अगर आप अपने प्रॉविडेंट फंड यानी PF अकाउंट से पैसा निकालने की सोच रहे हैं तो आपको जान लेना चाहिए कि सरकार ने इससे संबंधित कुछ नियमों में फेरबदल कर दी है। अगर आप EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के सदस्य हैं तो पैसा निकालने के लिए अब से आपको विदड्रॉल का फॉर्म के साथ-साथ पर्सनल जानकारी
से जुड़े कुछ डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी भी जमा करानी अनिवार्य है। अगर आप इन डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी नहीं दे पाते तो अब आप अपने ही PF अकाउंट से पैसे नहीं निकाल पाएंगे। जानिए क्या-क्या बदल गया है..
आधार कार्ड:PF के विदड्रॉल फॉर्म के साथ अब से आपको अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी देना अनिवार्य कर दिया गया है। सिर्फ आधार नंबर बताने से भी काम नहीं चलेगा आपको हर हालत में फोटोकॉपी देनी होग और शक होने पर सत्यापन के लिए आपका ओरिजिनल डॉक्युमेंट भी मांगा जा सकता है। हाल में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ईपीएफओ ने पीएफ और पेंशन से जुड़े बेनेफिट लेने के लिए आधार मैंडेटरी कर दिया है।
यूनीवर्सल अकाउंट नंबर (UAN)अब से आपको PF अकाउंट से पैसे निकालने के लिए विदड्रॉल फार्म के साथ यूनीवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन की फोटो कॉपी भी जमा करानी अनिवार्य हो गयी है। अब सिर्फ यूएएन नंबर देने से काम नहीं चलेगा।
PAN कार्डपीएफ विद्ड्रॉल के लिए अब से परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन कार्ड की फोटोकॉपी भी देना अनिवार्य है। पहले विद्ड्रॉल फार्म में पैन नंबर भरने से ही आपका काम खत्म हो जाता था लेकिन अब आपको पैन कार्ड की फोटोकॉपी भी देनी होगी। इसके बिना आपको पैसा नहीं मिलेगा।
कंपनी के संपर्क में रहना ज़रूरीपीएफ विद्ड्रॉल फार्म जमा करने से पहले आपको अपनी वर्तमान या पुरानी कंपनी के एचआर से इसे वेरीफाई कराना होगा। फार्म सबमिट करने के बाद कंपनी के एचआर के संपर्क में रहें। कई बार कोई डिटेल छूट जाने के कारण आपको फार्म ईपीएफओ ऑफिस में वापस आ जाता है।
ऐेसे में अगर आप एचआर के संपर्क में हैं तो आपके लिए इस प्रॉसेस को कंप्लीट करने में आसानी होगी। बता दें कि अब पीएफ विद्ड्रॉल में पहले की तुलना में कम समय लगता है। आम तौर पर अब पीएफ विद्ड्रॉल फार्म जमा करने के 15 दिन के अंदर पैसा आपके अकाउंट में आ जाता है।
आयकर विभाग ने बैंकों से किसी खाते में एक साल में दस लाख रुपये से अधिक की जमा तथा क्रेडिट कार्ड के बिलों के लिए
एक लाख रुपये या अधिक के नकद भुगतान की जानकारी उसे उपलब्ध कराने को कहा है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अधिसूचना में कर अधिकारियों को सूचित किए जाने वाले नकद लेनदेने का अधिसूचित किया गया है। इसके लिए ई-प्लेटफार्म स्थापित किया गया है।इसके अलावा सीबीडीटी ने अपनी नवंबर, 2016 के निर्देश को दोहराया है जिसमें बैंकों से 9 नवंबर से 30 दिसंबर, 2016 के दौरान एक व्यक्ति के एक या अधिक खातों में ढाई लाख रुपये या अधिक की जमा की सूचना देने को कहा था। 500 और 1,000 का नोट बंद करने के बाद सरकार ने पुराने नोटों को जमा कराने के लिए 50 दिन का समय दिया था।
उस समय आयकर विभाग ने 9 नवंबर से 30 दिसंबर के दौरान एक व्यक्ति के एक या अधिक चालू खातों में 12.50 लाख रुपये या अधिक की जमा या अन्य खातों में ढाई लाख रुपये या अधिक की जमा की जानकारी देने को कहा था। अधिसूचना में कहा गया है कि एक वित्त वर्ष में किसी व्यक्ति से 10 लाख रुपये से अधिक की शेयर पुनर्खरीद की सूचना सूचीबद्ध कंपनी को देनी होगी। इसके अलावा 10 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा ट्रैवलर्स चेक या फॉरक्स कार्ड सहित की जानकारी भी कर अधिकारियों को देनी होगी। संपत्ति पंजीयक को किसी व्यक्ति द्वारा 30 लाख रुपये की से अधिक की अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त की जानकारी कर अधिकारियों को देनी होगी।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार पैन कार्ड के जरिये नगदी के जमा, हस्तांतरण, निकासी और भुगतान की सीमा में कटौती करने की तैयारी में है। आगामी बजट में बैंक में जमा, होटल बिल के भुगतान और शेयरों की खरीद करने समेत अन्य में 30 हजार रुपये से अधिक नगदी के इस्तेमाल पर पैनकार्ड देना अनिवार्य किया जा सकता है। मौजूदा समय इन सुविधाओं में 50 हजार रुपये से ऊपर मुद्रा के प्रयोग पर पैनकार्ड देना होता है।
केंद्र सरकार ने 500 और हजार रुपये के नोट बंद करने के बाद नगदी निकासी पर पाबंदी लगाई और फिर नगदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में जुट गई। सूत्रों की माने तो इस क्रम में सरकार अब फरवरी में पेश होने वाले बजट में यह घोषणा कर सकती है कि 30 हजार रुपये से ज्यादा की खरीद, हस्तांतरण, जमा या लेनदेन पर पैनकार्ड देना जरूरी होगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा लेनदेन औपचारिक अर्थव्यवस्था के तहत आ सकें और आयकर विभाग आसानी से तय राशि से ज्यादा के लेनदेन की निगरानी कर सके। सूत्र बताते हैं कि सरकार के इस कदम का मकसद नगदी के जरिये होने वाली खरीद-फरोख्त और लेनदेन में टैक्स की चोरी रोकना है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इस कदम को उठाए जाने के बाद बड़े लेनदेन करने वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन करेंगे, क्योंकि नगदी के इस्तेमाल पर उन्हें पैनकार्ड देने की जहमत उठानी पड़ेगी।
नगदी हतोत्साहित करने के कदम
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के मद्देनजर सूत्रों का कहना है कि पैनकार्ड की अनिवार्यता के अलावा सरकार तय सीमा से ऊपर नगदी के भुगतान पर भी शुल्क लगाने की घोषणा कर सकती है। इस कदम से सीधे तौर पर नगदी का प्रयोग करने वाले हतोत्साहित होंगे। सूत्रों की माने तो सरकार हर हाल में नगदी के प्रयोग को डिजिटल लेनदेन की ओर स्थानांतरित करना चाहती है जिसके मद्देनजर डिजिटल भुगतान पर छूट और इनाम जैसी योजनाएं सरकार पहले ही ला चुकी है। बकायदे डिजिधन मेले में लोगों को डिजिटल लेनदेन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभी तक 27 शहरों में यह मेला लगाया जा चुका है और यह कार्यक्रम 100 शहरों के लिए नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया है। सूत्र बताते हैं कि वित्त मंत्रालय ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अलग से बजट तय करने का भी निर्णय लिया है जिसकी घोषणा भी बजट में की जा सकती है।
केवाईसी हो सकता है सख्त
सरकार के सूत्रों की माने तो बजट में बैंक खाता खुलवाने के दौरान 'ग्राहक को जानो' (केवाईसी) के नियमों को और सख्त किया जा सकता है। सभी बैंकों को इनका अनिवार्य तौर पर पालन नहीं करने की सूरत में जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तक देश में 5 लाख से भी ज्यादा खाते ऐसे थे जिनमें केवाईसी का अनुपालन नहीं किया गया। जब आयकर विभाग सख्त हुआ तब बैंकों ने ग्राहकों से केवाईसी की शर्तों को पूरा करना शुरू किया। सूत्रों की माने तो नए नियमों में आधार और मोबाइल नंबर भी देना जरूरी किया जा सकता है। हालांकि आधार देना सिर्फ उन लोगों के लिए जरूरी होगा जो विभिन्न स्तरों पर सरकारी छूट का लाभ लेते हैं। ऐसे में प्लास्टिक मनी के प्रयोग में छूट मुहैया कराने के आधार पर ज्यादातर लोगों को आधार देना होगा।
कम स्पीड के डेटा नेटवर्क में कई बार कुछ मोबाइल ऐप्स काम नहीं करते हैं। इसी प्रकार की स्थिति में कमजोर नेटवर्क या डेटा कनेक्टिविटी वाले इलाकों के लिए गूगल ने एक नया फीचर शुरू किया है। यह फीचर है ऑफलाइन सर्च का।
ऐसे काम करेगा यह फीचर
जब यूजर ऑफलाइन है तो गूगल ऐप सर्च कीवर्ड को स्टोर कर लेगा और दोबारा कनेक्शन मिलने पर आपको रिजल्ट दिखाई देगा। दरअसल, यह फीचर तुरंत रिजल्ट नहीं देगा, बल्कि कनेक्टिविटी मिलने का इंतजार करेगा और डेटा स्पीड मिलते ही आपको रिजल्ट मिलने का नोटिफिकेशन प्राप्त होगा।गूगल ऐप में नया मैनेज सर्च टैब दिया गया है। यहां यूजर अपने ऑफलाइन सर्च कीवर्ड को मैनेज कर पाएंगे। गूगल का दावा है कि नए सर्च पैटर्न से डेटा खपत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह फीचर गूगल ऐप के लेटेस्ट 6.9.37 वज्रन में उपलब्ध है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि अगर पत्नी अपने पति को रेगुलर यौन संबंध बनाने से रोकती है तो यह पति पर अत्याचार है और उनके बीच तलाक का आधार हो सकता है। अदालत ने बात अकोला फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराते हुए कही जिसमें यौन संबंध नहीं बनाने देने पर पति द्वारा तलाक की मांग मंजूर कर ली गई थी।हाईकोर्ट के जस्टिस वसंती नाइक और जस्टिस विनय देशपांडे की बेंच ने ने इस फैसले को लेकर कहा कि पत्नी की तरफ से पति को यौन संबंध बनाने से इन्कार करना उस पर सच में अत्याचार करने जैसा है।
रिकॉर्ड में कई सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि पत्नी के यौन संबंधों से इन्कार के अलावा घर के काम ना करना रेगुलर यौन संबंध ना बनाने के चलते पति को मानसिक प्रताड़ना मिली है।महीनों रहती थी मायके, अमावस और पूनम के बहाने नहीं बनाती थी संबंधएक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार तलाक लेने वाले पति की शिकायत थी कि उसकी शादी 2001 में हुई थी और उसकी पत्नी लगातार अपने मायके जाती रहती थी। वहां जाकर वो महीने भर रहती थी और तभी लौटती थी जब उसका पति या सास लेने जाती थी।पति ने कहा कि उसकी पत्नी घर के काम ना करने के साथ ही उसके साथ यौन संबंध भी नहीं बनाने देती थी। पति जब भी संबंध बनाने जाता वो कभी अमावस तो कभी पूनम होने का बहाना कर इन्कार कर देगी। इसके चलते पति तनाव में रहता था और तंग आकर अदालत पहुंच गया।
महिला ने लगाया दहेज प्रताड़ना का आरोप
पति के आरोपों को नकारते हुए महिला ने अपने ससुराल वालों पर ही दहेज प्रताड़ना का आरोप लगा दिया। पति के बयान के आधार पर अकोला कोर्ट ने दोनों के बीच 2011 को तलाक को मंजूरी दे दी। इस फैसले को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला को उसके परिवार के बड़े लोगों ने अपने पति के साथ मुक्त होकर यौन संबंध बनाने की सलाह दी थी। अगर महिला पहले से ही पति से रोज फ्री होकर यौन संबंध बनाती तो उसे ऐसी सलाह नहीं देनी पड़ती। वहीं महिला यह साबित करने में नाकाम रही है कि उससे दहेज की मांग की गई। फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के सबूतों को सही तरीके से देखा और पाया कि पति पर अत्याचार हुआ है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए अक्सर साल का यह वक्त सबसे ज्यादा परेशान करने वाला होता है। नया साल शुरू होते ही दफ्तर के मानव संसाधन (एचआर) विभाग से टोकाटोकी शुरू हो जाती है और उन सभी निवेश योजनाओं के कागजात मांगे जाते हैं, जिनका जिक्र आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर बचाने के लिए वित्त वर्ष के आरंभ में किया गया था। ऐसे में अक्सर कर्मचारी निवेश की किसी उचित योजना के बिना ही आंकड़े दे देते हैं और जो भी कागज हाथ लगते हैं, उन्हें पेश कर दिया जाता है।
यहां अक्सर दिक्कत होती है क्योंकि उन्होंने वर्ष के आरंभ में बचत और निवेश की जो योजना बताई थी, उसके सभी सबूत दफ्तर में मांगे जाते हैं। जब तक वे निवेश के सबूत पेश नहीं करते हैं तब तक उन्हें वेतन में कमी की मार झेलनी पड़ती है क्योंकि उनका मोटा कर कटता है। कई बार तो वेतन का मामूली हिस्सा ही उन्हें मयस्सर होता है और कुछ का पूरा वेतन ही कट जाता है। यह वाकई में बहुत दिक्कत भरा वक्त होता है क्योंकि आपको कर का गणित पूरा करने के लिए अपने नियोक्ता को रकम देनी भी पड़ सकती है यानी वेतन तो हाथ नहीं आया उलटा अपनी ही जेब से पैसा देना पड़ गया। अगर आप इन परेशानियों से बचे रहना चाहते हैं तो कर का सिरदर्द दूर रखना चाहते हैं तो इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
80सी का लाभ
वेतनभोगी कर्मचारियों को धारा 80सी, 80डी, 80जी आदि के तहत कर छूट मिलती है। धारा 80सी भविष्य निधि और अन्य निवेश एवं बीमा पॉलिसी पर 1.50 लाख रुपये की छूट देती है। अन्य धाराएं आवास किराया भत्ता (एचआरए), अवकाश यात्रा भत्ता (एलटीए), वाहन भत्ता, चिकित्सा भत्ता और दूसरे भत्तों पर कर छूट का लाभ देती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि कर्मचारी अक्सर 80सी पर विचार करते हैं। 'बड़ी तादाद में वेतनभोगी करदाता धारा 80सी के तहत जब कर छूट का हिसाब लगा रहे होते हैं तो अक्सर वे कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ को उसमें गिनना भूल जाते हैं। यह भूल बहुत भारी बैठती है। इसके अलावा कई बार वे जल्दबाजी में तमाम निवेश योजनाएं खरीद लेते हैं, जबकि उन्हें पहले बीमा की जरूरतों और आवास ऋण पर छूट के बारे में भी सोचना चाहिए।' यदि आप राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (एनपीएस) में निवेशक हैं तो आप धारा सीसीडी के तहत 50,000 रुपये की छूट भी ले सकते हैं।
स्वास्थ्य बीमा लाभ
यह भी ऐसी श्रेणी है, जिसकी कमी आपको खल सकती है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति यानी मेडिकल रीइंबर्समेंट में मिलने वाली 15,000 रुपये तक की राशि करमुक्त होती है। इसके अलावा धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा लाभ भी आप ले सकते हैं। इसके तहत, आप स्वयं, पत्नी, बच्चे और माता-पिता के लिए प्रीमियम पर 25,000 रुपये की कर छूट का दावा कर सकते हैं। यदि माता-पिता 60 साल से अधिक उम्र के हैं तो इसके लिए 35,000 रुपये की अतिरिक्त कर छूट सीमा है। कुल मिलाकर, आप संबद्घ पॉलिसी खरीद कर 60,000 रुपये तक बचा सकते हैं।
ऋण अदायगी
इसमें दोहरे लाभ हैं- मूल भुगतान पर धारा 80सी के तहत दावा किया जा सकता है और धारा 24बी के तहत अतिरिक्त दो लाख रुपये का दावा किया जा सकता है। संपत्ति में सामूहिक रूप से मालिकाना (पति-पत्नी दोनों) हक रखने वाले दंपती के लिए ब्याज पर कर लाभ सालाना 5 लाख रुपये तक हो सकता है। यदि आपने शैक्षिक ऋण ले रखा है तो पूरा ब्याज भुगतान धारा 80ई के तहत कर छूट के लिए उपलब्ध है, लेकिन इसमें मूल रकम की अदायगी का लाभ हासिल नहीं है।
ये ऐसे प्रमुख लाभ हैं जो आप आय-कर विभाग से हासिल कर सकते हैं। एचआर विभाग को उचित दस्तावेज सौंपकर आप काफी रकम बचा सकेंगे। यदि आप इन सभी कर छूटों का लाभ लेने में सक्षम हैं तो आपको 7 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। इसमें 2.5 लाख रुपये की मूल छूट सीमा शामिल है। यदि आप आवास किराया भत्ते, एलटीए आदि का सही दस्तावेज दे रहे हैं तो लाभ भी अधिक हासिल हो सकता है।
पांच साल तक के लिए
यदि आपको पांच साल के अंदर पैसे की जरूरत हो तो राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) या पांच वर्षीय डाककर जमा योजनाएं अच्छा विकल्प हैं। एनएससी मौजूदा समय में सालाना 8 फीसदी का प्रतिफल देते हैं जबकि डाकघर जमा पर 7.8 फीसदी का ब्याज मिलता है। पांच साल की बैंक एफडी भी धारा 80सी के तहत कर छूट प्रदान करती है। चूंकि ये निर्धारित आय निवेश हैं, इसलिए इनमें सिर्फ अतिरिक्त पूंजी वाले व्यक्ति ही कर-बचत संबंधित निवेश के लिए विचार कर सकते हैं।
10 साल या अधिक
दीर्घावधि निवेश के लिए, पब्लिक प्रोवीडेंट फंड (पीपीएफ) मौजूदा समय में सालाना 8 फीसदी का प्रतिफल देता है जो एक अच्छा विकल्प है, लेकिन इसमें निवेश 15 साल के लिए लॉक हो जाता है। पीपीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ईईई है। लेकिन ब्याज दर हर तिमाही में बदलती है।
रिजर्वेशन क्लास में खत्म होगी दूरी की पाबंदी
रिजर्वेशन क्लास के पैसेंजरों को रेलवे ने राहत दी है। रेलवे ने इस कोटे में दूरी की पाबंदी खत्म कर दी है। इसके बाद पैसेंजरों को कन्फर्म सीट आसानी से मिल पाएगी। इसे लेकर रेलवे बोर्ड में पैसेंजर मार्केटिंग के डायरेक्टर विक्रम सिंह की ओर से जोनल रेलवे के चीफ कमर्शल मैनेजर्स को आदेश जारी कर दिया गया है।जारी हुआ नया आदेशजोलन मैनेजर्स को कहा गया है कि यह आदेश किसी निर्धारित रूट की जगह पूरे देश के रेलवे रूट की ट्रेनों के लिए है, ऐसे में डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जा रहा है। सिस्टम में मोडिफिकेशन का काम शुरू कर दिया जाए।
कैसे तय होता था कन्फर्मेशन कोटा?लंबी दूरी की ट्रेनों में रिजर्व कोटा दूरी के मुताबिक तय किया जाता है। उदाहरण के लिए, जैसे नई दिल्ली से चैन्नै सेंट्रल तमिलनाडु एक्सप्रेस (12621/22) में रिजर्व कोटे की डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन 600 किलोमीटर है। इस ट्रेन का नई दिल्ली के बाद रिजर्व कोटा सीधे भोपाल में है। रास्ते में यह ट्रेन आगरा, ग्वालियर और झांसी रेलवे स्टेशन पर रुकती है। ऐसे में इन बीच के स्टेशनों पर वेटिंग टिकट पुल्ड कोटे में जारी की जाती है। पुल्ड कोटे में टिकट जारी होने के बाद वह तभी कन्फर्म हो पाती है, जब इस कोटे में टिकट कैंसल होती है। अन्य कोटे में टिकट कैंसल होने पर वेंटिंग क्लियर नहीं हो पाती।अब आसान होगा कन्फर्मेशनपूरे इंडियन रेलवे में हजारों ऐसी ट्रेनें हैं जिसमें डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन है। ऐसे में पैसेंजरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन खत्म हो जाने से पैसेंजरों को जनरल वेटिंग दी जाएगी जिससे वेंटिंग टिकट आसानी से कन्फर्म हो जाएंगी। हालांकि, अभी बिना रिजर्व क्लास के पैसेंजरों को राहत नहीं मिल पाई है।