Saturday, June 25, 2016

EPF के पेंशनर्स को मिल सकती है 8.16% ज्यादा रकम

दिनेश माहेश्वरी
कोटा। पेंशन सुविधा वाले ऐसे लोगों को दो वर्षों के लिए उनकी पेंशन के 8.16 पर्सेंट के बराबर अतिरिक्त रकम मिल सकती है, जो 58 साल के बाद अपनी पेंशन विदड्रॉ नहीं करेंगे। उन्हें 60 वर्ष की उम्र पूरी होने तक यह अतिरिक्त राशि मिल सकती है। इस कदम से एंप्लॉयी पेंशन स्कीम के 20 लाख सब्सक्राइबर्स को फायदा हो सकता है। एंप्लॉयी पेंशन स्कीम एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन के तहत आती है। पेंशनर्स के ऐसा करने से सरकार को पेंशन फंड में डेफिसिट घटाने में बड़ी मदद मिलेगी।
रिटायरमेंट फंड बॉडी ईपीएफओ ने हाल में यह अधिसूचना जारी की थी कि 58 वर्ष के बाद पेंशन विदड्रॉल न करने पर हर साल पेंशन में चार पर्सेंट बढ़ोतरी का फायदा दिया जाएगा। हालांकि विदड्रॉल न करने के लिए उम्र की सीमा 60 वर्ष तय कर दी गई है। ईपीएफओ के नोटिफिकेशन को ईटी ने देखा है, जिसमें कहा गया है, 'जो मेंबर्स 59 साल या 60 साल की उम्र तक बगैर योगदान के पेंशन डेफर करेंगे, वे पूरे हुए हर साल के लिए पेंशन की मूल रकम में चार पर्सेंट बढ़ोतरी के हकदार होंगे। अगर इस स्थिति में दो साल पूरे हों तो बढ़ोतरी 8.16 पर्सेंट होगी।' नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जो मेंबर्स 60 साल की उम्र तक पेंशन में योगदान करते रहेंगे, वे भी इस फायदे के हकदार होंगे और 58 वर्षों के बाद कंट्रीब्यूटरी सर्विस को पेंशनेबल सर्विस और पेंशन योग्य सैलरी की गणना में शामिल किया जाएगा। नोटिफिकेश के मुताबिक, इस स्कीम के तहत मिलने वाला लाभ 25 अप्रैल 2016 से प्रभावी माना जाएगा और ऐसे सब्सक्राइबर्स को दिया जाएगा, जो पहले से ही ईपीएफओ के पेंशनर न हों और 58 साल की उम्र पूरी होने तक जो कम से कम 10 वर्ष सर्विस में रहे हों।
अनुमान है कि पेंशन विदड्रॉल की एज लिमिट बढ़ाने से पेंशन फंड में डेफिसिट करीब 30,000 करोड़ रुपये तक कम हो सकता है। एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड स्कीम 1952 के तहत एंप्लॉयर और एंप्लॉयी 12 पर्सेंट योगदान करते हैं। एंप्लॉयर वाले हिस्से में से 8.33 पर्सेंट रकम हर महीने के पूरा होने के 15 दिनों के भीतर एंप्लॉयीज पेंशन फंड में जाती है। वहीं सेंट्रल गवर्नमेंट इसमें 1.16 पर्सेंट योगदान करती है। सब्सक्राइबर्स इस रकम को 58 साल की उम्र में रिटायर होने पर निकाल सकते हैं।

Monday, June 20, 2016

आवाज देके हमें तुम बुलाओ .............

लता:    आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

अभी तो मेरी ज़िंदगी है परेशां
कहीं मर के हो खाक भी न परेशां
दिये की तरह से न हमको जलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ


रफ़ी:    मैं सांसों के हर तार में छुप रहा हूँ
मैं धड़कन के हर राग में बस रहा हूँ
ज़रा दिल की जानिब निगाहें झुकाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ


लता:    ना होंगे अगर हम तो रोते रहोगे
सदा दिल का दामन भिगोते रहोगे
जो तुम पर मिटा हो उसे ना मिटाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ


रफ़ी:    आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

गीतकार : हसरत जयपुरी, गायक : लता - रफी, संगीतकार : शंकर जयकिशन, चित्रपट : प्रोफेसर (१९६२) / Lyricist : Hasrat Jaipuri, Singer : Lata Mangeshkar - Mohammad Rafi, Music Director : Shankar Jaikishan, Movie : Professor (1962)

ईपीएफ ट्रांसफर अब और आसान

ज्योति माहेश्वरी
कोटा।  एक समय ईपीएफ ट्रांसफर करवाना बहुत टेढ़ी खीर थी। ईपीएफओ में एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ईपीएफ बैलेंस टांसफर करवाने में बहुत दिक्कत होती थी। लेकिन, अब इसकी प्रक्रिया आसान हो गई है। आप ऑनलाइन भी ईपीएफ ट्रांसफर करवा सकते हैं। आसानी से बैलेंस ट्रांसफर करवाने के लिए आपको किन छोटी-मोटी बातों का ध्यान रखना है इस पर विशेष।
दिनेश  एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। उसने ए कंपनी में 5 साल काम किया। इसके बाद नई कंपनी बी ज्वाइन कर ली। इस कंपनी में वह ज्यादा दिन तक नहीं टिका और इसके बाद उसने एक और नई कंपनी सी ज्वाइन कर ली। दिनेश  कार्यकुशल है, लिहाजा उसके पास नौकरी की कमी नहीं है। नौकरियां बदलने में भी उसको दिक्कत नहीं आती। लेकिन, उसने एक छोटी सी गलती कर दी। उसने अपना ईपीएफ बैलेंस ए कंपनी से बी कंपनी में ट्रांसफर नहीं करवाया। अब उसे उसकी गलती का अहसास हुआ और वह सभी अकाउंट का ईपीएफ बैलेंस सी कंपनी के अकाउंट में करवाना चाहता है। दिनेश  की तरह कई और कर्मचारी अपना पीएफ का बैलेंस एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं। वे इसकी आसान प्रक्रिया जानना चाहते हैं। शुक्र है ईपीएफओ ने इसकी प्रक्रिया आसान कर दी है।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और ऑनलाइन पीएफ ट्रांसफर मेथड से कई दिक्कतें दूर हो गई हैं। दूसरी तरफ ईपीएफ की रकम निकालना भी आसान हो गया है। आप यह काम पुरानी कंपनी के पास जाए बगैर भी कर सकते सकते हैं।
ईपीएफ ट्रांसफर के नियम
*आप अपना बैलेंस एक अकाउंट से दूसरे में ट्रांसफर करवा सकते हैं
*ईपीएफ ट्रांसफर करवाने के लिए समय सीमा का कोई बंधन नहीं है
*आप अपना बैलेंस केवल अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर पाएंगे
*तीसरे व्यक्ति के अकाउंट में बैलेंस ट्रांसफर करवाना संभव नहीं
*ईपीएफ के साथ कर्मचारी पेंशन स्कीम की रकम भी ट्रांसफर होगी
*आप आधी अधूरी या कम रकम ट्रांसफर नहीं करवा सकते
*ईपीएफ की रकम ट्रांसफर करवाने के लिए सत्यापन जरूरी है
*दोनों अकाउंट में नाम, पिताजी का नाम और जन्म की तारीख एक समान होनी चाहिए।
ईपीएफ ट्रांसफर के तरीके
ईपीएफओ ने ईपीएफ ट्रांसफर का नया तरीका लागू किया है लेकिन पुरानी प्रक्रिया को बंद नहीं किया है। इससे आप इनमें से कोई भी प्रक्रिया चुन सकते हैं। अगर आपको कंप्यूटर का ज्ञान है तो आप टांसफर की ऑनलाइन प्रक्रिया भी अपना सकते हैं। इसके अलावा मौजूदा ऑफलाइन प्रक्रिया तो है ही सही।
ऑफलाइन प्रक्रिया
ऑफलाइन ईपीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया में आपको प्रिंटेड फॉर्म भरना होगा। आपकी मौजूदा कंपनी इस फॉर्म को ईपीएफओ को ट्रांसफर करेगी। इसके बाद ईपीएफओ आपके इस फॉर्म को आपकी पुरानी कंपनी को ट्रांसफर करेगा। पुरानी कंपनी से जानकारी सत्यापित होने पर ईपीएफओ पुरानी कंपनी से पैसाा नई कंपनी में ट्रांसफर कर देगा। इस प्रक्रिया में फॉर्म भौतिक रूप से भेजा जाता है इसलिए इसमें समय ज्यादा लगता है।
आनलाइन प्रक्रिया
ईपीएफ ट्रांसफर के लिए इस प्रक्रिया को अपनाना आसान है। इसमें फॉर्म भौतिक रूप से एक कंपनी से दूसरी कंपनी नहीं भेजा जाता है। ईपीएफ इलेक्ट्रॉनिक तौर पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। कंपनी की तरफ से आनलाइन ही सत्यापन कर दिया जाता है। इसमें कम समय लगता है।
ट्रांसफर प्रक्रिया कैसे चुने
ये तो तय है कि आप ईपीएफ ट्रांसफर करने के लिए सबसे आसान प्रक्रिया अपनाएंगे। लेकिन ये आसान प्रक्रिया हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं है। आसान प्रक्रिया अपनाने के लिए आपको कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ेगा। आप ट्रांसफर करवाने से पहले हर प्रक्रिया की शतोर्ं को पड़ लें। इसके लिए 4 प्रक्रिया हैं।
एक कर्मचारी एक अकाउंट
ये सबसे आसान प्रक्रिया है। इसके लिए ईपीएफओ दिन रात काम करके लोगों के पैसे ट्रांसफर कर रहा है। इसमें आप एक से ज्यादा ट्रांसफर के लिए अर्जी दे सकते हैं। ईपीएफओ के मुताबिक इससे अकाउंट को संगठित किया जा रहा है। ये आनलाइन प्रक्रिया है और इसमें कम कठिनाई आती है।
इनका रखें ध्यान
*आपने अपना आधार नंबर यूएएन नंबर से लिंक कर दिया है।
*आपकी कंपनी ने आधार का सत्यापन कर दिया है।
*आपकी व्यक्तिगत जानकारी का आधार के डेटा से मिलान हो गया है।
*आपने अपना बैंक अकाउंट नंबर और पैन कार्ड ईपीएफओ को दे दिया है।
*आपका नाम, जन्म तारीख और पिताजी का नाम सभी अकाउंट में एक सा है।
*अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं तो आप अपना बैलेंस आसानी से एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करवा सकते हैं।
यूएएन के जरिए ऑटोमेटिक बैलेंस ट्रांसफर
इस प्रक्रिया में आपको कोई भी कदम उठाने की जरूरत नहीं है। ईपीएफ का बैलेंस आसानी से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। ऑटोमेटिक ट्रांसफर के लिए आपको इन शर्तों को पूरा करना पड़ेगा।
नई कंपनी ज्वाइन करने से पहले आपके पास यूएएन नंबर है
आपने नई कंपनी को इस नंबर की जानकारी दी है
आपकी निजी जानकारी का पूरी तरह से मिलान हो चुका है
इसके जरिए सिर्फ एक अकाउंट से दूसरे में रकम ट्रांसफर होगी
इस प्रक्रिया के जरिए नए पीएफ अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करवाना उपयोगी होता है। सभी मौजूदा ईपीएफ अकाउंट के यूएएन नंबर जारी कर दिए गए हैं। अपनी निजी जानकारी को चेक करें कि वह सही है। साथ ही अपनी कंपनी को यूएएन नंबर न देना भूले।
ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम पोर्टल
यह भी ईपीएफ ट्रांसफर करने की आसान प्रक्रिया है। इसमें आधार और यूएएन नंबर की जरूरत नहीं होती। आप ओटीसीपी पोर्टल का इस्तेमाल करके ऑनलाइन ईपीएफ ट्रांसफर कर सकते हैं। इस पोर्टल पर आपको प्रोविडेंट फंड ट्रांसफर करने की अर्जी देनी होगी। इसके लिए आपको किसी तरह का डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं है। हालांकि इसमें आपकी पुरानी कंपनी को सत्यापन करना होगा। सत्यापन ऑनलाइन हो जाएगा। आपको मौजूदा कंपनी को अर्जी का प्रिंटआउट देना होगा।
इन चीजों का रखें ध्यान
*आपकी निजी जानकारी का दोनों कंपनियों में मिलान होना चाहिए
*में किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए
*अगर आपकी पुरानी कंपनी को कोई दिक्कत नहीं है तो ईपीएफ आसानी से ट्रांसफर हो जाएगा
*ईपीएफ ट्रांसफर का पंरपरागत तरीका
*इस प्रक्रिया के जरिए बैलेंस ट्रांसफर करवाने के लिए आपको फॉर्म 13 भरना होगा। इस फॉर्म को आपको अपनी नई या पुरानी कंपनी में देना होगा। वैरिफिकेशन के बाद आपकी कंपनी इस फॉर्म को ईपीएफओ को ट्रांसफर कर देगी। ईपीएफओ जानकारी को वैरिफाई करेगा और पुरानी कंपनी से जानकारी को सत्यापित करवाएगा। सत्यापन होने के बाद ईपीएफओ ईपीएफ बैलेंस दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर देगा।
इनका रखें ध्यान
इस प्रक्रिया में आधार और यूएएन नंबर की जरूरत नहीं है।
आपकी निजी जानकारी में अगर कोई गड़बड़ी है तो भी आप इसके जरिए बैलेंस ट्रांसफर करवा सकते हैं। ऐसे केस में आपको व्यक्तिगत जानकारी ठीक करने का फॉर्म देना होगा।
इस फॉर्म को आपकी पुरानी कंपनी सत्यापित करेगी।इसके लिए वहीं कंपनी होनी चाहिए जिसने ईपीएफ अकाउंट बनाया है और गलत जानकारी भरी है।
ईपीएफ ट्रांसफर का फॉर्म
ईपीएफ ट्रांसफर के लिए फॉर्म 13 का उपयोग होता है। इस फॉर्म में आपको व्यक्तिगत जानकारी भरनी होती है। आपको पुरानी नौकरी की जानकारी देनी होती है। साथ ही ईपीएफ अकाउंट नंबर भी भरना होता है। इसके अलावा नई कंपनी और नौकरी की जानकारी भरने का भी कॉलम इस फॉर्म में होता है। सभी जानकारी सही भरें।
स्टेटस कैसे जाने
ईपीएफ ट्रांसफर एक महीने से भी कम समय में हो जाता है। लेकिन अगर जरूरत पड़े तो आप स्टेटस भी चेक कर सकते हैं। अगर आपने ऑनलाइन ट्रांसफर की अर्जी दी है तो आप शुरुआत से स्टेटस देख सकते हैं। भौतिक रूप से अगर आपने अर्जी दी है तो आपकी अर्जी रीजनल ईपीएफ ऑफिस पहुंचने के बाद ही आप स्टेटस चेक कर पाएंगे। पीएफ ट्रांसफर का स्टेटस चेक करने के लिए  आप ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम पोर्टल पर जा सकते हैं। आप अलग से भी ईपीएफ क्लेम स्टेटस में जाकर अपने सभी क्लेम की जानकारी देख सकते हैं। अगर आपको इस प्रक्रिया से स्टेटस नहीं पता चलता है तो आप ग्रीवेंस पोर्टल पर जाकर क्लेम स्टेटस की जानकारी ले सकते हैं। अगर फिर भी पता नहीं चलता है तो सबसे आखिर में आरटीआई लगाकर अपनी अर्जी की स्थिति पता कर सकते हैं।

Saturday, June 18, 2016

लैंड बैंक में उद्योगों के लिए शाहाबाद व रामगंजमंडी में भूखंड

बिजनेस रिपोर्टर . कोटा
 राज्य सरकार के लैंड बैंक राज धरा में संभाग के बूंदी, बारां एवं कोटा जिले में उद्योगों के लिए भूखंड उपलब्ध हैं, लेकिन कोटा शहर के निकट में रीको के पास कहीं कोई जगह नहीं है। राज धरा में तीन तरह से भूखंडों का विवरण दिया गया है। जिसमें रा लैंड, अपकमिंग इंडस्ट्रियल एरिया एवं एक्साइटिंग इंडस्ट्रियल एरिया के कॉलम हैं। इसमें कौन से जिले में उद्योगों के लिए कितनी भूमि एवं चिन्हित भूखंड एवं आवंटित भूखंड के अलावा खाली भूखंडों की भी जानकारी है।
 उद्यमियों का कहना है कि उनकी ज्यादातर रुचि शहर के निकट जहां ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा हो वहां उद्योग लगाने की होती है। रीको के पास पिछले पांच-छह साल से शहर में एवं उसके आसपास कोई भूखंड नहीं है। सिर्फ कुबेर एक्सटेंशन इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़कर कहीं जगह नहीं है। पिछले पांच साल से यह जगह एनवायरमेंट क्लियरेंस में अटकी है। पिछले दिनों इसकी एनवायरमेंट मिनिस्ट्री की एक्सपर्ट कमेटी के सामने रीको की ओर से नियुक्त कंसलटेंट कंपनी ने अपना पक्ष रखा था। अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है।
 इंजीनियर पार्क समेत 70 से अधिक उद्योग इंतजार में
 रानपुर कुबेर एक्सटेंशन इंडस्ट्रियल एरिया के लिए सिंगल विंडो में करीब चार साल पहले 10 प्रोजेक्ट की फाइल लगी थी। इनके आवेदन जिला उद्योग केन्द्र ने जमीन के अभाव में लौटा दिए थे।इसके अलावा इंडस्ट्रियल डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिल न्याती ने इंजीनियरिंग पार्क के लिए 30 भूखंड मांगे थे। इसके अलावा युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना में करीब 30 आवेदन करने वाले सलेक्ट होने के बाद भी रीको से भूखंड नहीं मिलने से उद्योग नहीं लगा पाए। इस योजना में अब राजस्थान वित्त निगम भी उनके ही आवेदन स्वीकार करता है। जिनके पास पहले से भूखंड हैं।
 कहां कितनी भूमि
 राज धरा के नाम से लैंड बैंक की वेबसाइट पर रीको के अधीन बारां जिले में शाहाबाद में 137.21 हैक्टेयर भूमि है। इसमें तीन भूखंड चिंहित हैं। इनमें से एक डिसलरी (स्प्रिट) प्लांट के लिए आवंटित हुआ है। दो खाली हैं। कोटा जिले में रामगंजमंडी के फतेहपुर एरिया में 157.64 हैक्टेयर भूमि है। जिसमें 364 भूखंड चिन्हित किए गए हैं।
 रा लैंड - बूंदी जिले में डरोली में 45.42 हैक्टेयर औैर तालाब गांव में 26.07 हैक्टेयर भूमि है। यहां भूखंड चिंहित नहीं हैं।

वित्त निगम ने रियल एस्टेट में फाइनेंस से हाथ खींचा

बिजनेस रिपोर्टर . कोटा
 राजस्थान वित्त निगम ने रियल एस्टेट में मंदी को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में इस सेक्टर में फाइनेंस से हाथ खींच लिए हैं। अब निगम की पहली प्राथमिकता माइक्रो स्माल एवं मीडियम एंटरप्राइजेज सेक्टर में ही फाइनेंस की है। निगम भूखंड खरीदने के लिए भी कीमत का 75 प्रतिशत तक फाइनेंस करता है।
 वित्त निगम के नियमों के मुताबिक यदि कोई उद्यमी नगर विकास न्यास से भूमि खरीदता है, तो निगम उसे आवंटित भूमि का 25 प्रतिशत जमा करा देता है तो उस पर 75 प्रतिशत निगम लोन दे देगा। लोन की सीधे यह राशि न्यास के खाते में जमा हो जाएगी। अगर किसी के पास कन्वर्टेड भूमि है तो उद्यमी उस पर भी लोन ले सकता है।  वित्त निगम नगर विकास न्यास एवं रीको से खरीदी गई जमीन पर प्रमुखता से फाइनेंस करता है। स्थानीय शाखा प्रबंधक आनंद बरड़वा ने बताया कि रीको की भूमि पर 12 प्रतिशत की दर से कर्ज दिया जाता है। राजस्थान वित्त निगम पांच साल के लिए कर्ज देती है। चाहे व्यक्ति उद्योग लगाए या नहीं। इसकी वसूली चालू हो जाती है। उन्होंने बताया कि वित्त निगम अधिकतम 20 करोड़ रुपए तक का फाइनेंस करती है। उन्होंने बताया कि उद्योग या रियल एस्टेट में भूमि खरीदने के लिए बैंक लोन नहीं देता। सिर्फ वित्त निगम ही इसमें लोन देता है। इसलिए रियल एस्टेट में फाइनेंस के लिए सबसे ज्यादा निगम के पास ही आते हैं।
 सबसे ज्यादा कर्ज रियल एस्टेट में
 राजस्थान वित्त निगम के शाखा प्रबंधक के अनुसार शहर में अभी तक सबसे ज्यादा फाइनेंस 1500 करोड़ रुपए का रियल एस्टेट में किया गया है। जबकि इंडस्ट्री में 3600 करोड़ का फाइनेंस किया हुआ है। समाप्त हुए वित्त वर्ष 2015-16 में निगम ने उद्योग एवं रियल एस्टेट 37.50 करोड़ का फाइनेंस किया है। अभी तक 55 करोड़ का फाइनेंस हो चुका है।
 राजस्थान में कोटा अव्वल
 राजस्थान  वित्त निगम की कोटा शाखा वसूली एवं लोन वितरण में इस बार अव्वल रही है। स्थानीय शाखा ने 151 प्रतिशत टारगेट हासिल किया है। जबकि जयपुर शाखा 110 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है।
  

Thursday, June 16, 2016

एनसीडीईएक्स में जिंस डिलिवरी के समय गुणवत्ता की परख

मुंबई । नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पर किसानों की भागीदारी बढ़ रही है। इसे देखते हुए एक्सचेंज ने गोदामों से जिंसों की डिलिवरी के समय उनके नमूनों एवं परीक्षण को अनिवार्य किया है। इसकी शुरुआत सरसों के सभी अनुबंधों के साथ की गई है। एक्सचेंज ने आज इसकी घोषणा की। एक्सचेंज ने परीक्षण के तौर पर अगले आदेश तक सरसों के सभी अनुबंधों में अनिवार्य नमूनों एवं परीक्षण का फैसला किया है। 
 भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के मुताबिक अच्छी डिलिवरी सुनिश्चित करना एक्सचेंज की जिम्मेदारी है। अगर खरीदार या लिवाल एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले माल की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं है तो नियमों के मुताबिक यह एक्सचेंज की जिम्मेदारी है। इसे लागू करने के लिए एक्सचेंज ने आज एक परिपत्र जारी किया। कुछ कारोबारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि एक्सचेंज से मान्यता प्राप्त गोदामों में भंडारित सरसों में ज्यादा नमी होने की शिकायतें आई थीं। 
 एक्सचेंज ने परिपत्र में कहा गया है, 'जब हम किसी जिंस की डिलिवरी से पहले अनिवार्य रूप से नमूने लेने एवं परीक्षण की अधिसूचना जारी करते हैं तो यह काम एक्सचेंज द्वारा नियुक्त स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षणकर्ता से कराया जाएगा। डिलिवरी से पहले अनिवार्य रूप से नमूने लेने और जांच करने की लागत का खर्च लिवाल को वहन नहीं करना पड़ेगा। अगर जिंस की गुणवत्ता डिलिवरी के समय उसे जमा कराए जाने जैसी नहीं रहती है तो गोदाम सेवा प्रदाता को लिवाल के साथ यह विवाद सुलझाना होगा।'

Wednesday, June 15, 2016

अब उद्योगों का रजिस्ट्रेशन जिला उद्योग केन्द्र में नहीं होगा

बिजनेस रिपोर्टर . कोटा
 अब उद्योगों का जिला उद्योग केन्द्रों में पंजीयन नहीं होगा। बल्कि उद्यमियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम मंत्रालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जहां पर उनका उद्योग आधार के नाम से रजिस्ट्रेशन होगा। मई माह से जिला उद्योग केन्द्रों पर नए उद्योगों के लिए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया है।
 मात्र एक पेज का फार्म भर कर उद्यमी उद्योग आधार रजिस्‍ट्रेशन नंबर हासिल कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की पंजीयन की व्यवस्था को आधार कार्ड से जोड़ दिया है। इसके लिए केंद्र ने 'उद्योग आधार' योजना  शुरू की है। इस योजना के शुरू हो जाने से उद्यमियों को उद्योगों के लिए पंजीयन के लिए सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।  जिन इकाइयों को सरकार की अनेक लाभप्रद स्कीम का फायदा लेना है वे अब एक पेज के सरलीकृत फॉर्मेट में वांछित जानकारी स्वघोषणा के साथ ऑनलाइन भेज कर कभी भी पंजीकरण करा सकते है। 
 उद्यमियों के अनुसार अभी तक उद्योग स्थापना के लिए ईएम पार्ट 1 के पंजीकरण के लिए 5 पेज का फॉर्मेट भरना पड़ता था तथा उसमें 18 तरह की सूचनाएं तथा 6 संलग्न प्रपत्र प्रस्तुत करने पड़ते थे। इकाई द्वारा उत्पादन शुरू करने के बाद ईएम पार्ट 2 के पंजीकरण के लिए 6 पेज का फॉर्मेट भरना पड़ता था तथा उसमें 21 तरह की सूचनाएं तथा 6 संलग्न प्रपत्र प्रस्तुत करने पड़ते थे। अब उद्यमियों को रजिस्ट्रेशन के सभी झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
 ऑनलाइन स्वयं कर सकते हैं
 जिनके पास घर या ऑफिस में इंटरनेट की सुविधा है। वह एमएसएमई की वेबसाइट पर स्वयं आधार रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए स्वयं का आधार नंबर जरूरी है। फार्म में प्रमुख रूप से आधार नंबर, संस्थान का नाम, उद्योग का रजिस्ट्रेशन नंबर यदि हो तो, बैंक खाता नंबर व आईएफ एससी कोड, मेल आईडी, निवेश व पेन कार्ड नंबर आदि की प्रमुख जानकारी भरनी है। इसके बाद तुरंत आपके उद्योग का ई -आधार जनरेट हो जाएगा।
 आधार को ही मान्यता
 उद्योग का आधार नंबर ही उद्योग का पंजीयन माना जाएगा। उद्योग कार्ड उद्योगों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बैंक ऋण, जमीन आवंटन, बिजली कनेक्शन एवं सब्सिडी आदि मिलेगी।
 राज्य में 48823 उद्योग को आधार जारी
 माइक्रो स्माल एवं मीडियम एंटरप्राइजेज के अनुसार अभी तक राजस्थान में 48 हजार 823 उद्योगों को आधार जारी हो चुके हैं। जिसमें से 41510 माइक्रो, 6835 स्माल एवं 278 मीडियम श्रेणी के उद्योग शामिल हैं।