Saturday, December 31, 2016

ऐसे फ्री डाउनलोड कर सकते हैं BHIM एप

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मोबाइल ऐप भीम लॉन्च किया। BHIM ऐप का पूरा नाम 'भारत इंटरफेस फॉर मनी' है। यह UPI बेस्ड पेमेंट सिस्टम पर काम करेगा। इसके जरिए लोग डिजिटल तरीके से पैसे भेज और रिसीव कर सकेंगे। खास बात यह है यह ऐप बिना इंटरनेट के भी काम करेगा। इसमें यूजर्स को बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड जैसी लंबी डिटेल्स डालने की जरूरत नहीं होगी। इसे कैसे कर सकते हैं ऑपरेट...
- भीम को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डेवलप किया है।
- इससे पैसे भेजने के लिए आपको सिर्फ एक बार अपना बैंक अकाउंट नंबर रजिस्टर करना होगा और एक UPI पिनकोड जनरेट करना होगा।
- इसके बाद आपका मोबाइल नंबर ही पेमेंट एड्रेस होगा। हर बार अकाउंट नंबर डालने की जरूरत नहीं होगी।
- इंटरनेट नहीं होने पर फोन से USSD कोड *99# डायल करके भी इस ऐप को ऑपरेट किया जा सकता है। ये बिना इंटरनेट के भी काम करेगा।
- फिलहाल यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी को सपोर्ट करेगा। जल्दी ही क्षेत्रीय भाषाएं भी इसमें जुड़ेंगी।

क्या-क्या कर सकते हैं इस ऐप से
चैक बैलेंस : आप अपने बैंक अकाउंट बैलेंस चेक कर सकते हैं।
कस्टम पेमेंट एड्रेस : आप अपने फोन नंबर्स के साथ कस्टम पेमेंट एड्रेस को भी ऐड कर सकते हैं।
QR कोड :QR कोड स्कैन करके भी आप किसी को पेमेंट भेज सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ मर्चेंट का QR कोड स्कैन करना होगा।
ट्रांजैक्शन लिमिट : 24 घंटे में मिनिमम 10,000 रुपए और मैक्सिमम 20,000 रुपए ट्रांसफर कर सकते हैं।

भीम ऐप यूज करने पर कोई चार्ज रहेगा?
इस ऐप से ट्रांजेक्शन करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। हालांकि, IMPS और UPI ट्रांसफर पर आपका बैंक कुछ चार्ज वसूल कर सकता है।
इसे यूज करने के लिए मुझे क्या करना होगा?
यह एंड्रॉयड (8th वर्जन से ऊपर) और iOS (5th वर्जन से ऊपर) पर अवेलेबल है। प्लेस्टोर और iOS स्टोर से इसे BHIM टाइप करके डाउनलोड किया जा सकता है।
क्या यह ऐप किसी भी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करेगा?
इस ऐप को यूज करने के लिए आपको स्मार्टफोन, इंटरनेट एक्सेस, UPI पेमेंट सपोर्ट करने वाला भारतीय बैंक अकाउंट नंबर और अकाउंट से लिंक्ड मोबाइल नंबर की जरूरत होगी। ऐप के जरिए बैंक अकाउंट को UPI से लिंक करना होगा।
ऐप यूज करने के लिए मुझे मोबाइल बैंकिंग एक्टिवेट करनी होगी?
नहीं, इसके लिए मोबाइल बैंकिंग एक्टिवेट करने की जरूरत नहीं। सिर्फ आपका मोबाइल नंबर बैंक में रजिस्टर होना चाहिए।
क्या इसे यूज करने के लिए किसी खास बैंक का कस्टमर होना जरूरी है?
डायरेक्ट मनी ट्रांसफर के लिए आपके बैंक का UPI (Unified Payment Interface) प्लेटफॉर्म पर लाइव होना जरूरी है। UPI प्लेटफॉर्म पर एक्टिव सभी बैंक इस ऐप में लिस्टेड हैं।
मैं ऐप से अपने बैंक अकाउंट का UPI पिन कैसे जनरेट करूं?
इसके लिए आपको ऐप के मेन मेन्यू में बैंक अकाउंट्स पर जाकर Set UPI-PIN ऑप्शन चुनना होगा। इसके बाद आपसे डेबिट कार्ड/एटीएम कार्ड के आखिरी 6 डिजिट और कार्ड की एक्सपायरी डेट पूछी जाएगी। ये इनपुट डालने पर आपके मोबाइल पर OTP आएगा, जिससे आप UPI-PIN सेट कर पाएंगे।
क्या मैं ऐप में कई बैंक अकाउंट ऐड कर सकता हूं?
फिलहाल भीम ऐप पर सिर्फ एक ही बैंक अकाउंट जोड़ने का ऑप्शन है।
क्या मुझे भीम ऐप को अपनी बैंक अकाउंट डिटेल देनी होंगी?
रजिस्ट्रेशन के समय आपको डेबिट कार्ड डिटेल और मोबाइल नंबर बताना होगा। कार्ड नंबर से ही आपकी बैंक डिटेल सिस्टम को मिल जाएगी। इसे अलग से बताने की जरूरत नहीं।

Friday, December 30, 2016

सोने में 40 फीसदी की आई गिरावट

वर्ष 2016 सोने में मजबूती के साथ शुरू हुआ। वर्ष के दौरान यह निवेशकों की पहली पसंद बना रहा, लेकिन साल समाप्त होते होते इसकी चमक अचानक गायब होने लगी और वैश्विक घटनाक्रमों को देखते हुए इसमें अगले साल का परिदृश्य भी धूमिल नजर आने लगा। 
पिछले तीन साल कीमती धातुओं में निवेश करने वालों के लिए काफी चुनौती भरे रहे, लेकिन इस साल इसमें अच्छी शुरुआत रही। वर्ष के दौरान यह आकषर्क बना रहा, लेकिन साल समाप्त होते होते इसकी चमक गायब होने लगी जिसने सभी को हैरान कर दिया।वर्ष के आखिरी दिनों में सोना पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी और चांदी करीब 18 फीसदी ऊंची रही। हालांकि नीचे गिरने से पहले इस साल सोना और चांदी में वार्षिक रिटर्न क्रमश: 26 फीसदी और 45 फीसदी रहा। नोटबंदी के बाद कीमती धातुओं की मांग घट गई और नई उंचाइयां छूने वाला वाला सोना आखिरी दो महीनों में 40 फीसदी लुढ़क गया।
सर्राफा कारोबारियों को नोटबंदी के बाद काफी परेशानी झेलनी पड़ी। आयकर विभाग के छापों से कई दिनों तक उन्होंने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इससे पहले फरवरी में बजट पेश होने के बाद भी सर्राफा कारोबारियों ने एक महीने से अधिक दिनों तक अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। बजट में स्वर्णाभूषणों के विनिर्माण पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाए जाने का वह विरोध कर रहे थे।

प्रीपेड कार्ड से मिलेगा अब कर्मचारियों को वेतन

डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ने एक कदम और बढ़ा दिया। अब गैर-सूचीबद्ध कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को प्रीपेड कार्ड से वेतन दे सकेंगी। नगर निकाय भी ऐसा कर सकेंगे। आरबीआई ने यह फैसला वैसे कर्मचारियों को देखकर किया है जिनके पास बैंक खाता नहीं है। सूचीबद्ध कंपनियों को यह सुविधा पहले से ही थी। प्रीपेड कार्ड से डेबिट कार्ड की तरह खरीदारी के साथ नकदी निकालने की भी सुविधा है।
क्या है प्रीपेड कार्ड-
यह डेबिड कार्ड की तरह होता है और इसमें पहले से राशि जमा करनी पड़ती है। इसके जरिये किसी को राशि भी भेज सकते हैं। यह खरीदारी में डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है। इसके जरिए ऑनलाइन खरीदारी भी कर सकते हैं। इसमें नकदी की अधिकतम सीमा में बैंकों के आधार पर अंतर हो सकता है। इसमें तय सीमा के भीतर कई बार नकदी भरवा सकते हैं।
कंपनियां देंगी केवाईसी-
कर्मचारियों को बैंक से प्रीपेड कार्ड देने के लिए ग्राहक को जानें (केवाईसी) की जिम्मेदारी खुद कंपनियां उठाएंगी। साथ ही जिस बैंक में कंपनी का खाता होगा उसी बैंक से कर्मचारियों के लिए प्रीपेड कार्ड लेने की अनुमति होगी।
कैसे मिलता है कार्ड-
रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार व्यक्तिगत रूप से भी 10 हजार रुपये तक का प्रीपेड कार्ड बैंक में सामान्य जानकारी देकर ले सकते हैं। 10 हजार रुपये से अधिक के प्रीपेड कार्ड के लिए केवाईसी जरूरी है। अधिक निकासी पर शुल्क जिस बैंक का प्रीपेड कार्ड है उसी के एटीएम से महीने में पांच बार नकदी निकालने पर कोई शुल्क नहीं है जैसा कि डेबिट कार्ड पर भी लागू है। इससे अधिक बार निकासी पर बैंक 10 रुपये शुल्क वसूलते हैं।
नकदी कैसे निकलेगी-
प्रीपेड कार्ड से नकदी की सुविधा डेबिट कार्ड की तरह है। सामान्य स्थिति में आप एटीएम से एक बार में 10 हजार रुपये तक नकदी निकाल सकते हैं। जबकि प्वांइट ऑफ सेल (पीओएस) से छोटे शहरों में रोजाना दो हजार रुपये और बड़े शहरों में एक हजार रुपये निकाल सकते हैं। प्रीपेड कार्ड में एक समय 50 हजार रुपये से अधिक राशि जमा नहीं हो सकती है। नकदी केवल बैंक के प्रीपेड कार्ड से ही निकलती है।

एक जनवरी से ज्वैलरी हॉलमार्किंग जरुरी हो जाएगा।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने स्वर्ण आभूषणों के लिए हॉल मार्किंग संबंधी मानक को पुनरीक्षित करने तथा इसे एक जनवरी से लागू करने का निर्णय लिया है। ब्यूरो की जारी विज्ञप्ति के अनुसार हाल मार्किंग किए गए आभूषण अब 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट में उपलब्ध होंगे। लोगों की सुविधा के लिए आभूषणों की शुद्धता के अलावा कैरेट की मुहर लगाई जाएगी। जैसे 22 कैरेट के लिए 916 के अलावा 22के के मुहर लगाए जाएंगे जबकि 18 कैरेट के लिए 750 और 18के के तथा 14 कैरेट के लिए 585 और 14के के मुहर लगाए जाएंगे।
सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। बीआईएस को जारी नए नियम की कॉपी हमारे हाथ भी लगी है। इसके मुताबिक एक जनवरी से सिर्फ 22, 18 और 14 कैरेट सोने की ज्वैलरी की हॉलमार्किंग हो सकेगी। गौर करने वाली बात ये है कि अब तक कुल 10 कैटेगरी में हॉलमार्किंग की सुविधा थी, जिसे सरकार ने हटा दिया है।
नए नियम के तहत सोने के सिक्के और बिस्किट का भी स्टैंडर्ड तय होगा। सोने की हॉलमार्किंग कंज्यूमर के हक में है। लेकिन ज्वैलर्स इसका काफी विरोध कर रहे हैं। ज्वेलर्स की दलील है कि देश में हॉलमार्किंग की पार्याप्त सुविधा ही नहीं है।
सरकार जनता को खोटे सोने से छुटकारा दिलाना चाहती है, लेकिन सरकार का ये कदम ज्वेलर्स को नागवार गुजरा है। ज्वेलर्स दलील दे रहे हैं कि देश में हॉलमार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में भला एक जनवरी से पूरे देश में इसे कैसे लागू किया जाएगा। दरअसल देश में करीब पौने चार सौ हॉलमार्किंग सेंटर है।
जो फिलहाल पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। आॅल इंडिया जेम्स एंड वेलरी ट्रेड फेडरेशन का मानना है कि दिक्कतें तो होगी लेकिन इससे इंडस्ट्री को काफी फायदा भी होगा। आमतौर पर कीमतों में बेंचमार्किंग न होने की वजह से कम शुद्धता वाले सोने में ज्वैलर्स काफी गोलमाल करते हैं। कम शुद्धता वाले सोने को खरा सोना बताकर ऊंचे दाम पर बेच देते हैं और जब ग्राहक हॉलमार्किंग की मांग करते हैं तो उन्हें महंगी लागत का भय दिखाते हैं। जबकि हॉलमार्किंग की लागत सिर्फ तीस रुपए प्रति पीस होती है। ऐसे में सरकार के इस कदम से कंज्यूमर्स को जहां सोने की शुद्धता की गारंटी मिलेगीए वहीं ज्वैलर्स को गोलमाल करने के रास्ते बंद हो जायेंगे।

Thursday, December 29, 2016

डिजिटल पेमेंट में गड़बड़ी हुई तो कौन करेगा गौर?

जब से केंद्र सरकार ने विमुद्रीकरण यानी नोटबंदी का ऐलान किया है तभी से नकदरहित लेनदेन पर सभी को जोर नजर आ रहा है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)भी सुर्खियों में है। नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ कांत ने यूपीआई दुनिया की सबसे आसान भुगतान प्रणालियों में से एक करार दिया है। इसमें आपको बहुत कुछ झंझट भी नहीं करना पड़ता है। आपको जिसे भुगतान करना है या जिसके पास रकम भेजनी है, उसके आधार क्रमांक यानी आभासी पेमेंट एड्रेस की जरूरत पड़ती है। यह पता लगने के बाद आपको केवल अंगूठा टिकाना होगा और आप अपने बैंक खाते तक भी पहुंच जाएंगे तथा दूसरे पक्ष को रकम भी भेज पाएंगे। इसमें सबसे अच्छी और खास बात यह है कि बैंक की खाता संख्या और आईएफएससी कोड जैसी तमाम बातें याद रखने की आपको कोई जरूरत नहीं है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह प्रक्रिया कितनी आसान है।
 वाकई यह बहुत आसान है, लेकिन बैंक और ग्राहक कुछ बातों को लेकर चिंतित रहते ही हैं। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य ने एक टेलीविजन चैनल को पिछले दिनों दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अभी यह बात स्पष्टï नहीं है कि अगर लेनदेन पूरा नहीं हो पाता है तो उसकी शिकायत किस बैंक से की जाएगी और उसे सुलझाने का जिम्मा किसका होगा। हालांकि यूपीआई के जरिये लेनदेन में 8 नवंबर के बाद से जबरदस्त इजाफा हुआ है। जिस दिन प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया था, उस दिन यूपीआई से 3,721 लेनदेन हुए थे, लेकिन 7 दिसंबर को इसके जरिये 48,238 लेनदेन किए गए। इस तरह महज एक महीने के अंदर लेनदेन में 1,196 फीसदी का इजाफा हुआ। फिर भी कई लोगों को इस पर भरोसा नहीं है।
 कौन निपटाएगा शिकायत
 यूपीआई के जरिये लेनदेन में चार पक्ष शामिल हो सकते हैं: दो पक्ष तो ऐप तैयार करने वाले होंगे (एक रकम भेजने वाले के फोन में मौजूद ऐप बनाने वाला और दूसरा पाने वाले का ऐप बनाने वाला), तीसरा वह बैंक, जिससे रकम भेजी जानी है और चौथा वह बैंक, जिसमें रकम आनी है। यूपीआई में व्यक्ति किसी बैंक का ग्राहक बने बगैर ही उसके ऐप का इस्तेमाल कर सकता है और किसी दूसरे बैंक के खाते को उससे जोड़ सकता है। लेकिन यदि लेनदेन विफल रहता है तो वह रकम भेजने वाले के खाते में वापस नहीं आती है। ऐसे में उसे अपने बैंक के पास ही शिकायत करनी होगी।
 बैंकरों का कहना है कि अभी किसी भी पक्ष को यह नहीं पता होता कि समस्या किस जगह है और रकम खुद-ब-खुद वापस आने की कोई व्यवस्था भी अभी नहीं है। एक बैंकर कहते हैं, 'फिलहाल नैशनल पेमेंट्ïस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) अधिकारी इन दिक्कतों को सुलझान में मदद करते हैं, लेकिन अभी लेनदेन की संख्या भी बहुत कम है। जब रोजाना कई लाख लेनदेन होंगे तो शिकायतों का निपटारा करना एनपीसीआई के लिए भी मुश्किल होगा और बैंक कर्मचारियों के लिए भी।' उस सूरत में ग्राहकों को खुद ही बैंक से बार-बार संपर्क करना होगा।
 कैसे हो निपटारा
 जैसे ही रकम भेजने वाले के खाते से किसी लेनदेन की शुरुआत की जाती है तो उसकी सूचना एनपीसीआई के सर्वर पर पहुंच जाती है। वहां से वह सूचना रकम पाने वाले के बैंक तक जाती है। कभी कभार ऐसा भी होता है कि दूसरे बैंक से लेनदेन की पुष्टि होने से पहले ही उसके लिए निर्धारित समय पूरा हो जाता है यानी टाइम आउट हो जाता है, लेकिन रकम पाने वाले के खाते में पहुंच जाती है। उस सूरत में रकम भेजने वाले के पास तो लेनदेन विफल रहने का संदेश आता है यानी उसके बैंक खाते से रकम नहीं निकली होती है, लेकिन दूसरे बैंक को रकम मिल चुकी है। ऐसे में मामला सुलझाने के लिए दोनों बैंकों को मिलकर काम करना होगा और रकम भेजने वाले या पाने वाले के खाते से उक्त रकम निकालनी होगी। लेकिन मामला तब पेचीदा हो जाता है, जब रकम पाने वाला पैसा आते ही उसे किसी और खाते में भेज देता है या निकाल लेता है। इसीलिए बैंकों ने एनपीसीआई से अनुरोध किया है कि प्राप्तकर्ता बैंक से पहले यह पुष्टिï की जाए कि रकम वहां पहुंची है या नहीं और उसके बाद ही लेनदेन पूरा होने या नाकाम रहने का संदेश भेजा जाए।
 प्रक्रिया से परेशानी
 कुछ बैंकों को लेनदेन की शुरुआत करने वाली प्रक्रिया से परेशानी होती है। इस प्रक्रिया में डेबिट कार्ड संख्या के आखिरी 6 अंक और उसकी एक्सपायरी डेट की जरूरत होती है। बैंकों का कहना है कि यह विवरण बेहद आसानी से प्राप्त होता है क्योंकि लोग खरीदारी करते वक्त पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों पर अपने कार्ड सौंप देते हैं। बैंकों ने एनपीसीआई से कहा है कि साइन अप करते वक्त ग्राहकों से अपने कार्ड की निजी पहचान संख्या (पिन) भी डालने के लिए कहा जाए।

'किसेंजर',से ले पाएंगे वर्चुअल किस का अनुभव

स्‍मार्टफोन्‍स में मैसेंजर ऐप के चलन ने लोगों के बीच की दूरी को कम किया है। अब तक आप मैसेंजर ऐप्‍स की ईमोजी का उपयोग करते हुए अपनी भावनाओं को जताते थे। जो बहुत पसंद आया उसे कई बार किस वाली ईमोजी भी भेजते थे।लेकिन अब आपको ईमोजी भेजनs की जरूरत नहीं पड़ेगी क्‍योंकि एक ऐसी चीज आ रही है जिसकी मदद से आप सामने वाले को फोन के माध्‍यम से किस कर सकेंगे। जी हां, यह सच है और इसे नाम दिया गया है किसेंजर। यह एक अजीब सा नजर आने वाला डिवाइज है जो आपके आइफोन के साथ अटैच हो जाएगा जो आपको वर्चुअल किसिंग का अनुभव देगा।इसकी मदद से खासतौर पर लवर्स को किसिंग का रियलिस्टिक अनुभव मिलेगा। मगर इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि दोनों की यूजर्स के पास आइफोन होना जरूरी है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार यह किसेंजर एक सिलिकॉन पैड का बना होगा जो एक डिवाइस के माध्‍यम से आइफोन से जोड़ा जा सकेगा। किसेंजर के सिलिकॉन पैड में सेंसर्स लगे होंगे जो यूजर को रियल टाइम किसिंग फील करवाएगा।

नोटबंदी के 50 दिन: सिर्फ 1% ब्लैकमनी ही जब्त कर पाई सरकार

मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के 50 दिन पूरे हो गए हैं। 15 लाख करोड़ की करंसी चलन से बाहर की गई थी। इसमें से 14 लाख करोड़ रुपए के नए नोट या तो बदले गए या जमा किए गए। नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500-1000 के पुराने नोट बंद करने के जो कारण बताए थे, उनमें ब्लैकमनी रोकना भी एक मकसद था। अलग-अलग एजेंसियों का अनुमान है कि नोटबंदी के वक्त देश में 3 लाख करोड़ की ब्लैकमनी मौजूद थी। वहीं, सरकार के आंकड़े कहते हैं कि अब तक 3100 करोड़ रुपए की ब्लैकमनी देशभर में चली कार्रवाई के दौरान जब्त की गई। इस लिहाज से नोटबंदी के 50 दिन में सरकार महज 1% ब्लैकमनी ही जब्त कर पाई।जानिए नोटबंदी के 50 दिनों में कितने बदले हालात और ब्लैकमनी का पता लगाने के लिए अब क्या कर रही है सरकार...
1. कितनी ब्लैकमनी सामने आई?
पहले: नोटबंदी से पहले 17 लाख करोड़ रुपए करंसी चलन में थी। जब 500-1000 के पुराने नोटों को बंद किया गया। 15 लाख करोड़ की करंसी चलन से बाहर हो गई। कोटक सिक्युरिटीज और केयर रेटिंग के अनुमान के मुताबिक, 17 लाख करोड़ में से 3 लाख करोड़ रुपए ब्लैकमनी के रूप में मौजूद थे। उम्मीद थी कि नोटबंदी से इस ब्लैकमनी के बड़े हिस्से का सरकार पता लगा लेगी।
अब: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और बाकी एजेंसियों की अब तक की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद 3100 करोड़ रुपए ब्लैकमनी जब्त की गई है। अगर इकोनॉमी में 3 लाख करोड़ रुपए की ब्लैकमनी है तो सरकार की यह जब्ती उसका महज महज एक फीसदी ही है।

2. कितने पुराने नोट बैंकों के पास लौटे?
पहले: 86% फीसदी करंसी यानी करीब 15 लाख करोड़ रुपए सर्कुलेशन से बाहर हुए थे।
अब: 14 लाख करोड़ रुपए बैंकों में डिपॉजिट या एक्सचेंज हो चुके हैं। डिमोनेटाइज हुई करंसी का ये करीब 90% है।

3. कैश की किल्लत कितनी दूर हुई?
पहले: 8 नवंबर को 500-1000 के नोट बंद होने पर 86% करंसी बाहर हो गई। शुरुआती दिनों में इकोनॉमी सिर्फ 14% करंसी पर चल रही थी।
अब:सरकार का कहना है कि डिमोनेटाइज करंसी की आधे से ज्यादा नई करंसी अब तक प्रिंट हो गई है। RTI के एक जवाब के मुताबिक, 7 लाख करोड़ रुपए की नई करंसी प्रिंट गई है। लेकिन 19 दिसंबर तक 4.09 लाख करोड़ रुपए के नए नोट बैंकों को दिए गए थे।

4. विदड्रॉअल की लिमिट कितनी बढ़ी?
पहले: एटीएम से 2000 रुपए निकाल सकते थे। बाद में अपने बैंक के एटीएम से 2500 रुपए निकालने की इजाजत मिली। बैंक के काउंटर से हफ्ते में 10 हजार रुपए निकालने की लिमिट थी। फिर 24 हजार की लिमिट तय की गई।
अब: एटीएम और बैंक में जाकर पैसा निकालने की विदड्रॉअल लिमिट बरकरार है। सिर्फ शादी जैसी स्थिति में परिवार के किसी एक मेंबर के खाते से 2.5 लाख निकाले जा सकते हैं, लेकिन कई शर्तों के साथ।

5. छोटे नोटों की क्राइसिस
पहले : नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से 2000 और 500 के नए नोट मिलने शुरू हुए। इनकी तादाद ज्यादा हो गई। 100 रुपए जैसे छोटे नोटों की किल्लत हो गई।
अब :RBI के मुताबिक दिसंबर के महीने में 100, 50, 20 और 10 रुपए के नए 1.06 लाख करोड़ रुपए के नोट सर्कुलेशन में आए।
85,000 करोड़ रुपए के 100 के नोट।
9000 करोड़ रुपए के 50 के नोट।
6,200 करोड़ रुपए के 20 के नोट।
5,700 करोड़ रुपए के 10 के नोट।

6. 50 दिन में 64 नोटिफिकेशन, बार-बार बदलते नियमों से परेशानी
- नोटबंदी के बाद से अब तक 50 दिनों में 64 बार नोटिफिकेशन जारी किए। इसके अलावा कई बार नियम बदले जिनसे परेशानी हुई।
7. नोटबंदी के 50 दिनों में क्या बदला?
- 20 दिसंबर को अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी के बाद एक महीने में डिजिटल ट्रांजैक्शन में 300 फीसदी का इजाफा हुआ है।
पहले: 8 दिसंबर तक हर दिन 3.85 लाख डिजिटल ट्रांजैक्शन होते थे।
अब: 7 दिसंबर तक हर दिन 16 लाख डिजिटल ट्रांजेक्शन होने लगे। यानी डिजिटल ट्रांजेक्शन में 316% की ग्रोथ दर्ज की गई।

8. सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स पर कई तरह के डिस्काउंट दिए
- नोटबंदी के 30 दिन पूरे होने पर सरकार ने 11 राहतें दीं।
- पेट्रोल-डीजल के 4.5 करोड़ कंज्यूमर्स को डिजिटल मोड से खरीददारी पर 0.75% डिस्काउंट की घोषणा सरकार ने की। इसी तरह डिजिटल पेमेंट से रेलवे टिकट लेने पर 0.5% डिस्काउंट और 10 लाख तक का एक्सीडेंटर इंश्योरेंस, रेलवे फैसिलिटीज पर 5% डिस्काउंट देने का एलान हुआ।
- नई ऑनलाइन इंश्योरेंस पॉलिसी और प्रीमियम पर 10% डिस्काउंट की घोषणा की।
- 2000 तक के सिंगल डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर सर्विस टैक्स से छूट और टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट करने पर 10% की छूट का ऐलान किया।

9. ब्लैकमनी सामने लाने के लिए सरकार ने खुद बताए रास्ते, सख्ती भी दिखाई
- सरकार ने लोकसभा में इनकम टैक्स अमेंडमेंट बिल पास कराया। इसके तहत खुद बेहिसाबी आमदनी बताने पर 50% टैक्स और पकड़े जाने पर 85% रकम जब्त करने का प्रावधान किया गया।
- 31 मार्च तक के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) का एलान हुआ। इस दौरान आप 50% टैक्स और पेनल्टी के साथ अघोषित आय का खुलासा कर सकेंगे। 25% हिस्सा चार साल ब्लॉक रहेगा।
- सरकार ने blackmoneyinfo@incometaxgov.in पर लोगों से खुद ब्लैकमनी की जानकारी देने को कहा।

10. IT डिपार्टमेंट ने भेजे 3500 नोटिस
- सेंट्रल बोर्ड फॉर डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने बताया कि नोटबंदी के बाद से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 3500 नोटिस भेजे हैं।
- ये नोटिस नोटबंदी के बाद बैंक में डिपॉजिट की गई रकम के आधार पर जारी किए गए हैं।