कोटा। अगर आपके पास किसी भी तरह का कोई सरकारी दस्तावेज पहचान के लिए नहीं है, तो भी आपका बैंक खाता खोला जा सकता है। मोदी सरकार की ओर से देश के 7.5 करोड़ लोगों के बैंकिंग खाता खोलने के अभियान को जोर देने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह पहल की है।
आरबीआई की इस पहल के तहत कोई भी व्यक्ति बैंक जाकर अपना स्वहस्ताक्षरित फोटो और बैंक अधिकारी के सामने हस्ताक्षर या अंगूठा लगाकर अपना खाता खुलवा सकता है।
हालांकि, खाते को चालू रखने के लिए खाताधारक को एक साल के अंदर अपनी पहचान के लिए सरकारी दस्तावेज पेश करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो उसका खाता बंद किया जा सकेगा।आरबीआई की यह पहल खास तौर से असंगठित क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में मदद करेगी। अभी भी देश के एक बड़े हिस्से के पास आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, लाइसेंस, निवास स्थान प्रमाण पत्र आदि नहीं हैं, जो कि बैंक खाता खोलने में जरूरी होता है।
रिजर्व बैंक ने बिना सरकारी दस्तावेज से खुलने वाले खातों पर कुछ सीमाएं भी लगाई हैं। इन खातों को ‘छोटा खाता’ कहा जाएगा। इसके अलावा इन खातों के आधार पर साल में एक लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज नहीं दिया जा सकेगा। इसी तरह महीने में 10 हजार रुपये से ज्यादा की राशि नहीं निकाली जा सकेगी। साथ ही किसी भी समय खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा की राशि नहीं रखी जा सकती है।आरबीआई ने यह भी कहा है कि बिना सरकारी दस्तावेज के खुलने वाले खाते 12 महीने तक वैध रहेंगे। इस अवधि में खाताधारक को पहचान के सरकारी दस्तावेज पेश करने होंगे। यदि खाताधारक ने दस्तावेज के लिए आवेदन कर रखा है, और उसे 12 महीने के अंदर दस्तावेज नहीं मिले हैं, तो आवेदन करने का प्रमाण दिखाने पर बैंक उस आधार पर खाते को अगले 12 महीने के लिए सक्रिय रख सकता है। हालांकि उसके बाद दस्तावेज न होने पर खाते को बंद कर दिया जाएगा।
स्थायी निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी नहीं
ऐसे लोग जिनके पास आईडी प्रूफ है, लेकिन जहां वह रहते हैं उसका प्रमाण पत्र नहीं है, तो वह लोग अपने गांव या जहां का उनके पास स्थायी निवास पत्र है, उसके जरिए भी अपना बैंक खाता खुलवा सकेंगे।
इसी तरह खाता ट्रांसफर करने के लिए अलग से केवाईसी की जरूरत नहीं रहेगी।
कोटा। यदि आप यात्रा करते समय गूगल मैप का अक्सर इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। हाल ही में गूगल ने अपने गूगल मैप एप्लीकेशन को अपडेट कर उसमें 'वॉइस कंट्रोल' की सुविधा डाली है जिसकी मदद से आप ऑडियो निर्देशन को सुनते हुए रास्ता खोज सकते हैं। गूगल द्वारा किए गए इस अपडेट से यात्रियों को खासा फायदा होगा।
सूचना के अनुसार वॉइस कंट्रोल के अलावा एप में एक 'एलीवेशन' यानि कि ऊंचाई बताने वाले फीचर को भी जोड़ा गया है जो कि साइकिल चलाने वाले यात्रियों के लिए फायदेमंद है। यह अपडेट एंड्रायड वर्जन 8.2 के लिए किया गया है। वॉइस कंट्रोल फीचर को इस्तेमाल करना काफी आसान है। एप्लीकेशन के सर्च बार के नेवीगेशन इंटरफेस में एक माइक्त्रोफोन बटन लगाया गया है।
इस बटन को क्लिक करने पर 'नेवीगेशन टू' व 'शो ट्रैफिक' के ऑप्शन दिखाए देंगे जिनकी मदद से आप रास्ता व आगे कितना ट्रैफिक है दोनों ऑडियो कमांड से जान सकते हैं। समय-समय पर आपको इस माइक्रोफोन बटन को दबाते रहना होगा। सूचना के अनुसार यह बताया गया है कि यदि कंपनी द्वारा इस एप्लीकेशन में 'हॉटवर्ड डिटेक्शन' फीचर शुरू कर दिया जाए तो बार-बार माइक्रोफोन बटन को क्लिक करने के झंझट से बचा जा सकता है। अपडेट में दिए गए एलीवेशन फीचर की बात करें तो यह साइकिल चलाने वालों को आगे आने वाली चढ़ाई व ढलान की सीमा बताएगा। यह सभी जानकारी यूजर को 'लाइन ग्राफ' के जरिए दी जाएगी। आप को बता दें कि फिलहाल गूगल मैप्स का एंड्रायड 8.2 वर्जन विश्व स्तर पर उपलब्ध है लेकिन अभी तक भारत में नहीं आया है। यूजर इस अपडेट का इंतजार कर सकते हैं या फिर इसे 'फैनड्रायड' से डाउनलोड कर सकते हैं। पिछले हफ्ते ही कंपनी द्वारा आईओएस 3.2.0 वर्जन के लिए भी इस एप्लीकेशन को अपडेट किया गया था जिसके फलस्वरूप इसमें यूजर्स को गूगल मैप एप के द्वारा ही अपने जी-मेल अकाउंट पर नियंत्रण करने की सुविधा दी गई थी।
इंटरनेट सर्च इंजन फर्म गूगल की सेल्फ ड्राइविंग कार (बिना ड्राइवर की कार) अब तक 11.27 लाख किलोमीटर चल चुकी है। इस दौरान कोई इंसानी हस्तक्षेप नहीं किया गया।गूगल की यह कार भविष्य में ड्राइविंग को नया आयाम देगी। इसे चलाने के लिए ड्राइवर की दरकार नहीं होती, लिहाजा पीछे की सीट पर आराम से बैठकर सफर किया जा सकता है। पिछली सीट पर बैठा व्यक्ति सो सकता है, खा-पी सकता है और लैपटॉप पर काम कर सकता है। उसे सोचने की जरूरत नहीं है कि कब कौन सी दिशा में मुड़ना है। गूगल की योजना ऐसी कार बनाने की है, जो खुद ही ऑपरेट होती रहे।
गूगल शॉफर का कमाल
यह कार गूगल शॉफर सॉफ्टवेयर से संचालित होती है। गूगल के आधिकारिक ब्लॉग पर लिखा गया है कि सेल्फ ड्राइव कार अब तक कई लाख मील चलाकर देखी जा चुकी है। कंपनी ने सॉफ्टवेयर को पहले से ज्यादा दुरुस्त किया है, ताकि यह बिजी रोड पर बसों, अन्य वाहनों एवं पैदल चलने वालों को पहचान सके और उसी के मुताबिक फैसले कर सके। ट्रैफिक सिग्नल्स को पहचान सके और यदि कोई साइकल सवार अपने हाथ या चेहरे से टर्न लेने का इशारा कर रहा हो तो यह समझ सके।
फुलप्रूफ टेक्नोलॉजी
गूगल कार को एकदम वैसे ही ऑपरेट करने लायक बना रही है, जैसा कि किसी व्यक्ति द्वारा कार ऑपरेट की जाती है। कंपनी का कहना है कि अप्रैल 2014 से लेकर अब तक यह कार 7 लाख मील (11.27 लाख किलोमीटर) चल चुकी है। इसे चलाकर गूगल ने जो भी अनुभव हासिल किए, उसके आधार पर इसमें कई बदलाव और सुधार किए गए हैं। गूगल की ओर से कहा गया है कि ऐसा इसलिए संभव हो सका क्योंकि अब पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर टेक्नोलॉजी मौजूद है। ऐसी तकनीकी सिस्टम जो स्कैन, सेंस, प्रॉसेस और रिऐक्ट कर सकता है, महज सेकंड के सौंवे हिस्से से भी कम समय में। यह तकनीक पांच साल पहले नहीं थी।
थोड़ा समय लगेगा
गूगल फिलहाल इसे 'सेफ मोड' में चला रही है। जाहिर है, अभी इसे पूरी तरह से एरर-फ्री (परेशानी रहित) होने में थोड़ा समय लगेगा। गूगल ने अब तक इस प्रॉजेक्ट को लेकर कोई डेडलाइन नहीं दी है। कंपनी की तरफ से यह भी नहीं बताया गया है कि यह कार आम लोगों के लिए कब उपलब्ध होगी।
पहली टेस्ट ड्राइव 2010 में
गूगल के इंजिनियरों ने 2010 में इस कार को पहली बार टेस्ट ड्राइव किया था। तभी यह दावा किया जा रहा है कि यदि यह कार सफलतापूर्वक तैयार कर ली जाती है तो सड़क पर हादसों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
मान लीजिए आपके पास 10-12 पेज का कोई लेख है, जो पेपर पर लिखा है और आपको उसकी सॉफ्ट कॉपी चाहिए। ऐसे में क्या आप 10-12 पेज दोबारा टाइप करने बैठेंगे? नहीं, यह काम आप अपने गूगल ड्राइव के जरिये कर सकते हैं।
कम लोगों को यह जानकारी है कि जब वे किसी अच्छे ब्रैंड का स्कैनर या फिर एमएफडी (मल्टी फंक्शनल डिवाइस) खरीदते हैं तो उसके साथ एक सॉफ्टवेयर भी मिलता है, जिसका नाम है- ऑप्टिकल कैरक्टर रेकग्निशन (ओसीआर)। आमतौर पर हम स्कैन किए जाने वाले दस्तावेजों को इमेज या पीडीएफ फॉर्मैट में कंप्यूटर में सहेजते हैं, लेकिन ओसीआर सॉफ्टवेयर की मदद से उन्हें टेक्स्ट फॉर्मैट में भी स्टोर किया जा सकता है। ये दस्तावेज थोड़े-बहुत संशोधनों के बाद उसी तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं जैसे आपने उन्हें कंप्यूटर में खुद टाइप किया हो। बाकायदा एडिटिंग कीजिए, काटिए, जोड़िए, कहीं भी पेस्ट कीजिए। पूरी तरह से एक टेक्स्ट फाइल की तरह से इन्हें आसानी से यूज किया जा सकता है।
वैसे यह सेवा ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। अच्छी बात यह है कि ऑनलाइन यह सेवा सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं बल्कि हिंदी और दूसरी तमाम भाषाओं में भी मिलती है। इसी की बदौलत गूगल और दूसरी ऑनलाइन पुस्तक सेवाएं लाखों किताबों को डिजिटल रूप में परिवर्तित करती हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो फिर भला आप इस सुविधा का फायदा क्यों नहीं उठाते?
गूगल ड्राइव के जरिए OCR
हालांकि स्कैनर और एमएफडी के साथ आमतौर पर आपको एक अलग ओसीआर सॉफ्टवेयर मिलता है, जिसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट स्कैन करते समय किया जा सकता है, लेकिन ऐसे कंप्यूटर यूजर्स की संख्या बहुत कम है, जिनके पास स्कैनर या एमएफडी हों। वैसे भी कुछ सस्ते स्कैनर और एमएफडी के साथ ओसीआर सॉफ्टवेयर नहीं मिलता। ऐसे यूज़र्स इंटरनेट के जरिए उपलब्ध गूगल की ओसीआर सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो उसकी दूसरी सेवाओं की ही तरह मुफ्त है और इस्तेमाल में आसान। पहले यह सेवा गूगल डॉक्स का हिस्सा हुआ करती थी लेकिन अब डॉक्स और ड्राइव दोनों को एक ही प्लैटफॉर्म में समाहित कर दिया गया है।
गूगल के वेब ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए आपके पास गूगल का अकाउंट होना चाहिए। दूसरी जरूरत ऐसे दस्तावेज की है, जिसे स्कैन किया गया हो। याद रहे, गूगल ड्राइव की यह सुविधा हिंदी की फाइल को बदलती तो है, लेकिन सारा मटीरियल गड़बड़ हो जाता है। सभी शब्द उलट-पुलट हो जाते हैं जिन्हें ठीक करना पड़ता है।
गूगल ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए यह प्रोसेस अपनाएं :
1. drive.google.com पर लॉगिन करें।
2. अब खुलने वाले पेज पर आपकी वे सभी फाइलें दिखाई जाएंगी, जिन्हें आपने कभी गूगल ड्राइव पर अपलोड किया होगा। यदि वहां कोई फाइल नहीं दिख रही तो इसका मतलब है- आपने अब तक कोई फाइल अपलोड नहीं की है।
3. सबसे पहले गूगल ड्राइव वेब पेज के राइट साइड में Settings वाले आइकन को क्लिक करें और वहां दिखने वाले विकल्पों में Upload Settings पर क्लिक करें।