपने मरने से पहले अपनी अंतिम संस्कार की बुकिंग करा ली है। इसके लिए उन्होंने मोक्षिल डॉट कॉम पर जाकर बुकिंग कराई है।
सुनील शुक्ला ने बताया कि मेरी उम्र इस समय 75 वर्ष है और मेरी पत्नी की उम्र 70 वर्ष। हमारे बच्चे विदेश में रहते हैं। इस समय हम उम्र के ऐसे पड़ाव पर है कि कभी भी हमें ऐसी चीजों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में हमने इस काम के लिए खुद को तैयार कर लिया है।
 सुनील ने बताया कि हमारे बच्‍चों ने हमसे कहा कि जब भी हमें उनकी जरूरत होगी तो वो तुरंत उनके पास आ जाएंगे। पर उन्होंने कहा कि मेरे घर के निकट में एक व्यक्ति की पत्नी की मौत हो गई, वहां पर अंतिम संस्‍कार तक उनके घर के दोस्तों ने किया। उन्होंने कहा कि मोक्षिल डॉट कॉम इस अंतिम संस्‍कार की सभी क्रियाओं को पूरा करेगा। साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी उपलब्‍ध कराएगा। इसके लिए 4500 रुपए देकर उन्होंने अपने अंतिम संस्कार की अग्रिम बुकिंग भी करा ली है . अंतिम संस्कार करने के लिए कई भारतीय वेंचर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई वेंचर ने इस तरह के कार्यों के लिए अपनी सर्विस देने का फैसला भी किया है। ऐसे वेंचर के मुताबिक यह काम कुछ कठिन होता है क्योंकि लोग ऐसे कामों में पूरी तरह से मान्यताओं का ध्यान रखते हैं। काशीमोक्ष डॉट कॉम के रूपसी गुप्ता ने बताया कि हम लोगों की पुण्‍यति‌थि की परंपरा को लोगों के लिए करते हैं। बाद में इसकी सीडी बनाकर लोगों भेज दी जाती है।
मोक्षशिल के पीछे प्रोफेसर बिल्वा देवी और अभिजीत सिंह का दिमाग है। उन्होंने कहा कि कॉलेज के लिए प्रोजेक्ट के तौर पर इसे बनाया था। पर इस साल सिंतबर में इस सर्विस को उन्होंने लोगों के लिए शुरू कर दिया है। अभी तक उन्होंने इस वेबसाइट के जरिए 20 लोगों के अंतिम संस्कार की विधि को संपर्क किया है। मोक्षिल डॉट कॉम इस पर लोग अभी शरीर के अंगों का दान भी कर सकते हैं।

Saturday, October 17, 2015

ऑनलाइन खरीदें गोबर के उपले भी

आपने कपड़े, जूते, चप्पल और मोबाइल जैसी चीजें तो ऑनलाइन बिकते देखी ही होंगी, लेकिन क्या कभी गाय का गोबर ऑनलाइन बिकते देखा है। दरअसल, नवरात्रि के मौके पर हवन आदि में गाय के गोबर से बने उपले इस्तेमाल होते हैं। इसी के चलते उपलों की ऑनलाइन सेल बढ़ गई है। हवन की सामग्री के साथ बहुत सारी वेबसाइट्स पर आपको गोबर के उपले भी ऑनलाइन बिकते दिख जाएंगे। आपके सिर्फ ऑर्डर करना है और इसकी होम डिलीवरी हो जाएगी। इन उपलों की कीमतें भी मामूली नहीं हैं। दर्जन भर कंडों की कीमत भी 150 रुपए से अधिक तक है। विदेशों में तो इनकी कीमत और भी अधिक है, क्योंकि वहां पर इसकी मांग बहुत कम है। विदेशों में बहुत सारे भारतीय रहते हैं, जो त्योहारों के मौकों पर पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में उन्हें हवन समाग्री और उपलों की जरूरत महसूस होती है। इसकी जरूरत को पूरा करने का काम ऑनलाइन वेबसाइट्स बखूबी कर रही हैं।
उपयोग के तरीके
कई वेबसाइट्स पर न सिर्फ उपलों को उपयोग करने के तरीके बताए हैं, बल्कि उपलों की राख से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं, इसके भी तरीके बताए गए हैं। बहुत से लोग उपलों का राख का उपयोग अपने घरों में बने छोट-मोटे गार्डन में भी करते हैं।

धारा २० जे की आड़ में छुप रहा है मीडिया प्रबंधन

वेज बोर्ड के प्रस्तावों को लागू करने के बदले लगभग सभी प्रबंधन जिसमें जागरण प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड भी है,  वे वेज बोर्ड प्रस्ताव के धारा 20जे के पीछे छिपने की कोशिश कर रहे हैं. धारा 20जे वास्तव में उन कर्मचारियों के लिए है जो वेज बोर्ड प्रस्तावों से अधिक वेतन पा रहे हैं, न कि उन कर्मियों के लिए जो प्रस्ताव से काफी कम पा रहे हैं. 
हम ऐसे पत्रकार हैं जो अपनी किस्मत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे की रिपोर्ट तक अपने अखबार में छाप नहीं सकते. न ही इलेक्ट्रानिक मीडिया के हमारे साथी हमारी इन खबरों को सामने लाने की हैसियत में हैं. इसके अलावा यह खबर उन तमाम लोगों के लिए भी है, जो समझते हैं कि हर मीडियाकर्मी लाखों में खेल रहा है और इतना पावरफुल है कि दुनिया बदल सकता है... उन साथियों के लिए तो है ही, जिनका बयान है... वो बेदर्दी से सर काटें औऱ मैं कहूं उनसे हुजूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता। यह खबर 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया आयोग के प्रस्तावों को लागू नहीं किये जाने के विरोध में हम पत्रकारों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई की है। 
सुप्रीम कोर्ट ने अखबार मालिकों द्वारा मजीठिया आयोग लागू किये जाने की वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए एक वर्चुअल एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम) का गठन किया है जिसे  तीन महीने में अपनी आकलन कोर्ट में सौंपनी थी। क़िन्तु मीडिया मालिकों के दबाव के चलते अभी तक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंची। इसलिए सुनवाई की तारीख छह माह लेट हो गई। अब नवम्बर माह में सुनवाई होगी। भास्कर प्रबंधन ने बचने के लिए चपरासी तक को एम ग्रेड में कर दिया, भले ही वेतन 2500 रुपये ही हो। पहले यह ग्रेड 15000 रुपये  या इससे ऊपर वेतन वालों का होता था। नई नियुक्तियां संविदा पर की है।