Friday, April 18, 2014

लॉकर रेंट पर लेने से पहले रखें ख्याल

दिनेश माहेश्वरी
कोटा।
कीमती चीजों और डॉक्युमेंट्स को सेफ रखने के लिए बैंक सेफ डिपॉजिट लॉकर अच्छा ऑप्शन है। हम आपको बताते हैं  कि लॉकर रेंट पर लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

यह कैसे काम करता है?
लॉकर में आप जूलरी, कैश और इंपॉर्टेंट डॉक्युमेंट्स रख सकते हैं। बैंक 'फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व' बेसिस पर लॉकर अलॉट करते हैं। अगर बैंक की किसी ब्रांच के पास खाली लॉकर नहीं है, तो वहां एक वेटिंग लिस्ट मेंटेन की जाती है और उस हिसाब से लॉकर दिया जाता है। हर लॉकर में चाबियों के दो सेट होते हैं। इनमें से एक कस्टमर के लिए और दूसरा बैंक के पास रहता है। दोनों चाबियों का एक साथ इस्तेमाल करने पर ही लॉकर को खोला जा सकता है। लॉकर के लिए जॉइंट होल्डर हों, तो अच्छा रहता है। इसके लिए एक या उससे अधिक नॉमिनी भी अप्वाइंट किए जा सकते हैं। इससे दोनों अकाउंट होल्डर्स के दुनिया में नहीं रहने पर लॉकर में रखे सामान आसानी से नॉमिनी को मिल जाते हैं। लॉकर रेंट पर लेने से पहले गाइडलाइंस ध्यान से पढ़ें।

. इसकी कॉस्ट कितनी है? 
ये अलग-अलग साइज में आते हैं और इनकी रेंट में फर्क होता है। एसबीआई छोटे लॉकर के लिए सालाना 1,019 रुपये की फीस लेता है। मीडियम के लिए 2,547 रुपये, बड़े लॉकर के लिए 3,056 रुपये और एक्सट्रा लार्ज लॉकर के लिए वह 5,093 रुपये लेता है। प्राइवेट बैंकों में लॉकर चार्जेज ज्यादा हैं। सिटी बैंक छोटे लॉकर के लिए 2,000 रुपये सालाना लेता है। वह बेस्ट लॉकर फैसिलिटी के लिए 40,000 रुपये सालाना फीस लेता है। लॉकर के लिए एक बार रजिस्ट्रेशन फीस भी देनी पड़ती है। एसबीआई की वनटाइम फीस 509 रुपये है। अलग-अलग बैंकों के लिए यह चार्ज अलग-अलग है। समय पर रेंट का भुगतान नहीं होने पर बैंक सालाना रेंट के 10-50 पर्सेंट तक की पेनाल्टी भी लगाते हैं। साल में आप कितनी बार लॉकर एक्सेस कर सकते हैं, इसके भी नियम हैं। मिसाल के लिए एसबीआई 12 फ्री विजिट की इजाजत देता है। उसके बाद हर एक्सट्रा विजिट के लिए वह 51 रुपये चार्ज करता है। हालांकि आपको समय-समय पर लॉकर जाकर जरूर देखना चाहिए। अगर आपसे लॉकर की चाबी गुम हो जाती है, तो बैंक को उसे तोड़ने और असल खर्च के अलावा 500 रुपये सर्विस चार्ज के तौर पर वसूलने की भी इजाजत है।
 क्या यह सेफ होता है?
आरबीआई का कहना है कि लॉकर में रखे गए सामान के लिए बैंक किसी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए चोरी होने पर बैंक उसके लिए जवाबदेह नहीं होगा। हालांकि रिजर्व बैंक ने बैंकों को कस्टमर्स के हितों की रक्षा के लिए सबसे बेहतर सिक्यॉरिटी इंतजाम करने को भी कहा है। बैंक जिन लॉकर्स का इस्तेमाल करते हैं, उनकी क्वॉलिटी भी काफी अच्छी होती है।
. क्या आपको लॉकर के लिए बैंक अकाउंट खोलने की भी जरूरत है?
आरबीआई का कहना है कि बैंक उन लोगों को भी लॉकर फैसिलिटी देने से मना नहीं कर सकते, जिन्होंने उनके पास खाता नहीं खुलवाया है। हालांकि बैंक आपसे लॉकर के 3 साल के रेंट के बराबर पैसा डिपॉजिट करने के लिए कह सकते हैं। अगर लॉकर का सालाना रेंट 1,019 रुपये है तो बैंक आपसे 4,066 रुपये (1019 रुपये गुना 3 + 509 रुपये सर्विस चार्ज + 500 रुपये ब्रेकिंग चार्ज) का फिक्स्ड डिपॉजिट करने के लिए कह सकते हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि बैंक केवाईसी के नाम पर सेविंग बैंक अकाउंट खोलने के लिए कहते हैं। एग्रेसिव बैंक तो लॉकर फैसिलिटी के लिए 1-5 लाख रुपये का एफडी करने को भी कहते हैं। हालांकि यह आरबीआई की गाइडलाइंस का उल्लंघन है।
 आपको कितना कंपनसेशन मिलेगा?
बैंक लॉकर में रखे गए सामान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। कुदरती आपदा (बाढ़ या भूकंप) और आतंकवादी हमले में अगर लॉकर में रखे सामान को नुकसान पहुंचता है या ये गुम हो जाते हैं, तो बैंक कस्टमर को मुआवजा देने से मुकर सकता है। चोरी या दीमक लगने पर भी बैंक यह दलील दे सकता है कि लॉकर में रखे गए सामान के बारे में उसे पता नहीं था, इसलिए वह आपको मुआवजा नहीं दे सकता। हालांकि अगर सिक्यॉरिटी या बेसिक मेंटेनेंस में बैंक की ओर चूक होती है, तो इसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस मामले में अदालत जाने पर आप बैंक से कुछ मुआवजा हासिल कर सकते हैं।

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