Sunday, August 3, 2014

आयकर भरने वालों से विभाग की ईमेल आईडी रखने की अपील

कोटा। आयकर रिटर्न भरने वालों से उनका मोबाइल फोन नंबर और निजी मेल आईडी मांगने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स देने वाले सभी लोगों से विभाग की आधिकारिक ईमेल आईडी को अपने इनबॉक्स के 'सेफ लिस्ट' में शामिल करने का अनुरोध किया है। आईटी डिपार्टमेंट ने यह अपील इसलिए की है ताकि डिपार्टमेंट की तरफ से उन्हें भेजा जाने वाला ईमेल टैक्स भुगतान करने वालों के ईमेल अकाउंट के स्पैम या जंक फोल्डर में न चला जाए। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'टैक्स का भुगतान करने वालों को बस इतना करना है कि उन्हें आईटी डिपार्टमेंट की ईमेल आईडी को मेलबॉक्स की सेफ लिस्ट में शामिल करना है। इससे जब वह व्यक्ति डिपार्टमेंट के पोर्टल पर अपने ईमेल और मोबाइल नंबर को वेरीफाई करने की कोशिश करेगा, तब कंप्यूटर सिस्टम की तरफ से उसे एक पिन मिलेगा।' अधिकारी ने कहा, 'यदि यह पिन गलती से स्पैम या जंक बॉक्स में चला गया तो फिर इसे खोजने में काफी परेशानी होती है।'
आईटी डिपार्टमेंट ने टैक्स चुकाने वाले लोगों से अपनी सेफ लिस्ट को डिपार्टमेंट के हैंडल DONOTREPLY@incometaxindiaefiling.gov.in पर जाकर वेरिफाई करने के लिए कहा है।  एक बार डिपार्टमेंट के ऑफिशियल हैंडल से ईमेल मिलने के बाद टैक्स का भुगतान करने वाले पिन की मदद से अपना टैक्स रिटर्न आसानी से भर सकते हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने हाल ही में ऑनलाइन रिटर्न के लिए नए सिरे से नोटिफिकेशन जारी किए हैं और इसके मुताबिक ऑनलाइन टैक्स भरने वालों को अब अपने मोबाइल नंबर और पर्सनल ईमेल की जानकारी आईटी विभाग को देना होगा। इसका मकसद टैक्स से जुड़े मामलों में टैक्स का भुगतान करने वालों के साथ संपर्क में रहना है।

दूसरे एटीएम से केवल दो बार ही निकाल सकेंगे फ्री पैसे

कोटा। अब आपको दूसरे बैंकों के एटीएम से बार-बार पैसा निकलना महंगा पड़ सकता है। आरबीआई कके नए निर्देश के अनुसार शहरों में अब आप दूसरे बैंकों के एटीएम से बिना कोई चार्ज दिए महीने में सिर्फ दो बार ही पैसे निकाल पाएंगे। पहले यह सुविधा महीने में 5 बार थी। अगर आप दूसरे बैंकों से दो बार से अधिक बार पैसे निकालते हैं तो उसके लिए आपको हर बार पैसे निकालने पर 20 रुपये का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया [आरबीआई] ने ग्रामीण इलाकों में पहले वाली सुविधा जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही आरबीआई ने गांवों के एटीएम धारकों को आसपास के एटीएम मशीनों की जानकारी देने का भी निर्देश दिया है। बैंक लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि दूसरे बैंकों के एटीएम से पैसे निकालने की आवृति सीमा घटाई जाए। इसके साथ बैंक यह भी चाहते थे कि मुफ्त में 5 बार पैसे निकालने के बाद अगली निकासियों में जो चार्ज लिया जाता है, उसे भी बढ़ाया जाए। इस मामले में बैंकों का तर्क है कि दूसरे बैंकों के एटीएम का गलत इस्तेमाल किया जाता है। 
एटीएम धारक ज्यादा से ज्यादा बार पैसे निकालते हैं। इससे बैंकों को नुकसान होता है। बैंकों का यह भी कहना है कि सिक्यॉरिटी के नए मानकों को लेकर आरबीआई द्वारा जारी गाइडलाइंस की वजह से भी उनका खर्च बढ़ गया है। वर्तमान में अगर आप तय सीमा से ज्यादा बार दूसरे बैंक के एटीएम से पैसा निकालते हैं तो हर बार पैसा निकालने पर 15 रुपये का चार्ज है।गौरतलब है कि 2009 में दूसरे बैंकों के एटीएम के इस्तेमाल को पूरी तरह से शुल्क रहित कर दिया गया था। बाद में बैंकों के कहने पर आरबीआई ने महीने में 5 बार ही फ्री पैसे निकालने की सीमा तय कर दी थी।

Saturday, August 2, 2014

डॉलर की औकात


Saturday, July 26, 2014

इंश्योरेंस पॉलिसी से हर साल रिन्यूअल की टेंशन खत्म होगी

जल्द ही आपके लिए ऐसी पॉलिसी आ सकती है जिससे हर साल इंश्योरेंस कवर लेने की दिक्कत दूर हो जाएगी। इंश्योरेंस रेग्युलेटर इरडा इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एक बार में पांच साल का कवर देने वाली पॉलिसी ऑफर करने के प्रपोजल पर विचार कर रहा है। रेग्युलेटर जल्द ऐसे लॉन्ग टर्म प्रॉडक्ट्स पर नए गाइडलाइंस जारी कर सकता है। ये पॉलिसी सस्ती भी होंगी।
इरडा के एक अधिकारी ने बताया, 'कुछ इंश्योरेंस कंपनियों ने ऐसे प्रस्ताव सौंपे हैं और हम उनकी समीक्षा कर रहे हैं। हम सबसे पहले दोपहिया गाड़ी सेगमेंट के लिए ऐसी पॉलिसी से शुरुआत कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि अब तक के अनुभव को देखते हुए लगता है कि कमर्शल गाड़ियों के लिए भी ऐसे प्रॉडक्ट्स लॉन्च किए जा सकते हैं। रेग्युलेटर का मकसद ऐसी लॉन्ग टर्म पॉलिसी से खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इंश्योरेंस को बढ़ावा देना है। इरडा के अधिकारियों ने बताया, 'कई कंपनियों ने कहा है कि इंश्योरेंस रिन्यू नहीं हो रहे हैं। इसलिए हमें लॉन्ग टर्म प्रॉडक्ट्स लाना चाहिए। इससे इंश्योरेंस कल्चर को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।'
देश में इंश्योरेंस की पहुंच 2009-10 के 5.2 पर्सेंट से घटकर 2012-13 में 3.96 पर्सेंट रह गई। देश में जनरल इंश्योरेंस की पहुंच सिर्फ 0.78 पर्सेंट है। मोटर सेगमेंट का प्रीमियम कलेक्शन 2012-13 में 29,777 करोड़ रुपये था। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब सरकार इंश्योरेंस सेक्टर को खोलने और इसमें 49 पर्सेंट एफडीआई को इजाजत देने के बारे में सोच रही है। इंडिया में 17 प्राइवेट और 4 पीएसयू जनरल इंश्योरेंस कंपनियां हैं।
केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंश्योरेंस की पहुंच इतनी कम होने की वजह इसको लेकर जागरूकता और जनरल इंश्योरेंस प्रॉडक्ट्स की समझ नहीं होना है। लोगों को लगता है कि इससे उनको कम बेनेफिट मिलता है। ये इंश्योरेंस फाइनैंसर के दबाव और कानूनी तौर पर जरूरी होने की वजह से खरीदे जाते हैं। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को भी लगता है कि ऐसे प्रॉडक्ट से रिन्युअल बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, जो ग्रामीण इलाकों में बहुत कम है।

एक हजार करोड़ का रेवेन्यु, वाणिज्यिक कर विभाग के पास भवन नहीं

कोटा। वाणिज्यिक कर विभाग के नए भवन के लिए इस बार के बजट में लीज राशि मंजूर नहीं हुई। जबकि यह विभाग सालाना एक हजार करोड़ का राजस्व देता है। पिछले बजट में जो राशि मंजूर हुई तो वह पीडब्ल्यूडी द्वारा यूआईटी में लीज जमा नहीं होने से लैप्स हो गई।
 विभाग के संभाग स्तर के कार्यालय को तीन साल पहले यूआईटी से कर भवन बनाने के लिए रावतभाटा रोड पर टैगोर नगर में 2594 वर्गमीटर भूमि मुफ्त में मिली थी। दो साल हो गए बजट नहीं मिलने से इसकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई। पिछली सरकार के वक्त वर्ष 2013-14 में यूआईटी में लीज जमा कराने के लिए 12.74 करोड़ रुपए पीडब्ल्यूडी को मिले थे। लेकिन, समय पर यूआईटी में लीज जमा नहीं होने से राशि लैप्स हो गई। अधिकारियों ने फिर से इसके लिए राज्य सरकार को लिखा है।
 यह महकमा एबी सर्किल, स्पेशल, वर्क्स   टैक्स और एंटी इवेजिन शाखाओं में बंटा है। दो मंजिला पुराने जीर्ण-शीर्ण भवन में पूरे जोन का कार्यालय संचालित किया जा रहा है। जिसमें कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ जिले और रामगंजमंडी तक का एरिया शामिल है। अकेले कोटा कार्यालय में ही 125 से अधिक कर्मचारियों का स्टाफ है। कंप्यूटर के युग में सीलन और बदबूदार कमरों में न तो कोई कर्मचारी बैठना पसंद करता है और न करदाता डीलर।
 डीलर्स का काम पड़ता है तो वह एक सर्किल से दूसरे सर्किल की भूल भुलैया बिल्डिंग में ही भटकता रहता है। स्टाफ का भी मानना है कि पूरा विभाग अब ऑनलाइन हो चुका है, लेकिन अभी भी जर्जर भवन में ही ऑफिस चला रखा है। कमरे इतने छोटे हैं कि पुराने दस्तावेज संभालने के लिए भी जगह कम पड़ती है।
लीज के लिए राशि नहीं मिली
कर भवन की भूमि की लीज जमा कराने के लिए इस बार के बजट में कोई राशि नहीं मिली। इसके लिए कमिश्नर को लिखा है। -एनके गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्यिक कर विभाग